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Bihar: 15 साल का इंतजार खत्म, इस जिले के सदर अस्पताल में शुरू हुआ आधुनिक ICU; गंभीर मरीजों को बड़ी राहत
Wed, 22 Jul 2026 04:50 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Wed, 22 Jul 2026 04:50 PM IST
सार
15 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार समस्तीपुर सदर अस्पताल में बुधवार को आधुनिक आईसीयू सेवा शुरू हो गई। अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञों की निगरानी से लैस यह सुविधा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अब गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए पटना, दरभंगा या निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
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आईसीयू का उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
समस्तीपुर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। सदर अस्पताल में चार बेड वाले आधुनिक इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) का शुभारंभ हो गया। इसके शुरू होने से गंभीर मरीजों को अब जिले में ही बेहतर और जीवनरक्षक इलाज मिल सकेगा। करीब 15 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद सदर अस्पताल में आईसीयू सेवा शुरू हुई है। अब हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, गंभीर सड़क दुर्घटना और सांस संबंधी गंभीर बीमारियों के मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
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समस्तीपुर को मिली बड़ी स्वास्थ्य सौगात
समस्तीपुर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बुधवार को बड़ी मजबूती मिली। सदर अस्पताल में चार बेड वाले आधुनिक इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) का विधिवत शुभारंभ किया गया। जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने अस्पताल परिसर में फीता काटकर आईसीयू का उद्घाटन किया, जबकि बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यस्तरीय उद्घाटन किया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार, अस्पताल के चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी और जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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अब जिले में ही मिलेगा जीवनरक्षक इलाज
आईसीयू शुरू होने से समस्तीपुर जिले के गंभीर मरीजों के लिए इलाज की राह आसान हो जाएगी। अब हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, गंभीर सड़क दुर्घटना, सांस संबंधी गंभीर बीमारी और अन्य आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को बेहतर उपचार के लिए पटना, दरभंगा या निजी अस्पतालों में रेफर करने की मजबूरी काफी हद तक कम हो जाएगी। समय पर इलाज मिलने से मरीजों की जान बचने की संभावना बढ़ेगी, वहीं इलाज पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम होगा।
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24 घंटे डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की रहेगी निगरानी
आईसीयू के संचालन की जिम्मेदारी डॉ. सत्येंद्र कुमार को नोडल पदाधिकारी के रूप में सौंपी गई है। यहां पांच चिकित्सकों की तीन शिफ्टों में आठ-आठ घंटे की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा प्रशिक्षित जीएनएम और नर्सिंग स्टाफ की 24 घंटे तैनाती रहेगी, ताकि किसी भी गंभीर मरीज को तत्काल विशेषज्ञ देखभाल मिल सके।
अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है आईसीयू
नवनिर्मित आईसीयू को आधुनिक जीवनरक्षक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। यहां वेंटिलेटर, मल्टी-पैरा मॉनिटर, सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन, सक्शन मशीन और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम सहित सभी आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं। अस्पताल प्रशासन ने जरूरी दवाओं का पर्याप्त भंडारण भी किया है। आवश्यकता पड़ने पर आयुष्मान भारत योजना के तहत विशेष दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।
2011 में शुरू हुई पहल, अब जाकर मिला मुकाम
सदर अस्पताल में आईसीयू स्थापित करने की पहल वर्ष 2011 में हुई थी, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से यह सुविधा वर्षों तक शुरू नहीं हो सकी। करीब 15 वर्ष बाद अब आईसीयू सेवा शुरू होने से जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में नया अध्याय जुड़ गया है। इससे गंभीर मरीजों के रेफरल मामलों में कमी आने और स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए मील का पत्थर
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक आईसीयू की शुरुआत समस्तीपुर के स्वास्थ्य ढांचे के लिए मील का पत्थर साबित होगी। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को 'गोल्डन ऑवर' के भीतर उपचार उपलब्ध कराने में यह सुविधा अहम भूमिका निभाएगी। इससे न केवल मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि जिले के लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा भी और मजबूत होगा।