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Gorakhpur News: मासूम से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:35 PM IST
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गोरखपुर/सिद्धार्थनगर। पीपीगंज थानाक्षेत्र में छह साल की मासूम के साथ हुई दरिंदगी में अशोक निषाद को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अशोक कुमार यादव ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
साथ ही अपराध में सहयोग और सबूत मिटाने की दोषी पाई गई उसकी मां सुनीता देवी को चार साल के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है। बता दें कि मामले की गंभीरता पर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए घटना के पांच दिन बाद भी चार्जशीट दाखिल कर दी थी। कोर्ट ने 18 कार्यदिवस में दोषी के खिलाफ सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष के विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, घटना 20-21 फरवरी की रात की है। सिद्धार्थनगर जिले की रहने वाली बच्ची अपने परिवार के साथ रिश्तेदारी में आयोजित शादी समारोह में शामिल हुई थी। रात करीब 12 से 2 बजे के बीच छह मासूम अचानक शादी समारोह से गायब हो गई। परिजनों ने तलाश शुरू की तो पंडाल के पीछे आरोपी अशोक निषाद मासूम के साथ दुष्कर्म कर रहा था। परिजनों को देखते ही वह बच्ची को छोड़कर भाग गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोषी के खिलाफ दुष्कर्म, साक्ष्य छिपाने, पॉक्सो एक्ट की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। जांच के बाद पुलिस ने एक सप्ताह के भीतर ही आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितियों का गहन परीक्षण किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह अपराध अत्यंत जघन्य और अमानवीय है, जिसमें किसी भी प्रकार की नरमी की गुंजाइश नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अशोक निषाद को पॉक्सो एक्ट की धारा छह के तहत आजीवन कारावास, जो उसके शेष जीवनकाल तक प्रभावी रहेगा, दिया जाता है। साथ ही अन्य धाराओं में चार वर्ष की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई।
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साथ ही अपराध में सहयोग और सबूत मिटाने की दोषी पाई गई उसकी मां सुनीता देवी को चार साल के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है। बता दें कि मामले की गंभीरता पर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए घटना के पांच दिन बाद भी चार्जशीट दाखिल कर दी थी। कोर्ट ने 18 कार्यदिवस में दोषी के खिलाफ सजा सुनाई।
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अभियोजन पक्ष के विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, घटना 20-21 फरवरी की रात की है। सिद्धार्थनगर जिले की रहने वाली बच्ची अपने परिवार के साथ रिश्तेदारी में आयोजित शादी समारोह में शामिल हुई थी। रात करीब 12 से 2 बजे के बीच छह मासूम अचानक शादी समारोह से गायब हो गई। परिजनों ने तलाश शुरू की तो पंडाल के पीछे आरोपी अशोक निषाद मासूम के साथ दुष्कर्म कर रहा था। परिजनों को देखते ही वह बच्ची को छोड़कर भाग गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोषी के खिलाफ दुष्कर्म, साक्ष्य छिपाने, पॉक्सो एक्ट की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। जांच के बाद पुलिस ने एक सप्ताह के भीतर ही आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितियों का गहन परीक्षण किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह अपराध अत्यंत जघन्य और अमानवीय है, जिसमें किसी भी प्रकार की नरमी की गुंजाइश नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अशोक निषाद को पॉक्सो एक्ट की धारा छह के तहत आजीवन कारावास, जो उसके शेष जीवनकाल तक प्रभावी रहेगा, दिया जाता है। साथ ही अन्य धाराओं में चार वर्ष की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई।