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Gorakhpur News: नेटवर्क मार्केटिंग में काम कर चुके युवा ठगी के लिए खुलवाते थे म्यूल खाते
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साइबर ठगी : दो गिरोह के गुर्गों को पकड़ चुकी है एम्स और खोराबार पुलिस
इन युवाओं को म्यूल खाते खुलवाने के लिए दिया जाता था टास्क
गोरखपुर। शहर में साइबर ठगी का एक संगठित नेटवर्क सामने आया है, जिसमें नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़े रहे युवाओं का इस्तेमाल म्यूल खाते खुलवाने के लिए किया जा रहा था। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि इन युवाओं को अलग-अलग ''टास्क'' देकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे, जिनका उपयोग ठगी की रकम ट्रांसफर करने में किया जाता था।
हाल ही में एम्स और खोराबार थाना की टीम ने ऐसे दो गिरोहों से जुड़े गुर्गों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी लोगों को छोटे-छोटे काम के बहाने अपने जाल में फंसाते थे और उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाते थे। पुलिस के अनुसार, ये म्यूल खाते साइबर अपराधियों के लिए सुरक्षित माध्यम बन जाते थे, जिससे असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना कठिन हो जाता था। दोनों ही गिरोह में ऐसे युवाओं को शामिल किया जाता था जो लोगों को आसानी से अपने झांसे में लेते थे। ज्यादातर आरोपी पहले नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में काम कर चुके थे। वहां उन्हें लोगों को मोटिवेट करना सिखाया जाता था।
खोराबार थाना पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े एक गिरोह के चार गुर्गों को पकड़ा था। यह ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर खाते खुलवाते थे। बाद में उसका इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाते थे। इसे यह यूसडीटी और बाद में क्रिप्टो करेंसी में बदल देते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गीडा थाना क्षेत्र के नौसड़ निवासी वंश निषाद, रामगढ़ताल इलाके के तारामंडल निवासी शोभित गौड़, एम्स थाना क्षेत्र के महादेव झारखंडी निवासी शक्ति जायसवाल और एम्स इलाके के आवास विकास कॉलोनी निवासी शिवम पटवा के रूप में हुई थी।
ये ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर उनके दस्तावेज लेते थे और बैंक खाता खुलवाकर साइबर ठगी की रकम उसके माध्यम से ठिकाने लगाते थे। वहीं, एम्स थाने की टीम ने लोन दिलाने के नाम पर लोगों के बैंक खाते खुलवाने और उसमें साइबर ठगी की रकम ठिकाने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया था। आरोपी लोगों को रुपये का लालच भी देते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कैंट इलाके के सिंघड़िया निवासी ध्रुव साहनी, एम्स थान क्षेत्र के रजही जगदीशपुर निवासी सूरज सिंह, पिपराइच के पिपरा बसंत निवासी अजय उपाध्याय, देवरिया जिले के गौरी बाजार थाना क्षेत्र के असनहर निवासी अखंड प्रताप सिंह, मऊ जिले के गोपालपुर निवासी बृजेंद्र कुमार सिंह, बलिया जिले के हल्दी थाना क्षेत्र के बहादुरपुर निवासी अभिषेक कुमार यादव और एम्स इलाके के नीना थापा झरनाटोला निवासी अमर कुमार निषाद के रूप में हुई थी। इसके लिए वह फर्जी स्टांप और दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे, जिसके जरिये प्राइवेट और सरकारी बैंकों से आसानी से लोन अप्रूव करवा देते थे।
सात से आठ हजार रुपये कमीशन
पुलिस की जांच में सामने आया है कि सभी आरोपियों का काम बंटा हुआ था। कोई लोगों से दस्तावेज लेकर सिम निकालते और बाद में खाते खुलवाते थे। खाता खुलवाने के बाद उसका पासबुक, एटीएम कार्ड अपने पास ही रखते थे। इसके बाद दूसरा आरोपी उसमें ठगी की रकम ट्रांसफर करता था। तीसरे का काम होता, उस रकम को निकालकर बाहर भेजना। इसके लिए सभी का कमीशन तय था। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी को काम के हिसाब से सात से आठ हजार रुपये तक कमीशन मिलते थे। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि साइबर ठगी से जुड़े गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। जल्द ही अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की जाएगी।
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इन युवाओं को म्यूल खाते खुलवाने के लिए दिया जाता था टास्क
गोरखपुर। शहर में साइबर ठगी का एक संगठित नेटवर्क सामने आया है, जिसमें नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़े रहे युवाओं का इस्तेमाल म्यूल खाते खुलवाने के लिए किया जा रहा था। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि इन युवाओं को अलग-अलग ''टास्क'' देकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे, जिनका उपयोग ठगी की रकम ट्रांसफर करने में किया जाता था।
हाल ही में एम्स और खोराबार थाना की टीम ने ऐसे दो गिरोहों से जुड़े गुर्गों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी लोगों को छोटे-छोटे काम के बहाने अपने जाल में फंसाते थे और उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाते थे। पुलिस के अनुसार, ये म्यूल खाते साइबर अपराधियों के लिए सुरक्षित माध्यम बन जाते थे, जिससे असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना कठिन हो जाता था। दोनों ही गिरोह में ऐसे युवाओं को शामिल किया जाता था जो लोगों को आसानी से अपने झांसे में लेते थे। ज्यादातर आरोपी पहले नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में काम कर चुके थे। वहां उन्हें लोगों को मोटिवेट करना सिखाया जाता था।
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खोराबार थाना पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े एक गिरोह के चार गुर्गों को पकड़ा था। यह ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर खाते खुलवाते थे। बाद में उसका इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाते थे। इसे यह यूसडीटी और बाद में क्रिप्टो करेंसी में बदल देते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गीडा थाना क्षेत्र के नौसड़ निवासी वंश निषाद, रामगढ़ताल इलाके के तारामंडल निवासी शोभित गौड़, एम्स थाना क्षेत्र के महादेव झारखंडी निवासी शक्ति जायसवाल और एम्स इलाके के आवास विकास कॉलोनी निवासी शिवम पटवा के रूप में हुई थी।
ये ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर उनके दस्तावेज लेते थे और बैंक खाता खुलवाकर साइबर ठगी की रकम उसके माध्यम से ठिकाने लगाते थे। वहीं, एम्स थाने की टीम ने लोन दिलाने के नाम पर लोगों के बैंक खाते खुलवाने और उसमें साइबर ठगी की रकम ठिकाने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया था। आरोपी लोगों को रुपये का लालच भी देते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कैंट इलाके के सिंघड़िया निवासी ध्रुव साहनी, एम्स थान क्षेत्र के रजही जगदीशपुर निवासी सूरज सिंह, पिपराइच के पिपरा बसंत निवासी अजय उपाध्याय, देवरिया जिले के गौरी बाजार थाना क्षेत्र के असनहर निवासी अखंड प्रताप सिंह, मऊ जिले के गोपालपुर निवासी बृजेंद्र कुमार सिंह, बलिया जिले के हल्दी थाना क्षेत्र के बहादुरपुर निवासी अभिषेक कुमार यादव और एम्स इलाके के नीना थापा झरनाटोला निवासी अमर कुमार निषाद के रूप में हुई थी। इसके लिए वह फर्जी स्टांप और दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे, जिसके जरिये प्राइवेट और सरकारी बैंकों से आसानी से लोन अप्रूव करवा देते थे।
सात से आठ हजार रुपये कमीशन
पुलिस की जांच में सामने आया है कि सभी आरोपियों का काम बंटा हुआ था। कोई लोगों से दस्तावेज लेकर सिम निकालते और बाद में खाते खुलवाते थे। खाता खुलवाने के बाद उसका पासबुक, एटीएम कार्ड अपने पास ही रखते थे। इसके बाद दूसरा आरोपी उसमें ठगी की रकम ट्रांसफर करता था। तीसरे का काम होता, उस रकम को निकालकर बाहर भेजना। इसके लिए सभी का कमीशन तय था। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी को काम के हिसाब से सात से आठ हजार रुपये तक कमीशन मिलते थे। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि साइबर ठगी से जुड़े गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। जल्द ही अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की जाएगी।