{"_id":"6a448535c55082f598025954","slug":"other-side-the-strategy-of-the-king-of-orchha-became-baahubali-s-war-tactic-2026-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूसरा पहलू: ओरछा के राजा की युक्ति बनी बाहुबली की युद्ध नीति","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
दूसरा पहलू: ओरछा के राजा की युक्ति बनी बाहुबली की युद्ध नीति
Wed, 01 Jul 2026 08:41 AM IST
Pavan
अमित मुद्गल
अमित मुद्गल
Published by: Pavan
Updated Wed, 01 Jul 2026 08:41 AM IST
सार
फिल्म बाहुबली-2 में मवेशियों के सींगों पर मशालें और हथियार बांधकर आक्रमणकारियों के खिलाफ प्रयोग किया गया था। फिल्म बाहुबली-2 में मवेशियों के सींगों पर मशालें और हथियार बांधकर आक्रमणकारियों के खिलाफ किया गया था प्रयोग। इसी घटना के बाद ओरछा के राजा मधुकर बुंदेला के पुत्र वीर सिंह बुंदेला ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनवाने का मार्ग तैयार किया और बाद में यहां शानदार मंदिर बना।
विज्ञापन
ओरछा के राजा की युक्ति बनी बाहुबली की युद्ध नीति
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फिल्म निर्देशक एसएस राजामौली ने बाहुबली: द इटरनल वॉर नाम से एक 3डी एनिमेटेड फीचर फिल्म तैयार की है। जून माह में दिल्ली में आयोजित ‘दिल्ली एनिमे इंडिया 2026’ में इस फिल्म की कुछ झलकियां और विजुअल्स पेश किए गए थे, जिससे भारतीय फैंस के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई।
दरअसल, इस फिल्म के कई दृश्य ऐसे हैं, जिन्हें भुलाना कठिन है। ऐसे ही एक दृश्य का नाता भारतीय युद्ध नीति से बताया जाता है। दृश्य है-जब पिंडारियों के हमले से कुंतला राज्य को बचाने के लिए बाहुबली बैलों के सींगों पर जलती मशालें बांध देते हैं और उन्हें दाैड़ाकर हमलावरों से राज्य की रक्षा करते हैं। फिल्म समीक्षकों ने माना कि इस युद्ध नीति को हाॅलीवुड की फिल्मों से नहीं, बल्कि प्राचीन चीनी सैन्य इतिहास से लिया गया। इसे ‘फायर कैटल कैवेलरी’ कहा जाता है।
नेटफ्लिक्स की सीरीज मार्को पोलो (2014) में भी इसी तरह का दृश्य है। भारतीय युद्ध नीतियों में भी इस सीन का हूबहू जिक्र है। सन 1573 में अकबर की सेना सलीम को पकड़ने के उद्देश्य से ओरछा रियासत पर चढ़ाई करने पहुंची। बुंदेला के दरबारी वीर मैत्रैय इस पूरे वाकये का जिक्र अपनी पुस्तक प्रतिष्ठा प्रकाश में करते हैं। हमले की भनक लगने पर ओरछा राजा मधुकर बुंदेला ने रात को इस अनोखी युक्ति से काम किया। रात के समय जब अकबर की सेना विश्राम कर रही थी, तभी ओरछा के राजा ने बड़ी संख्या में मवेशियों के सींगों पर जलती मशालें बंधवाकर उन्हें मुगल सैनिकों के पड़ाव की ओर दौड़ा दिया। निशाना सैनिकों का शस्त्र भंडार था। अकबर की सेना अचानक इस तरह से हुए हमले को समझ ही नहीं पाई। काफी सैनिक एक-दूसरे पर ही तलवारें लेकर टूट पड़े और कुछ मवेशियों से हताहत हो गए। जलती मशालों के साथ मवेशी शस्त्रागार में जा घुसे, जिससे वहां भीषण आग लग गई। सारा गोला बारूद जल गया और उसके विस्फोट की चपेट में आकर अकबर की सेना पूरी तरह से पस्त हो गई।
विज्ञापन
ओरछा राजा की इस युक्ति का लोहा अकबर भी मान गया। बाद में उसने ओरछा राजा से समझाैता किया और सलीम की जान बख्शने की शर्त के साथ ही सलीम को लौटाया गया। इसी घटना के बाद ओरछा राजा मधुकर बुंदेला के पुत्र वीर सिंह बुंदेला ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनवाने का मार्ग तैयार किया और बाद में यहां शानदार मंदिर बना।
विज्ञापन
दरअसल, इस फिल्म के कई दृश्य ऐसे हैं, जिन्हें भुलाना कठिन है। ऐसे ही एक दृश्य का नाता भारतीय युद्ध नीति से बताया जाता है। दृश्य है-जब पिंडारियों के हमले से कुंतला राज्य को बचाने के लिए बाहुबली बैलों के सींगों पर जलती मशालें बांध देते हैं और उन्हें दाैड़ाकर हमलावरों से राज्य की रक्षा करते हैं। फिल्म समीक्षकों ने माना कि इस युद्ध नीति को हाॅलीवुड की फिल्मों से नहीं, बल्कि प्राचीन चीनी सैन्य इतिहास से लिया गया। इसे ‘फायर कैटल कैवेलरी’ कहा जाता है।
विज्ञापन
नेटफ्लिक्स की सीरीज मार्को पोलो (2014) में भी इसी तरह का दृश्य है। भारतीय युद्ध नीतियों में भी इस सीन का हूबहू जिक्र है। सन 1573 में अकबर की सेना सलीम को पकड़ने के उद्देश्य से ओरछा रियासत पर चढ़ाई करने पहुंची। बुंदेला के दरबारी वीर मैत्रैय इस पूरे वाकये का जिक्र अपनी पुस्तक प्रतिष्ठा प्रकाश में करते हैं। हमले की भनक लगने पर ओरछा राजा मधुकर बुंदेला ने रात को इस अनोखी युक्ति से काम किया। रात के समय जब अकबर की सेना विश्राम कर रही थी, तभी ओरछा के राजा ने बड़ी संख्या में मवेशियों के सींगों पर जलती मशालें बंधवाकर उन्हें मुगल सैनिकों के पड़ाव की ओर दौड़ा दिया। निशाना सैनिकों का शस्त्र भंडार था। अकबर की सेना अचानक इस तरह से हुए हमले को समझ ही नहीं पाई। काफी सैनिक एक-दूसरे पर ही तलवारें लेकर टूट पड़े और कुछ मवेशियों से हताहत हो गए। जलती मशालों के साथ मवेशी शस्त्रागार में जा घुसे, जिससे वहां भीषण आग लग गई। सारा गोला बारूद जल गया और उसके विस्फोट की चपेट में आकर अकबर की सेना पूरी तरह से पस्त हो गई।
विज्ञापन
ओरछा राजा की इस युक्ति का लोहा अकबर भी मान गया। बाद में उसने ओरछा राजा से समझाैता किया और सलीम की जान बख्शने की शर्त के साथ ही सलीम को लौटाया गया। इसी घटना के बाद ओरछा राजा मधुकर बुंदेला के पुत्र वीर सिंह बुंदेला ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनवाने का मार्ग तैयार किया और बाद में यहां शानदार मंदिर बना।