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Gorakhpur News: सर्दी-जुकाम में खाए ज्यादा एंटीबायोटिक तो बेअसर हो जाएगी दवा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 09 Apr 2026 02:41 AM IST
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गोरखपुर। सामान्य सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों में एंटीबायोटिक का अधिक और अनियंत्रित इस्तेमाल मरीजों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। एम्स गोरखपुर के कम्युनिटी मेडिसिन और माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से किए गए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि अत्यधिक एंटीबायोटिक के सेवन से मरीजों का शरीर ‘सुपर-बग’ विकसित कर रहा है। इससे दवाएं बेअसर होती जा रही हैं।
एम्स की तरफ से गोरखपुर, कुशीनगर और आसपास के जिलों के 4400 मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि 27 से 28 फीसदी मरीजों पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं हो रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि गर्भवती महिलाओं समेत कई मरीजों में शक्तिशाली एंटीबायोटिक इंजेक्शन देने के बावजूद बैक्टीरिया पर अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ा।
एम्स के डॉक्टरों बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि बीते वर्षों में कोई नई प्रभावी एंटीबायोटिक विकसित नहीं हुई है। ऐसे में पुरानी दवाओं का अत्यधिक उपयोग बैक्टीरिया को और अधिक प्रतिरोधी बना रहा है।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. अरुप मोहंती के अनुसार, एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया को खत्म करती हैं लेकिन इससे शरीर के लाभकारी बैक्टीरिया जैसे लैक्टोबैसिलस और बिफिडोबैक्टीरियम को भी नुकसान पहुंचता है। इसके विपरीत हानिकारक बैक्टीरिया जैसे स्यूडोमोनास तेजी से बढ़ने लगते हैं। इस असंतुलन के कारण मोटापा, तनाव, सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। कई मरीजों में ऑटिज्म और आर्थराइटिस के लक्षण भी देखने को मिले हैं। छोटी बीमारियों में स्वयं एंटीबायोटिक लेने से बचें और केवल चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही इनका उपयोग करें, ताकि भविष्य में दवाओं की प्रभावशीलता बनी रह सके।
क्या है सुपर-बग
सुपर-बग एक ऐसे बैक्टीरिया, वायरस या फंगस होते हैं जो उन एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, जो आमतौर पर उनके संक्रमण के इलाज के लिए उपयोग की जाती हैं। ये सूक्ष्मजीव दवाओं से बच जाते हैं और लगातार विकसित होकर अधिक खतरनाक बन जाते हैं, जिससे मामूली संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है।
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एम्स की तरफ से गोरखपुर, कुशीनगर और आसपास के जिलों के 4400 मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि 27 से 28 फीसदी मरीजों पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं हो रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि गर्भवती महिलाओं समेत कई मरीजों में शक्तिशाली एंटीबायोटिक इंजेक्शन देने के बावजूद बैक्टीरिया पर अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ा।
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एम्स के डॉक्टरों बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि बीते वर्षों में कोई नई प्रभावी एंटीबायोटिक विकसित नहीं हुई है। ऐसे में पुरानी दवाओं का अत्यधिक उपयोग बैक्टीरिया को और अधिक प्रतिरोधी बना रहा है।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. अरुप मोहंती के अनुसार, एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया को खत्म करती हैं लेकिन इससे शरीर के लाभकारी बैक्टीरिया जैसे लैक्टोबैसिलस और बिफिडोबैक्टीरियम को भी नुकसान पहुंचता है। इसके विपरीत हानिकारक बैक्टीरिया जैसे स्यूडोमोनास तेजी से बढ़ने लगते हैं। इस असंतुलन के कारण मोटापा, तनाव, सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। कई मरीजों में ऑटिज्म और आर्थराइटिस के लक्षण भी देखने को मिले हैं। छोटी बीमारियों में स्वयं एंटीबायोटिक लेने से बचें और केवल चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही इनका उपयोग करें, ताकि भविष्य में दवाओं की प्रभावशीलता बनी रह सके।
क्या है सुपर-बग
सुपर-बग एक ऐसे बैक्टीरिया, वायरस या फंगस होते हैं जो उन एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, जो आमतौर पर उनके संक्रमण के इलाज के लिए उपयोग की जाती हैं। ये सूक्ष्मजीव दवाओं से बच जाते हैं और लगातार विकसित होकर अधिक खतरनाक बन जाते हैं, जिससे मामूली संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है।