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Gorakhpur News: कांग्रेस-सपा व बसपा ने मछुआ आरक्षण मुद्दे को बनाया जटिल
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 23 Mar 2026 02:35 AM IST
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गोरखपुर। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने प्रांतीय अधिवेशन में मछुआ समाज के आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा। कहा कि कांग्रेस, सपा और बसपा ने मछुआ आरक्षण के मुद्दे को अत्यधिक जटिल बना दिया, जिसके कारण आज समाधान में समय लग रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह मछुआ आरक्षण के विषय पर सदैव गंभीर रहे हैं।
डॉ. निषाद, रविवार को निषाद पार्टी की ओर से महाराजा गुह्यराज निषाद की जयंती पर गोरक्षप्रांत के प्रांतीय अधिवेशन और रैली को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी प्रदेश में चार बड़ी जनसभाएं कर प्रदेश एवं केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांग रखने का कार्य करेगी। यह कोई विरोध नहीं बल्कि निषाद समाज का संकल्प है। मछुआ समाज की सभी उपजातियों की एक ही मांग है कि केंद्र व राज्य सरकार, उत्तराखंड की तर्ज पर यह स्वीकार करे कि शिल्पकार एक जाति नहीं बल्कि जातियों का समूह है।
इस दौरान पूर्व सांसद इंजी. प्रवीण निषाद, विधायक सरवन निषाद, विधायक अनिल त्रिपाठी, रविंद्र मणि निषाद आदि मौजूद रहे।
ये प्रमुख मुद्दे उठाए गए : मझवार, तुरैहा को अनुसूचित जाति में परिभाषित करने की मांग, खनन, बालू और पुश्तैनी घाटों पर अधिकार बहाली,वर्ग-3 की भूमि को मछुआ समाज के लिए पुनः आरक्षित करना आदि रहा।
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डॉ. निषाद, रविवार को निषाद पार्टी की ओर से महाराजा गुह्यराज निषाद की जयंती पर गोरक्षप्रांत के प्रांतीय अधिवेशन और रैली को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी प्रदेश में चार बड़ी जनसभाएं कर प्रदेश एवं केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांग रखने का कार्य करेगी। यह कोई विरोध नहीं बल्कि निषाद समाज का संकल्प है। मछुआ समाज की सभी उपजातियों की एक ही मांग है कि केंद्र व राज्य सरकार, उत्तराखंड की तर्ज पर यह स्वीकार करे कि शिल्पकार एक जाति नहीं बल्कि जातियों का समूह है।
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इस दौरान पूर्व सांसद इंजी. प्रवीण निषाद, विधायक सरवन निषाद, विधायक अनिल त्रिपाठी, रविंद्र मणि निषाद आदि मौजूद रहे।
ये प्रमुख मुद्दे उठाए गए : मझवार, तुरैहा को अनुसूचित जाति में परिभाषित करने की मांग, खनन, बालू और पुश्तैनी घाटों पर अधिकार बहाली,वर्ग-3 की भूमि को मछुआ समाज के लिए पुनः आरक्षित करना आदि रहा।