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विश्व साहित्य का आकाश: मिसेज डालोवे- पात्रों के मन-मस्तिष्क का चित्रण

Tue, 30 Jun 2026 04:09 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Tue, 30 Jun 2026 04:09 PM IST
सार

वर्जीनिया वुल्फ का लिखा उपन्यास ‘मिसेज डालोवे’ एक सरल-जटिल उपन्यास है। यह अपने प्रमुख पात्रों की चेतना में पैठ कर उनके मन-मस्तिष्क का चित्रण करता है। वुल्फ के लेखन की विशेषता है, वे अतीत और वर्तमान में एक संबंध कायम करती हैं।

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history of world literature Mrs Dalloway Novel by Virginia Woolf
मिसेज डालोवे की रचना (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

‘द बूल्म्सबरी ग्रुप’ (Bloomsbury) की सदस्य, लेखन को सबसे अधिक महत्वपूर्ण काम मानने वाली वर्जीनिया वुल्फ (Virginia Woolf) का जन्म इंग्लैंड के एक अपर-मिडिल क्लास परिवार में 1888 को हुआ था। उनका जन्म का नाम वर्जीनिया स्टीफन था। पिता लेस्ली स्टेफन के मरने के बाद उन्होंने अपने इसी ग्रुप के एक बहुत बुद्धिमान सदस्य लियोनार्ड वुल्फ से विवाह किया।

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लियोनार्ड वुल्फ यहूदी थे। इस समय विक्टोरियन युग का अवसान और एडवर्डियन युग का उत्थान हो रहा था। इस ग्रुप में बौद्धिक लोगों का जुटान था। उनका अपना घर साहित्यकारों, कलाकारों का अड्डा था। वर्जीनिया वुल्फ ने अन्य बहुत सारा लेखन करने के साथ-साथ  ‘टू द लाइटहाउस’, ‘द वेव्स’, ‘ओरलैंडो’ तथा ‘मिसेज डालोवे’ जैसे उपन्यास लिखे।
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‘मिसेज डालोवे’को ‘टाइम’ पत्रिका ने अपनी सूची में शामिल किया था। 1925 में प्रकाशित इस उपन्यास को सौ वर्ष हो चुके हैं। 2005 में जब ‘टाइम’ पत्रिका ने 100 किताबों की सूची बनाई, तो उसमें उसकी इस किताब का नंबर 50वां था।
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वर्जीनिया वुल्फ का लिखा उपन्यास ‘मिसेज डालोवे’ एक सरल-जटिल उपन्यास है। यह अपने प्रमुख पात्रों की चेतना में पैठ कर उनके मन-मस्तिष्क का चित्रण करता है। वुल्फ के लेखन की विशेषता है, वे अतीत और वर्तमान में एक संबंध कायम करती हैं। गहराई में कहीं यह उनके जीवन का ही प्रतिबिंब है।

एक वाक्य में उपन्यास का सार है, क्लैरिसा डालोवे के जीवन के एक दिन का ब्योरा। लेकिन कहानी इतनी सरल नहीं है। क्लैरिसा प्रथम विश्वयुद्ध के बाद के इंग्लैंड, लंदन के उच्च समाज की महिला है। उसे पार्टी आयोजित करने का शौक है। प्रतम विश्वयुद्ध समाप्त हो चुका है। 1923 के जून के एक दिन क्लैरिसा इसी तरह की एक पार्टी की तैयारी में है।

इंग्लिश समाज के सारे तत्वों को समेटे हुए पार्टी चल रही है, एक-से-एक उच्च पदाधिकारी यहां तककि खुद प्रधान मंत्री भी पहुंचे हुए हैं। कुछ लोग मात्र मंत्री को खुश करने आए हैं, कुछ क्लैरिसा से मिलने  कुछ अपना हित साधने पार्टी में पहुंचे हैं।

उपन्यास में ऊपर से देखने पर सब कुछ सामान्य लगता है, मगर हर प्रमुख पात्र के भीतर काफी कुछ चलता रहता है। क्लैरिसा दिन भर सारे सामान्य काम करती है। सुबह उठ कर पार्क में टहलते हुए फूल खरीदती है, पार्टी के लिए ड्रेस चुनती है, नौकरों को आदेश देती है, बेटी से बात करती है। राजनेता पति डालोवे से बात करती है। इसी दिन अपने एक पुराने प्रेमी-दोस्त से मिलती है। ऊपर से कहीं कुछ असामान्य नहीं दीखता-लगता है। लेकिन उसके भीतर तमाम प्रश्न चल रहे होते हैं।

वह अपने जीवन के उद्देश्य, अब तक के जीए हुए अपने समय, जीवन और यदि उसने कोई दूसरा विकल्प चुना होता तो क्या होता, जैसी तमाम बातें सोचती रहती है। अतीत-वर्तमान में आवाजाही करती है।

युद्ध नहीं देता सकारात्मक परिणाम

वर्जीनिया वुल्फ दिखाती हैं, युद्ध कभी कोई सकारात्मक परिणाम नहीं देता है, इससे प्रभावित व्यक्ति कभी सामान्य नहीं रह सकता है। यह बात आज के युद्धरत समय और विचारणीय हो उठती है। एक और प्रमुख पात्र स्पेटिमस स्मिथ प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल था। वहां उसकी एवान्स नाम के व्यक्ति से दोस्ती थी। सैनिक इवान्स एक बम का शिकार होता है, उसके चिथड़े उड़ जाते हैं। स्मिथ को इवान्स का भूत (उसे वह प्रत्यक्ष दीखता है) दीखता है, उससे बातें करता है। उसे तरह-तरह की आवाजें सुनाई देती हैं।

स्मिथ का मस्तिष्क अस्थिर रहता है। स्मिथ की चिंतित पत्नी रेजिआ पति की हालत से बहुत परेशान है। डॉक्टर से बार-बार कहती है, मेरे पति ने कोई अपराध नहीं किया है। वह सामान्य है। केवल थोड़ा परेशान है। दोनों पति-पत्नी में प्रेम है, पर वह पति के दिमाग में चल रही बातों से पूरी तरह वाकिफ नहीं है। युद्ध क्षेत्र में क्या-क्या हुआ वह यह सब कैसे जान सकती है। पति के वहां के संबंध के विषय में कुछ नहीं जानती है।

डॉक्टर स्मिथ को पागल घोषित कर देते हैं, वह डॉक्टर से बचने के लिए खिड़की से कूद कर आत्महत्या कर लेता है। नीचे लोहे की नुकीली फेंस पर जा गिरता है। स्मिथ के मन में युद्ध का भय था, अपने असामाजिक, समलैंगिक प्रेम से वह चिंतित था। मिसेज डालोवे पार्टी के दौरान इस आत्महत्या की बात सुनती है, वह सोचती है, वह क्यों जीवित है, यह आदमी क्यों मर गया? वह भी वह भी कूद कर जान दे देना चाहती है, मगर ऐसा करती नहीं है। जीवन चलता रहता है। मनुष्य की जिजीविषा बहुत विकट है।

मिसेज डालोवे एवं लेडी रोसेटर समलैंगिक रही हैं। स्मिथ भी अपने समलैंगिक प्रेम को छिपाना चाहता है। दोनों भिन्न मार्ग चुनते हैं। स्मिथ आत्महत्या करता है और मिसेज डालोवे अपनी पार्टी में वापस लौट जाती है। एक जिंदगी चुनती है, दूसरा मौत को गले लगाता है। दोनों ही अपने प्रेम को सीने में छुपाए हुए हैं, इसे समाज के समक्ष व्यक्त नहीं कर सकते हैं।

अभिनेत्री वैनेसा रेडग्रैव को वर्जीनिया वुल्फ का ‘मिसेज डालोवे’ पसंद आया, उसने वुल्फ के मंचीय प्रदर्शन से जुड़ी एक अभिनेत्री एयलीन एटकीन्स को इस उपन्यास का स्क्रीनप्ले लिखने के लिए आमंत्रित किया नतीजा हुआ एक घंटे सैंतीस मिनट की फिल्म ‘मिसेज डालोवे’ का स्क्रीनप्ले। जिस पर मार्लीन गोरिस ने 1997 में इसी नाम से फिल्म बनाई। इस फिल्म ‘मिसेज डालोवे’ के खूबसूरत फिल्मांकन का श्रेय जाता है, सिनेमाटोग्राफर सु गिब्सन को। संगीत दिया है लोना स्काज ने। है।

एमिलिया बुलमोर ने रेजिया की भूमिका की है। लेडी रोसेटर सराह बाडेल बनी हैं। क्लैरिसा वैनेसा रेडग्रेव हैं, युवा क्लैरिसा नताशा बनी है। थोड़ी-सी तोंद वाले सफल राजनेता, क्लैरिसा के पति रिचर्ड डालोवे का अभिनय जॉन स्टैंडिंग मे किया है। रुपर्ट ग्रेव्स ने स्पेटिमस स्मिथ की शानदार भूमिका की है।

स्त्री-पुरुष का जीवन कितना कठिन हो सकता है, यह उपन्यास बखूबी चित्रित करता है। दिमाग दिन-रात भटकता रहता है, यहां-से-वहां तक भागता रहता है। वह शांत होना नहीं जानता है। हालांकि इसे शांत करने के उपाय हैं। मन-मस्तिष्क की इस बहती धारा को इतनी कुशलता से शब्दों में पिरोना हंसी-खेल नहीं है। यही कठिन-जटिल काम वुल्फ ने पूरी सक्षमता के साथ किया है। बहुत झीने प्लॉट को ले कर बुना गया यह उपन्यास एक समय सर्वथा नई शैली का था। यह आज भी क्लासिकल की संज्ञा से विभूषित होने योग्य उपन्यास है।



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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