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डिजिटल अरेस्ट: ठग बने NIA-ED अधिकारी, 1.58 करोड़ की ठगी- सेवानिवृत्त आयुर्वेदिक अधिकारी बनीं शिकार
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Thu, 26 Feb 2026 01:09 PM IST
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साइबर क्राइम
- फोटो : X @DGPPunjabPolice
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डिजिटल अरेस्ट और मनी लॉन्ड्रिंग के झांसे में फंसाकर साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी से करीब 1 करोड़ 58 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़िता की तहरीर पर साइबर थाना गोरखपुर में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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पीड़िता डॉ. मंजुला श्रीवास्तव, पत्नी स्व. शैलेष कुमार श्रीवास्तव, निवासी सी-178/78, 5 कैनाल रोड, थाना कैंट, गोरखपुर ने बताया कि 13 फरवरी 2026 को एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल कर खुद को एटीएस/एनआईए/ईडी का अधिकारी बताया। कॉलर ने कथित तौर पर केनरा बैंक में 50 लाख रुपये के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी दी।
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‘निगरानी’ का डर, परिवार से बात तक पर रोक
ठगों ने पीड़िता को लगातार निगरानी में रखने, किसी से बात न करने और घर से बाहर न निकलने का दबाव बनाया। बताया गया कि सारा पैसा “लीगलाइजेशन” के लिए जा रहा है और जांच पूरी होने पर वापस आ जाएगा। पीड़िता ने बताया कि वे तकनीकी रूप से दक्ष नहीं हैं, इसी कमजोरी का फायदा उठाया गया।
एफडी तुड़वाकर करोड़ों की RTGS ट्रांसफर
13 से 21 फरवरी 2026 के बीच ठगों ने पीड़िता से सारी एफडी तुड़वाकर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करा ली। 18 फरवरी 26 को यूनियन बैंक खाते से 30 लाख रुपये ICICI बैंक खाते में RTGS की। 20 फरवरी 26 को 80 लाख रुपये ICICI बैंक खाते में RTGS की। 21 फरवरी 26 को SBI खाते से 47,99,952.80 रुपये ICICI बैंक खाते में RTGS किया की। ऐसे ही मिलाकर कुल मिलाकर 1,57,99,952.80 रुपये की ठगी की गई।
फर्जी रसीदें, एक-सा नंबर और ‘पुणे से कॉल’ का दावा
ठगों ने ईडी की फर्जी रसीदें भेजीं, जिन पर एक-सा नंबर था। कॉलर खुद को पुणे से बात करने वाला बताता रहा और “24 फरवरी तक पैसा लौटने” का भरोसा देता रहा। बाद में संपर्क टूट गया।
कई मोबाइल नंबरों से कॉल, बैंक कर्मी की मिलीभगत का शक
पीड़िता ने कई मोबाइल नंबरों से कॉल आने की जानकारी दी है और आशंका जताई है कि इस पूरे खेल में किसी बैंक कर्मी की मिलीभगत भी हो सकती है।
मुकदमा दर्ज, जांच शुरू
साइबर थाना गोरखपुर में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच निरीक्षक कपिल देव चौधरी को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि ट्रांजेक्शन ट्रेल, कॉल डिटेल्स और खातों की जांच कर रकम रिकवर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
