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एमएममएयूटी प्रकरण : जांच टीम में डीडीयू की दो महिला प्रोफेसर भी शामिल
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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बुधवार शाम छात्र-छात्राओं की ओर से प्रोफेसर पर आरोप लगाते हुए हंगामा किए जाने के मामले में गठित समिति एक-दो दिन में जांच शुरू कर सकती है। इस मामले में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की दो महिला प्रोफेसरों को जांच समिति में शामिल किया गया है।
बताया जा रहा है कि छात्र-छात्राएं मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए बुधवार की देर रात डीएम दीपक मीणा और एसएसपी डॉ. कौस्तुभ समेत प्रशासन और पुलिस के कई अधिकारी एमएमएमयूटी पहुंचे थे। इन अधिकारियों की मौजूदगी में प्रशासनिक भवन में छात्र-छात्राओं ने पूरे मामले से अवगत कराया। इसके साथ ही अन्य समस्याओं को भी रखा। प्रशासनिक और विश्वविद्यालय के अधिकारियों और छात्र-छात्राओं की सहमति के आधार पर डीडीयू की दो महिला प्रोफेसरों को जांच समिति में शामिल किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को आश्वस्त किया गया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी।
बताया जा रहा है कि छात्र-छात्राओं के जाने के बाद भी रात करीब 11 बजे तक जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय के अधिकारी इस मामले के सभी तथ्यों की जांच को लेकर विमर्श करते रहे।
यह है मामला
बुधवार को शहर के एक शिक्षण संस्थान में शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। वहां एमएमएमयूटी के छात्र-छात्राओं को भी पहुंचना था। एक महिला छात्रावास से छात्राएं नहीं पहुंचीं थीं। इसे देखते हुए एक प्रोफसर संबंधित वार्ड की वार्डन, कुछ शिक्षकों और गार्ड के साथ उस हॉस्टल में पहुंचे। वहां दरवाजा खटखटाया गया। छात्राओं का आरोप था कि पुरुष प्रोफेसर ने दरवाजा खटखटाया था। उस समय वे घरेलू कपड़ों में थीं। इससे वह असहज हो गईं। उनका यह भी आरोप था कि कार्यक्रम में जाने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा था।
इस संबंध में कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने बताया कि छात्र-छात्राओं को आश्वासन दिया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर न्यायोचित निर्णय लिया जाएगा।
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बताया जा रहा है कि छात्र-छात्राएं मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए बुधवार की देर रात डीएम दीपक मीणा और एसएसपी डॉ. कौस्तुभ समेत प्रशासन और पुलिस के कई अधिकारी एमएमएमयूटी पहुंचे थे। इन अधिकारियों की मौजूदगी में प्रशासनिक भवन में छात्र-छात्राओं ने पूरे मामले से अवगत कराया। इसके साथ ही अन्य समस्याओं को भी रखा। प्रशासनिक और विश्वविद्यालय के अधिकारियों और छात्र-छात्राओं की सहमति के आधार पर डीडीयू की दो महिला प्रोफेसरों को जांच समिति में शामिल किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को आश्वस्त किया गया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी।
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बताया जा रहा है कि छात्र-छात्राओं के जाने के बाद भी रात करीब 11 बजे तक जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय के अधिकारी इस मामले के सभी तथ्यों की जांच को लेकर विमर्श करते रहे।
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बुधवार को शहर के एक शिक्षण संस्थान में शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। वहां एमएमएमयूटी के छात्र-छात्राओं को भी पहुंचना था। एक महिला छात्रावास से छात्राएं नहीं पहुंचीं थीं। इसे देखते हुए एक प्रोफसर संबंधित वार्ड की वार्डन, कुछ शिक्षकों और गार्ड के साथ उस हॉस्टल में पहुंचे। वहां दरवाजा खटखटाया गया। छात्राओं का आरोप था कि पुरुष प्रोफेसर ने दरवाजा खटखटाया था। उस समय वे घरेलू कपड़ों में थीं। इससे वह असहज हो गईं। उनका यह भी आरोप था कि कार्यक्रम में जाने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा था।
इस संबंध में कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने बताया कि छात्र-छात्राओं को आश्वासन दिया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर न्यायोचित निर्णय लिया जाएगा।
