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Gorakhpur News: कमजोर हो रही थीं मांसपेशियां, आटोइम्यून रोग से पीड़ित महिला का प्लाज्मा थेरेपी से हुआ उपचार
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सांस लेने में भी हो रही थी दिक्कत, दिमाग से नहीं पहुंच पा रहा था संदेश
एम्स के मेडिसिन विभाग में प्लाज्मा थेरेपी से हुआ उपचार
गोरखपुर। दिमाग से संदेश न पहुंचने के कारण 50 वर्षीय एक महिला की मांसपेशियां कमजोर होती जा रही थीं। उसे सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। गंभीर हालत में महिला को एम्स के मेडिसिन विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. अजय मिश्रा को दिखाया गया। जांच में पता चला कि महिला ऑटोइम्यून रोग से पीड़ित है। इसके बाद प्लाज्मा थेरेपी से उसका उपचार किया गया।
महिला को मांसपेशियों में अत्यधिक कमजोरी, सांस लेने में कठिनाई, निगलने और बोलने में परेशानी हो रही थी। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति रेस्पिरेटरी फेल्योर (श्वसन विफलता) तक पहुंच सकती है। रोगी को थेरेप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज दिया गया।
डॉक्टरों ने बताया कि यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं और 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में अधिक देखी जाती है। महिला को मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय मिश्रा की यूनिट में भर्ती किया गया था। उपचार में न्यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. आशुतोष तिवारी और मेडिसिन के जूनियर रेजिडेंट डॉ. सामर्थ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। थेरेप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज की प्रक्रिया ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. सौरभ मूर्ति और टेक्निकल सुपरवाइजर रविंद्र के नेतृत्व में संपन्न की गई। डॉ. अजय मिश्रा ने बताया कि मायस्थेनिक संकट एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें सांस लेने में गंभीर दिक्कत, गले की मांसपेशियों की कमजोरी के कारण निगलने और बोलने में परेशानी एवं पूरे शरीर की मांसपेशियों में कमजोरी होती है। ऐसे मामलों में तत्काल वेंटिलेशन सपोर्ट और प्लाज्माफेरेसिस या इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी की आवश्यकता होती है। उपचार के सात दिन बाद महिला को स्वस्थ होने पर छुट्टी दे दी गई।
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एम्स के मेडिसिन विभाग में प्लाज्मा थेरेपी से हुआ उपचार
गोरखपुर। दिमाग से संदेश न पहुंचने के कारण 50 वर्षीय एक महिला की मांसपेशियां कमजोर होती जा रही थीं। उसे सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। गंभीर हालत में महिला को एम्स के मेडिसिन विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. अजय मिश्रा को दिखाया गया। जांच में पता चला कि महिला ऑटोइम्यून रोग से पीड़ित है। इसके बाद प्लाज्मा थेरेपी से उसका उपचार किया गया।
महिला को मांसपेशियों में अत्यधिक कमजोरी, सांस लेने में कठिनाई, निगलने और बोलने में परेशानी हो रही थी। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति रेस्पिरेटरी फेल्योर (श्वसन विफलता) तक पहुंच सकती है। रोगी को थेरेप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज दिया गया।
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डॉक्टरों ने बताया कि यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं और 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में अधिक देखी जाती है। महिला को मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय मिश्रा की यूनिट में भर्ती किया गया था। उपचार में न्यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. आशुतोष तिवारी और मेडिसिन के जूनियर रेजिडेंट डॉ. सामर्थ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। थेरेप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज की प्रक्रिया ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. सौरभ मूर्ति और टेक्निकल सुपरवाइजर रविंद्र के नेतृत्व में संपन्न की गई। डॉ. अजय मिश्रा ने बताया कि मायस्थेनिक संकट एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें सांस लेने में गंभीर दिक्कत, गले की मांसपेशियों की कमजोरी के कारण निगलने और बोलने में परेशानी एवं पूरे शरीर की मांसपेशियों में कमजोरी होती है। ऐसे मामलों में तत्काल वेंटिलेशन सपोर्ट और प्लाज्माफेरेसिस या इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी की आवश्यकता होती है। उपचार के सात दिन बाद महिला को स्वस्थ होने पर छुट्टी दे दी गई।