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क्रिप्टो ठगी : अब साइबर सेल भी करेगी गिरोह के नेटवर्क की जांच
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गोरखपुर। साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस ने जांच और तेज कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल की टीम को भी जांच में शामिल किया गया है। शुरुआती जांच में कई संदिग्ध आईडी सामने आई हैं, जिनके माध्यम से जालसाज दूसरे राज्यों से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। अब इनकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के जरिये सक्रिय था, जहां गुर्गे अपनी असली पहचान छिपाने के लिए निकनेम और कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे। यहीं पर अलग-अलग लोगों को टास्क दिए जाते थे। ग्रामीण इलाकों में मौजूद सदस्य बैंक खातों के माध्यम से लेनदेन का काम संभालते थे।
खोराबार थाना पुलिस ने हाल ही में इस गिरोह से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच में यह भी पता चला कि गिरोह ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देता था। उनके आधार, पैन और अन्य दस्तावेजों के जरिये बैंक खाते खुलवाए जाते थे। भरोसा जीतने के लिए उन्हें 1500 से 2500 रुपये तक दिए जाते थे। इसके बाद साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि इन खातों में ट्रांसफर कर उसे यूएसडीटी और अन्य क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था। इससे पैसे का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
सीओ कैंट अरुण कुमार के अनुसार, ऐसे गिरोह कई स्तरों पर काम करते हैं, जिनमें शीर्ष पर मास्टरमाइंड होता है। पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले हैं। जल्द ही संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए अन्य राज्यों में टीमें भेजी जाएंगी।
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पुलिस के अनुसार, यह गिरोह टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के जरिये सक्रिय था, जहां गुर्गे अपनी असली पहचान छिपाने के लिए निकनेम और कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे। यहीं पर अलग-अलग लोगों को टास्क दिए जाते थे। ग्रामीण इलाकों में मौजूद सदस्य बैंक खातों के माध्यम से लेनदेन का काम संभालते थे।
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खोराबार थाना पुलिस ने हाल ही में इस गिरोह से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच में यह भी पता चला कि गिरोह ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देता था। उनके आधार, पैन और अन्य दस्तावेजों के जरिये बैंक खाते खुलवाए जाते थे। भरोसा जीतने के लिए उन्हें 1500 से 2500 रुपये तक दिए जाते थे। इसके बाद साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि इन खातों में ट्रांसफर कर उसे यूएसडीटी और अन्य क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था। इससे पैसे का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
सीओ कैंट अरुण कुमार के अनुसार, ऐसे गिरोह कई स्तरों पर काम करते हैं, जिनमें शीर्ष पर मास्टरमाइंड होता है। पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले हैं। जल्द ही संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए अन्य राज्यों में टीमें भेजी जाएंगी।