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UP: 'मेरी आंखों के सामने गहरे पानी में समा गए दोस्त', रील पर लाइक और व्यूज की चाह ने ले ली चार जिंदगियां
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 04 Apr 2026 01:51 PM IST
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सार
रील पर लाइक और व्यूज की चाहत ने गोरखपुर के खोराबार इलाके में चार किशोरों की जिंदगी छीन ली। चारों किशोर मिर्जापुर में राप्ती नदी में नहाने गए थे। पीपा पुल से कूदने के बाद वह नदी के तेज बहाव में बह गए।
रोते बिलखते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
गोरखपुर के खोराबार क्षेत्र के मिर्जापुर घाट पर शुक्रवार की सुबह जैसे ही राप्ती नदी से तीन किशोरों के शव बाहर निकाले गए, वहां मौजूद परिजनों का सब्र टूट गया। चीख-पुकार से पूरा घाट कांप उठा। कोई अपने बेटे को सीने से लगाने के लिए दौड़ पड़ा तो कोई बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ा।
इस दर्दनाक मंजर को देखकर मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों में कोई डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था तो कोई यूट्यूबर बनकर घर की किस्मत बदलना चाहता था।
घटना बुधवार दोपहर की है, जब कैंट थाना क्षेत्र के रानीडीहा शिवमंदिर टोला निवासी अमन उर्फ बीरू राजभर (15), मालवीय नगर निवासी विवेक निषाद (15), जंगल सिकरी निवासी गगन पासवान (15) और रानीडीहा निवासी अनिकेत यादव (13) अपने साथी राजकरन उर्फ टाइमपास समेत नौ बच्चे घर से 13 किमी दूर साइकिल से मिर्जापुर गांव के पास बने पीपा पुल पर पहुंचे थे। वहां आठ बच्चे पुल से कूदकर नदी में नहाने लगे।
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इस दर्दनाक मंजर को देखकर मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों में कोई डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था तो कोई यूट्यूबर बनकर घर की किस्मत बदलना चाहता था।
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घटना बुधवार दोपहर की है, जब कैंट थाना क्षेत्र के रानीडीहा शिवमंदिर टोला निवासी अमन उर्फ बीरू राजभर (15), मालवीय नगर निवासी विवेक निषाद (15), जंगल सिकरी निवासी गगन पासवान (15) और रानीडीहा निवासी अनिकेत यादव (13) अपने साथी राजकरन उर्फ टाइमपास समेत नौ बच्चे घर से 13 किमी दूर साइकिल से मिर्जापुर गांव के पास बने पीपा पुल पर पहुंचे थे। वहां आठ बच्चे पुल से कूदकर नदी में नहाने लगे।
इसी दौरान अचानक अमन उर्फ बीरू, विवेक, गगन और अनिकेत गहरे पानी में चले गए और डूब गए। बाकी बच्चे किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकले। सूचना मिलने पर पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और तलाश अभियान शुरू किया गया।
बृहस्पतिवार शाम को विवेक का शव बरामद हुआ, जबकि शुक्रवार सुबह करीब सात बजे तीन अन्य किशोरों अमन, गगन और अनिकेत के शव भी नदी से खोज निकाले गए।
पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव को परिजनों के हवाले कर दिया गया। बच्चों के राप्ती नदी में डूबने के बाद से तीनों के घर में तीन दिन से चूल्हे नहीं जले। हर घर में मातम पसरा हुआ है। किसी ने अपना इकलौता बेटा खोया तो किसी ने अपने सपनों का सहारा।
टाइमपास ने बताई पूरी कहानी
डबडबाती आंखों से जीवित बचे टाइमपास ने बताया कि विवेक व विपिन ने घटना के दिन नहाने की योजना बनाई थी। सभी दोस्त दोपहर एक बजे एकत्रित हुए इसके बाद वह पहली बार वहां नहाने गए थे। अचानक गहराई में जाने के कारण वे डूबने लगे।
डबडबाती आंखों से जीवित बचे टाइमपास ने बताया कि विवेक व विपिन ने घटना के दिन नहाने की योजना बनाई थी। सभी दोस्त दोपहर एक बजे एकत्रित हुए इसके बाद वह पहली बार वहां नहाने गए थे। अचानक गहराई में जाने के कारण वे डूबने लगे।
उसने बताया कि घटनास्थल के पास मछली पकड़ रहे एक बाबा ने किसी तरह उसे पानी से बाहर निकाला, जिसके बाद वह डरकर वहां से भाग गया। वह बहुत डरा हुआ था और वहां से भागकर चिड़ियाघर के पास भारत माता के मूर्ति के पास जाकर सो गया। जब वह जगा तो शाम को घर आया और तब उसको लेकर लोग घाट पर गए और उसने बताया कि कौन-कौन डूबा है।
उसने बताया कि विपिन भैरोपुर में किराए पर रहता है, बाकी चार लड़कों को वह नहीं जानता है। उसने बताया कि 10 दिन पहले सभी की दोस्ती हुई थी और पहली बार वहां गए थे ।
बच्चों के सपनों को याद कर परिजनों के छलके आंसू
बच्चों के अधूरे सपने अब परिवारों की आंखों में आंसू बनकर रह गए हैं। विवेक निषाद के बाबा ओमप्रकाश ने बताया कि उनका परिवार बहुत गरीब है। विवेक को यूट्यूब पर रील बनाने का शौक था और वह अक्सर कहता था कि एक दिन वह बड़ा यूट्यूबर बनकर घर की माली हालत बदलेगा। उसकी मेहनत रंग लाने ही वाली थी, लेकिन उससे पहले ही हादसे ने उसे छीन लिया।
बच्चों के अधूरे सपने अब परिवारों की आंखों में आंसू बनकर रह गए हैं। विवेक निषाद के बाबा ओमप्रकाश ने बताया कि उनका परिवार बहुत गरीब है। विवेक को यूट्यूब पर रील बनाने का शौक था और वह अक्सर कहता था कि एक दिन वह बड़ा यूट्यूबर बनकर घर की माली हालत बदलेगा। उसकी मेहनत रंग लाने ही वाली थी, लेकिन उससे पहले ही हादसे ने उसे छीन लिया।
वहीं, अनिकेत यादव पढ़ाई में काफी होनहार था। उसके पिता घनश्याम यादव ने बताया कि वह बड़ा अफसर बनने का सपना देखता था। परिवार ने उसे पढ़ाने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सबसे छोटा गगन पासवान भी अपने परिवार के लिए बड़े सपने देखता था। उसके पिता ने बताया कि वह कहता था कि बड़ा होकर खूब मेहनत करेगा और घर की गरीबी दूर करेगा। अब उसके जाने के बाद मां चंद्रावती का रो-रोकर बुरा हाल है और वह बार-बार बेहोश हो जा रही हैं।
घाट से लेकर पोस्टमार्टम तक मची रही चीख-पुकार
घाट से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक हर जगह सिर्फ चीख-पुकार और मातम का माहौल रहा। एक साथ चार मासूम जिंदगियों के बुझ जाने से पूरा इलाका शोक में डूबा हुआ है। वहीं पोस्टमार्टम के बाद बच्चों के शव जब गांव लाए गए तो वहां ग्रामीणों की भीड़ लग गई।
घाट से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक हर जगह सिर्फ चीख-पुकार और मातम का माहौल रहा। एक साथ चार मासूम जिंदगियों के बुझ जाने से पूरा इलाका शोक में डूबा हुआ है। वहीं पोस्टमार्टम के बाद बच्चों के शव जब गांव लाए गए तो वहां ग्रामीणों की भीड़ लग गई।
'मेरी आंखों के सामने गहरे पानी में समा गए दोस्त'
डबडबाती आंखों से जीवित बचे राजकरन उर्फ टाइमपास ने बताया कि विवेक व विपिन ने घटना के दिन नहाने की योजना बनाई थी। सभी दोस्त दोपहर एक बजे एकत्रित हुए इसके बाद वह पहली बार वहां नहाने गए थे। अचानक गहराई में जाने के कारण वे डूबने लगे। उसने बताया कि घटनास्थल के पास मछली पकड़ रहे एक बाबा ने किसी तरह उसे पानी से बाहर निकाला, जिसके बाद वह डरकर वहां से भाग गया।
डबडबाती आंखों से जीवित बचे राजकरन उर्फ टाइमपास ने बताया कि विवेक व विपिन ने घटना के दिन नहाने की योजना बनाई थी। सभी दोस्त दोपहर एक बजे एकत्रित हुए इसके बाद वह पहली बार वहां नहाने गए थे। अचानक गहराई में जाने के कारण वे डूबने लगे। उसने बताया कि घटनास्थल के पास मछली पकड़ रहे एक बाबा ने किसी तरह उसे पानी से बाहर निकाला, जिसके बाद वह डरकर वहां से भाग गया।
वह बहुत डरा हुआ था और वहां से भागकर चिड़ियाघर के पास भारत माता के मूर्ति के पास जाकर सो गया। जब वह जगा तो शाम को घर आया और तब उसको लेकर लोग घाट पर गए और उसने बताया कि कौन-कौन डूबा है। उसने बताया कि विपिन भैरोपुर में किराए पर रहता है, बाकी चार लड़कों को वह नहीं जानता है। उसने बताया कि 10 दिन पहले सभी की दोस्ती हुई थी और पहली बार वहां गए थे।
रील पर लाइक और व्यूज की चाह ने ले ली चार जिंदगियां
गोरखपुर। रील पर लाइक और व्यूज की चाहत ने खोराबार इलाके में चार किशोरों की जिंदगी छीन ली। चारों किशोर मिर्जापुर में राप्ती नदी में नहाने गए थे। पीपा पुल से कूदने के बाद वह नदी के तेज बहाव में बह गए।
गोरखपुर। रील पर लाइक और व्यूज की चाहत ने खोराबार इलाके में चार किशोरों की जिंदगी छीन ली। चारों किशोर मिर्जापुर में राप्ती नदी में नहाने गए थे। पीपा पुल से कूदने के बाद वह नदी के तेज बहाव में बह गए।
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यूज, लाइक और कमेंट के लिए आजकल युवा और किशोर सारी हदें पार कर दे रहे हैं। वायरल होने के लिए कोई नदी में छलांग लगा दे रहा तो कोई सड़क पर ही डांस करते हुए हादसे का जोखिम उठा रहा है। रील के लिए लड़कियां भी सुनसान स्थानों का रुख करके अपनी सुरक्षा खतरे में डाल रही हैं। इस तरह के दुस्साहस से पूरा परिवार तबाह हो रहा है।
केस एक
जून 2025 में गीडा थाना क्षेत्र के पिपरौली बाजार निवासी राज वर्मा (17) का शव राप्ती नदी में घटनास्थल से चार किलोमीटर दूर मिला था। वह कालेसर जीरो पॉइंट के पास राप्ती नदी के घाट पर नहाने का रील बनाते समय डूब गया था। एसडीआरएफ ने रेस्क्यू अभियान चलाकर बरहुआ गांव के किनारे से शव बरामद किया था।
जून 2025 में गीडा थाना क्षेत्र के पिपरौली बाजार निवासी राज वर्मा (17) का शव राप्ती नदी में घटनास्थल से चार किलोमीटर दूर मिला था। वह कालेसर जीरो पॉइंट के पास राप्ती नदी के घाट पर नहाने का रील बनाते समय डूब गया था। एसडीआरएफ ने रेस्क्यू अभियान चलाकर बरहुआ गांव के किनारे से शव बरामद किया था।
केस दो
मार्च 2025 में बेलीपार थाना क्षेत्र के क्योनरा गांव के रहने वाले चार दोस्त शिवम, गोलू, सनी और अंकुश बलुई गाड़ा राप्ती तट के किनारे घूमने गए थे। इस दौरान गोलू यादव (17) और अंकुश विश्वकर्मा (19) नदी किनारे पहुंचे और पानी में उतरकर नहाने लगे। वहीं, सनी और शिवम पास ही स्थित पीपा पुल पर जाकर रील बनाने में मशगूल हो गए। इसी बीच नहाने गए दोनों दोस्त पानी में डूबने लगे थे। शोर सुनकर जब तक शिवम और शनि उन्हें बचाने पहुंचते तब तक दोनों गहरे पानी में जा चुके थे और धीरे-धीरे आंखों से ओझल हो गए।
मार्च 2025 में बेलीपार थाना क्षेत्र के क्योनरा गांव के रहने वाले चार दोस्त शिवम, गोलू, सनी और अंकुश बलुई गाड़ा राप्ती तट के किनारे घूमने गए थे। इस दौरान गोलू यादव (17) और अंकुश विश्वकर्मा (19) नदी किनारे पहुंचे और पानी में उतरकर नहाने लगे। वहीं, सनी और शिवम पास ही स्थित पीपा पुल पर जाकर रील बनाने में मशगूल हो गए। इसी बीच नहाने गए दोनों दोस्त पानी में डूबने लगे थे। शोर सुनकर जब तक शिवम और शनि उन्हें बचाने पहुंचते तब तक दोनों गहरे पानी में जा चुके थे और धीरे-धीरे आंखों से ओझल हो गए।
सोशल आइसोलेशन को मिल रहा बढ़ावा
समाजशास्त्री डॉ. मनीष पांडेय कहते हैं कि रील्स बनाने व देखने की लत अब एक बड़ी सामाजिक समस्या के रूप में सामने आ रही है। हालांकि, रील्स और शॉर्ट्स आज की प्रमुख तकनीकी सांस्कृतिक धाराएं हैं, जिनका बहिष्कार नहीं किया जा सकता। इसका अत्यधिक उपयोग हमारे मानसिक, सामाजिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। लोग दूसरों की ट्रेंड हुई रील से अपनी वास्तविकता की तुलना करते हैं, जिससे असंतोष, हीनभावना और अवास्तविक अपेक्षाएं उत्पन्न होती हैं। यह सामाजिक सहनशीलता को कम करके सोशल आइसोलेशन को बढ़ा रही है। यह समस्या वर्चुअल दुनिया की एक सामाजिक संरचनात्मक चुनौती है, जिसका समाधान बहुस्तरीय सहभागिता से ही संभव है।
समाजशास्त्री डॉ. मनीष पांडेय कहते हैं कि रील्स बनाने व देखने की लत अब एक बड़ी सामाजिक समस्या के रूप में सामने आ रही है। हालांकि, रील्स और शॉर्ट्स आज की प्रमुख तकनीकी सांस्कृतिक धाराएं हैं, जिनका बहिष्कार नहीं किया जा सकता। इसका अत्यधिक उपयोग हमारे मानसिक, सामाजिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। लोग दूसरों की ट्रेंड हुई रील से अपनी वास्तविकता की तुलना करते हैं, जिससे असंतोष, हीनभावना और अवास्तविक अपेक्षाएं उत्पन्न होती हैं। यह सामाजिक सहनशीलता को कम करके सोशल आइसोलेशन को बढ़ा रही है। यह समस्या वर्चुअल दुनिया की एक सामाजिक संरचनात्मक चुनौती है, जिसका समाधान बहुस्तरीय सहभागिता से ही संभव है।
बेरोजगारी की वजह से बढ़ रहा रील का चलन
मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय ने बताया कि आजकल के युवा कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में सोशल मीडिया के माध्यम से आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि पढ़ाई में लंबा समय लग जाता है और मनचाही नौकरी नहीं मिलती। कुछ लोगों को सफल देख उनके अंदर भी यह भावना आती है कि रील से दौलत और शोहरत दोनों आसानी से मिल जाती है। उन्हें लगता है कि रील में अलग-अलग तरीके के वीडियो बनाकर वो जल्दी आगे बढ़ सकते हैं। इस वजह से वह कई ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।
मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय ने बताया कि आजकल के युवा कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में सोशल मीडिया के माध्यम से आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि पढ़ाई में लंबा समय लग जाता है और मनचाही नौकरी नहीं मिलती। कुछ लोगों को सफल देख उनके अंदर भी यह भावना आती है कि रील से दौलत और शोहरत दोनों आसानी से मिल जाती है। उन्हें लगता है कि रील में अलग-अलग तरीके के वीडियो बनाकर वो जल्दी आगे बढ़ सकते हैं। इस वजह से वह कई ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।

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