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UP: नदी किनारे रातभर जिंदा रहीं उम्मीदें, सुबह हमेशा के लिए बुझ गईं; राप्ती नदी में डूबे तीन युवकों के मिले शव
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 19 Apr 2026 01:23 PM IST
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सार
गोरखपुर में राप्ती नदी में डूबे तीन युवकों के शव मिल गए हैं। शुक्रवार को डूबे तीनों युवकों के परिजन रातभर मौके पर डटे रहे, लेकिन सुबह उनकी उम्मीदें टूट गईं। एसडीआरएफ की टीम ने एक-एक कर तीनों के शव नदी से बाहर निकाले तो घाट पर चीख-पुकार मच गई। तीनों के गांव में मातम पसर गया।
मृतक तीनों छात्रों की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र के बंजरहा गांव के पास राप्ती नदी में डूबे तीन युवकों के शव शनिवार सुबह एसडीआरएफ की गोताखोर टीम ने खोज लिया। पुलिस ने तीनों के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। दोपहर बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
चिलुआताल इलाके के बरियारपुर निवासी शुभम यादव (19), काजीपुर निवासी अभय उर्फ बंटी (18), शिव साहनी (20) और बुढि़याबारी निवासी एक अन्य शुभम यादव शुक्रवार दोपहर करीब 2:30 बजे राप्ती नदी में नहाने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि नहाते समय चारों अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे।
इसी दौरान बरियारपुर निवासी शुभम यादव किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया और उसने शोर मचाकर लोगों को घटना की जानकारी दी। इस पर स्थानीय गोताखोरों और एसडीआरएफ टीम ने देर शाम तक तलाश अभियान चलाया लेकिन अंधेरा होने के कारण अभियान रोकना पड़ा।
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चिलुआताल इलाके के बरियारपुर निवासी शुभम यादव (19), काजीपुर निवासी अभय उर्फ बंटी (18), शिव साहनी (20) और बुढि़याबारी निवासी एक अन्य शुभम यादव शुक्रवार दोपहर करीब 2:30 बजे राप्ती नदी में नहाने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि नहाते समय चारों अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे।
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इसी दौरान बरियारपुर निवासी शुभम यादव किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया और उसने शोर मचाकर लोगों को घटना की जानकारी दी। इस पर स्थानीय गोताखोरों और एसडीआरएफ टीम ने देर शाम तक तलाश अभियान चलाया लेकिन अंधेरा होने के कारण अभियान रोकना पड़ा।
शनिवार सुबह फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब आठ बजे के आसपास गोताखोरों ने शुभम यादव और शिव निषाद का शव बरामद किया। इसके बाद तलाश जारी रखते हुए कुछ ही देर में अभय यादव उर्फ बंटी का भी शव नदी से निकाल लिया गया।
उधर, घटना की सूचना पर जंगल कौड़िया के ब्लॉक प्रमुख बृजेश यादव भी मौके पर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। मजनू चौकी पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। शव मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजनों को देख मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
नदी किनारे रातभर जिंदा रहीं उम्मीदें,सुबह हमेशा के लिए बुझ गईं
गोरखपुर के चिलुआताल क्षेत्र के बंजरहा गांव के पास राप्ती नदी में शुक्रवार को डूबे तीनों युवकों के परिजन रातभर मौके पर डटे रहे, लेकिन सुबह उनकी उम्मीदें टूट गईं। एसडीआरएफ की टीम ने एक-एक कर तीनों के शव नदी से बाहर निकाले तो घाट पर चीख-पुकार मच गई। तीनों के गांव में मातम पसर गया।
गोरखपुर के चिलुआताल क्षेत्र के बंजरहा गांव के पास राप्ती नदी में शुक्रवार को डूबे तीनों युवकों के परिजन रातभर मौके पर डटे रहे, लेकिन सुबह उनकी उम्मीदें टूट गईं। एसडीआरएफ की टीम ने एक-एक कर तीनों के शव नदी से बाहर निकाले तो घाट पर चीख-पुकार मच गई। तीनों के गांव में मातम पसर गया।
घटना के बाद शुक्रवार शाम से ही परिजन नदी किनारे डटे हुए थे। हर गुजरती लहर के साथ उन्हें यही उम्मीद थी कि शायद उनका बेटा जिंदा बाहर आ जाए। शनिवार सुबह जब बचाव दल ने तलाश तेज की तो सबसे पहले शुभम यादव (19) का शव मिला। इसके कुछ ही समय बाद शिव निषाद और फिर अभय यादव उर्फ बंटी (18) का शव नदी से बाहर निकाला गया।
शुभम बरियारपुर गांव का रहने वाला था और 12वीं का छात्र था। उसके पिता विनोद यादव शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत हैं। शुभम अपने दो भाइयों और एक बहन में पढ़ाई में सबसे आगे माना जाता था। हादसे की सूचना मिलते ही माता-पिता नदी किनारे पहुंचे और बेटे को आवाज देते रहे। मां बार-बार बेसुध होकर कहती रहीं-मेरा बेटा वापस आ जाएगा लेकिन जैसे ही उसका शव बाहर आया, उनकी चीखों से माहौल गमगीन हो गया।
वहीं, अभय यादव उर्फ बंटी (18) महात्मा गांधी इंटर कॉलेज में 10वीं का छात्र था। वह अपने परिवार का इकलौता संतान था। उसके पिता मजदूरी कर घर चलाते हैं। बेटे की मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। मां का रो-रोकर बुरा हाल था और वह बार-बार यही कहती रही कि अब हमारा कौन सहारा रहेगा। गांव के लोग परिवार को संभालने की कोशिश करते रहे।
शिव साहनी (20) 12वीं का छात्र था और महात्मा गांधी इंटर कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था। वह तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था और परिवार की जिम्मेदारियों का सहारा माना जाता था। उसके पिता पेंट-पॉलिश का काम कर घर चलाते हैं। हादसे के बाद पिता बार-बार नदी की ओर भागते रहे और बेटे को बचाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।
एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। गांवों में लोग एक-दूसरे को ढांढस बंधाते नजर आए लेकिन हर घर में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है।

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