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Gorakhpur News: मृत बच्ची को इलाज के लिए निजी अस्पताल भेजने के छह आरोपी गिरफ्तार

संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Fri, 17 Apr 2026 03:00 AM IST
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Police busted the network, exposing the collusion of ambulance workers.
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पुलिस ने नेटवर्क का किया पर्दाफाश, एंबुलेंस कर्मियों की मिलीभगत उजागर
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बीआरडी प्राचार्य की तहरीर पर गुलरिहा पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर की कार्रवाई
आरोपियों में बिहार, संतकबीरनगर, बलरामपुर व कुशीनगर के मरीज माफिया शामिल

गुलरिहा (गोरखपुर)। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मृत घोषित की गई बच्ची को निजी अस्पताल ले जाकर इलाज के नाम पर ठगी की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। मामले में गुलरिहा पुलिस ने सरकारी एंबुलेंस चालक, ईएमटी, दो निजी अस्पतालों के मैनेजर और एक निजी एंबुलेंस चालक समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी को बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
आरोपियों की पहचान पीपीगंज के भागलपुर साकिन निवासी वेदप्रकाश, बलरामपुर के ललिया कटुई निवासी राहुल, कुशीनगर के रामकोला बंधवा निवासी गुंजेश यादव, संतकबीरनगर के महुली घोरही निवासी अमन पांडेय, गोपालगंज के कटया निवासी अंकित शुक्ला और सिकरीगंज के गाईबेला निवासी राहुल शर्मा के रूप में हुई है।
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एसपी सिटी निमिष पाटील के अनुसार, पकड़े गए आरोपी ईएमटी की मदद से परिजनों को गुमराह कर मृत बच्ची को निजी अस्पताल में भर्ती कराने की तैयारी कर रहे थे। इसके लिए सरकारी एंबुलेंस के चालक और ईएमटी निजी अस्पतालों से संपर्क कर कमीशन लेते थे।
घटना 14 अप्रैल की है। सिद्धार्थनगर से गंभीर हालत में एक बच्ची को 108 एंबुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज लाया गया। बाल रोग संस्थान में डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया। इसके बावजूद एंबुलेंस कर्मियों ने परिजनों से कहा कि बच्ची की हालत गंभीर है और अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है। उन्होंने अपने परिचित निजी अस्पतालों में भर्ती कराने की सलाह दी। डरे-सहमे परिजन उनकी बातों में आ गए।
इसके बाद ईएमटी वेदप्रकाश और चालक राहुल ने तारामंडल स्थित सानवी अस्पताल के मैनेजर राहुल शर्मा से संपर्क किया। दूरी अधिक होने की बात कहकर उसने फातिमा रोड स्थित गौरी अस्पताल के मैनेजर अंकित शुक्ला को सूचना दी। इसी दौरान निजी एंबुलेंस चालक गुंजेश यादव बीआरडी मेडिकल कॉलेज गेट के पास पहुंच गया और बच्ची को एंबुलेंस में बैठाने लगा। तभी वहां मौजूद गार्डों को शक हुआ और उन्होंने उसे पकड़कर मेडिकल चौकी पुलिस को सूचना दे दी।
पकड़े जाने के बाद आरोपियों ने बचने के लिए बच्ची का दोबारा पर्चा तक बनवाने की कोशिश की। बीआरडी प्राचार्य की तहरीर पर गुलरिहा पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बृहस्पतिवार दोपहर बाद सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है और अन्य संलिप्त लोगों की तलाश की जा रही है।
मरीजों को निजी अस्पताल में भेजने के लिए लेते थे पांच से 10 हजार
आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि यह एक संगठित गिरोह है, जो देवरिया, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर समेत कई जिलों में सक्रिय है। गिरोह के गुर्गे सरकारी एंबुलेंस कर्मियों से मिलीभगत कर मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजते थे। इसके बदले पांच से 10 हजार रुपये तक कमीशन लेते थे। पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क में निजी एंबुलेंस चालक भी शामिल हैं, जो मरीजों को बीआरडी से निजी अस्पतालों तक पहुंचाने का काम करते थे।
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