{"_id":"6a2dba72acf8fda2ab060fc6","slug":"admission-culture-changes-at-ddu-4762-calls-and-emails-received-so-far-regarding-admission-related-information-gorakhpur-news-c-7-gkp1006-1352908-2026-06-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"कतारों से क्लिक तक : सूचनाओं के लिए ऑनलाइन माध्यम युवाओं की पसंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कतारों से क्लिक तक : सूचनाओं के लिए ऑनलाइन माध्यम युवाओं की पसंद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर। छोटी से छोटी सूचनाओं के लिए भागदौड़ और कतारों में खड़े रहने का दौर अब खत्म हो रहा है। युवा अब सटीक सूचनाओं के लिए अधिकृत ऑनलाइन माध्यमों पर पूरा भरोसा जता रहे हैं। इस ट्रेंड के कारण समय के साथ पैसे की भी बचत हो रही है। यह ट्रेंड दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में चल रही प्रवेश प्रक्रिया पर स्पष्ट दिख रहा है।
डीडीयू में सत्र 2026-27 में प्रवेश के लिए प्रक्रिया चल रही है। इस सत्र में छात्रों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन के रूप में ई-मेल और फोन नंबर जारी किए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 11 जून तक कुल 4762 फोन कॉल या ई-मेल से अभ्यर्थियों ने प्रवेश संबंधी जानकारी ली। इनमें 3812 फोन कॉल्स और 950 ई-मेल शामिल थे। अभ्यर्थियों ने प्रवेश प्रक्रिया, आवेदन की तिथि, विभिन्न विषयों में प्रवेश की अर्हता, शुल्क आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की।
प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा बताते हैं, हेल्पलाइन नंबर जारी होने की वजह से पिछले वर्षों की तुलना में विश्वविद्यालय में आकर पूछताछ करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या आधी रह गई है। पहले इसके लिए ऑफिस के बाहर कई बार कतारें लग जाती थीं। दिनभर अभ्यर्थी या उनके अभिभावकों का आना-जाना लगा रहता था। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होता था। हेल्पलाइन नंबर जारी होने के बाद अभ्यर्थी इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं। कम समय में उन्हें सटीक सूचनाएं मिल जा रही हैं।
विज्ञापन
युवा समझ रहे समय की कीमत
इस ट्रेंड से यह भी पता चलता है कि युवा अब ऑनलाइन माध्यमों को सर्च कर रहे हैं। अधिकृत वेबसाइट से संबंधित हेल्पलाइन नंबर लेकर उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र या दूसरे जनपदों के युवाओं को इससे ज्यादा लाभ मिल रहा है।
बोलीं कुलपतिछात्रहित में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए थे। यह सुखद है कि अभ्यर्थी इसका पूरा लाभ उठा रहे हैं। इससे समाज में ऑनलाइन जागरूकता को लेकर हुए बदलाव का ट्रेंड भी पता चलता है।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
डीडीयू में सत्र 2026-27 में प्रवेश के लिए प्रक्रिया चल रही है। इस सत्र में छात्रों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन के रूप में ई-मेल और फोन नंबर जारी किए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 11 जून तक कुल 4762 फोन कॉल या ई-मेल से अभ्यर्थियों ने प्रवेश संबंधी जानकारी ली। इनमें 3812 फोन कॉल्स और 950 ई-मेल शामिल थे। अभ्यर्थियों ने प्रवेश प्रक्रिया, आवेदन की तिथि, विभिन्न विषयों में प्रवेश की अर्हता, शुल्क आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा बताते हैं, हेल्पलाइन नंबर जारी होने की वजह से पिछले वर्षों की तुलना में विश्वविद्यालय में आकर पूछताछ करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या आधी रह गई है। पहले इसके लिए ऑफिस के बाहर कई बार कतारें लग जाती थीं। दिनभर अभ्यर्थी या उनके अभिभावकों का आना-जाना लगा रहता था। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होता था। हेल्पलाइन नंबर जारी होने के बाद अभ्यर्थी इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं। कम समय में उन्हें सटीक सूचनाएं मिल जा रही हैं।
युवा समझ रहे समय की कीमत
इस ट्रेंड से यह भी पता चलता है कि युवा अब ऑनलाइन माध्यमों को सर्च कर रहे हैं। अधिकृत वेबसाइट से संबंधित हेल्पलाइन नंबर लेकर उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र या दूसरे जनपदों के युवाओं को इससे ज्यादा लाभ मिल रहा है।
बोलीं कुलपतिछात्रहित में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए थे। यह सुखद है कि अभ्यर्थी इसका पूरा लाभ उठा रहे हैं। इससे समाज में ऑनलाइन जागरूकता को लेकर हुए बदलाव का ट्रेंड भी पता चलता है।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति