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Bihar: बिहार विधानमंडल के बजट सत्र में खास 'गंध' से होगा स्वागत, 3 हजार कर्मियों के लिए हर दिन की यह व्यवस्था
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Fri, 23 Jan 2026 05:00 AM IST
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सार
Bihar : बिहार विधानमंडल के पास सरकार के एक ऐसे सिस्टम की शुरुआत होने जा रही है, जिससे न सिर्फ आसपास के लोग बल्कि विधानमंडल के लगभग तीन हजार कर्मी भी परेशान होंगे। बहुत जल्द उनका एक खास 'गंध' से सामना होना बाकी है।
कचरा निस्तारण केंद्र यारपुर गर्दनीबाग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
2 फरवरी से बिहार विधान मंडल का सत्र शुरू हो रहा है वहीं आने वाले बिहार विधानमंडल का बजट सत्र हंगामेदार होने के आसार हैं। एक तरफ विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बनाएगा, तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाने को तैयार है। लेकिन इस बार सदन के भीतर की राजनीति से इतर, सदन के बाहर की गंध वाली हवा चर्चा का विषय बनी हुई है। विधानसभा के 243 और विधान परिषद के 75 सदस्यों सहित करीब 3000 कर्मचारियों का स्वागत इस बार एक खास तरह की 'गंध' से होने जा रहा है।
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विधानसभा से महज 100 मीटर की दूरी पर संकट
पटना के पॉश इलाके हार्डिंग रोड और रेलवे लाइन के समीप स्थित बिहार विधानसभा की दीवार से महज 100 मीटर की दूरी पर नया कचरा निस्तारण केंद्र बनाया जा रहा है। इससे यारपुर और गर्दनीबाग के 2 किलोमीटर की परिधि में बसे लोग इसकी दुर्गंध से परेशान होंगे। हालांकि पटना नगर निगम और बिहार सरकार का दावा है कि यहाँ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा और दुर्गंध नहीं आएगी।
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सरकारी दावों की जमीनी हकीकत
भले ही सरकार और नगर निगम इसे 'गंधहीन' बनाने का दावा कर रहे हों, लेकिन स्थानीय स्थिति कुछ और ही बयां करती है। पटना के बीचों-बीच स्थित इस कचरा निस्तारण केंद्र को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में चल रहे अन्य कचरा केंद्रों की हालत यह है कि वहां से उठने वाली सड़न ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। वहीं बजट सत्र के दौरान जब राज्य के नीति-निर्धारक सदन में बैठेंगे, तब कचरे की यह सड़न उनके स्वागत में तैयार खड़ी होगी। 318 विधायकों और विधानमंडल के 3000 से ज्यादा कर्मचारियों के लिए यह केवल सत्र भर की बात नहीं है, बल्कि उन्हें साल भर हर कार्यदिवस पर इसी माहौल में काम करना होगा।
विपक्ष बना सकता है मुद्दा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बजट सत्र में जहां विकास और रोजगार पर बहस होगी, वहीं विधानमंडल के इतने करीब कचरा केंद्र का निर्माण स्वास्थ्य और स्वच्छता के मोर्चे पर सरकार की घेराबंदी का कारण बन सकता है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस 'गंध' से बचने का कोई ठोस समाधान निकाल पाती है या विधायकों को नाक पर रुमाल रखकर लोकतंत्र के इस मंदिर में प्रवेश करना होगा।
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विधानसभा से महज 100 मीटर की दूरी पर संकट
पटना के पॉश इलाके हार्डिंग रोड और रेलवे लाइन के समीप स्थित बिहार विधानसभा की दीवार से महज 100 मीटर की दूरी पर नया कचरा निस्तारण केंद्र बनाया जा रहा है। इससे यारपुर और गर्दनीबाग के 2 किलोमीटर की परिधि में बसे लोग इसकी दुर्गंध से परेशान होंगे। हालांकि पटना नगर निगम और बिहार सरकार का दावा है कि यहाँ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा और दुर्गंध नहीं आएगी।
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सरकारी दावों की जमीनी हकीकत
भले ही सरकार और नगर निगम इसे 'गंधहीन' बनाने का दावा कर रहे हों, लेकिन स्थानीय स्थिति कुछ और ही बयां करती है। पटना के बीचों-बीच स्थित इस कचरा निस्तारण केंद्र को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में चल रहे अन्य कचरा केंद्रों की हालत यह है कि वहां से उठने वाली सड़न ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। वहीं बजट सत्र के दौरान जब राज्य के नीति-निर्धारक सदन में बैठेंगे, तब कचरे की यह सड़न उनके स्वागत में तैयार खड़ी होगी। 318 विधायकों और विधानमंडल के 3000 से ज्यादा कर्मचारियों के लिए यह केवल सत्र भर की बात नहीं है, बल्कि उन्हें साल भर हर कार्यदिवस पर इसी माहौल में काम करना होगा।
विपक्ष बना सकता है मुद्दा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बजट सत्र में जहां विकास और रोजगार पर बहस होगी, वहीं विधानमंडल के इतने करीब कचरा केंद्र का निर्माण स्वास्थ्य और स्वच्छता के मोर्चे पर सरकार की घेराबंदी का कारण बन सकता है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस 'गंध' से बचने का कोई ठोस समाधान निकाल पाती है या विधायकों को नाक पर रुमाल रखकर लोकतंत्र के इस मंदिर में प्रवेश करना होगा।