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Gorakhpur News: गैस एजेंसी बदलने से बढ़ी परेशानी, केवाईसी के लग रही लंबी लाइनें
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 01 Apr 2026 02:50 AM IST
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गैस सिलिंडर नहीं मिलने पर कई लोगों के घर चूल्हे पर बन रहा खाना
कृष्णा गैस एजेंसी बंद होने से 4000 उपभोक्ताओं के कनेक्शन सुशीला एजेंसी पर हुआ मर्ज
तीन दिन में 700 लोगों का हो पाया है केवाईसी, सुबह से ही लग रही भीड़
गोरखपुर। कृष्णा गैस एजेंसी बंद होने के बाद उसके चार हजार से अधिक उपभोक्ताओं को सुशीला गैस एजेंसी में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके बाद से सुशीला गैस एजेंसी कार्यालय पर रोजाना भारी भीड़ देखी जा रही है। इसके लिए सुबह से शाम तक लंबी लाइन लग रही है, लेकिन कई लोगों निराश लौटना पड़ा रहा है। गैस सिलिंडर न मिलने पर लोगों के घरों पर चूल्हे पर किसी तरह खाना बनाया जा रहा है।
सुशीला गैस एजेंसी पर प्रतिदिन 200 से अधिक उपभोक्ता केवाईसी कराने, मोबाइल नंबर अपडेट कराने और ऑनलाइन बुकिंग चालू कराने के लिए पहुंच रहे हैं। कृष्णा गैस एजेंसी के प्रबंधक ने बताया कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति समय पर नहीं हो पा रही थी और कंपनी स्तर पर लगातार दिक्कत आ रही थी। इसी कारण उपभोक्ताओं के सारे कनेक्शन को एजेंसी सुशीला गैस एजेंसी में मर्ज करने का निर्णय लिया गया। लेकिन ट्रांसफर के बाद तकनीकी समस्याओं के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
वहीं सुशीला गैस एजेंसी के प्रबंधक उमेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि कृष्णा एजेंसी के उपभोक्ताओं का अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। केवाईसी करने में थोड़ी दिक्कत हो रही है। जब तक केवाईसी नहीं होता है, गैस सिलिंडर न तो बुक होगा और न ही डिलिवरी हो पाएगी।
अलीनगर की शाहजहां बानो ने बताया कि एक महीने से गैस सिलिंडर नहीं मिला है और केवाईसी के लिए कई बार चक्कर लगाना पड़ रहा है। लकड़ी खरीद कर खाना बनाना पड़ रहा है।
डोहरिया बाजार के इंद्रजीत शर्मा ने बताया कि एजेंसी बदलने के बाद बुकिंग में समस्या आ रही है। पिछले तीन दिन से 15 किलोमीटर की दूरी तय कर आना पड़ रहा है। अभी तक केवाईसी नहीं हो पाई है। दो दिन बाद बुलाया गया है।
कोनी की नसीमा खातून ने बताया कि परिवार चलाना मुश्किल हो गया है क्योंकि गैस सिलिंडर समय पर नहीं मिल रहा। कनेक्शन ट्रांसफर के बाद केवाईसी की अलग से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
लालडिग्गी मोहल्ले की रहने वाली पूजा भी गैस सिलेंडर लेने पहुंचीं, लेकिन केवाईसी पूरा न होने से वापस लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि घर में खाना बनाने के लिए मजबूरी में ब्लैक में करीब दो हजार रुपये देकर सिलिंडर लेना पड़ रहा है।
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कृष्णा गैस एजेंसी बंद होने से 4000 उपभोक्ताओं के कनेक्शन सुशीला एजेंसी पर हुआ मर्ज
तीन दिन में 700 लोगों का हो पाया है केवाईसी, सुबह से ही लग रही भीड़
गोरखपुर। कृष्णा गैस एजेंसी बंद होने के बाद उसके चार हजार से अधिक उपभोक्ताओं को सुशीला गैस एजेंसी में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके बाद से सुशीला गैस एजेंसी कार्यालय पर रोजाना भारी भीड़ देखी जा रही है। इसके लिए सुबह से शाम तक लंबी लाइन लग रही है, लेकिन कई लोगों निराश लौटना पड़ा रहा है। गैस सिलिंडर न मिलने पर लोगों के घरों पर चूल्हे पर किसी तरह खाना बनाया जा रहा है।
सुशीला गैस एजेंसी पर प्रतिदिन 200 से अधिक उपभोक्ता केवाईसी कराने, मोबाइल नंबर अपडेट कराने और ऑनलाइन बुकिंग चालू कराने के लिए पहुंच रहे हैं। कृष्णा गैस एजेंसी के प्रबंधक ने बताया कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति समय पर नहीं हो पा रही थी और कंपनी स्तर पर लगातार दिक्कत आ रही थी। इसी कारण उपभोक्ताओं के सारे कनेक्शन को एजेंसी सुशीला गैस एजेंसी में मर्ज करने का निर्णय लिया गया। लेकिन ट्रांसफर के बाद तकनीकी समस्याओं के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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वहीं सुशीला गैस एजेंसी के प्रबंधक उमेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि कृष्णा एजेंसी के उपभोक्ताओं का अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। केवाईसी करने में थोड़ी दिक्कत हो रही है। जब तक केवाईसी नहीं होता है, गैस सिलिंडर न तो बुक होगा और न ही डिलिवरी हो पाएगी।
अलीनगर की शाहजहां बानो ने बताया कि एक महीने से गैस सिलिंडर नहीं मिला है और केवाईसी के लिए कई बार चक्कर लगाना पड़ रहा है। लकड़ी खरीद कर खाना बनाना पड़ रहा है।
डोहरिया बाजार के इंद्रजीत शर्मा ने बताया कि एजेंसी बदलने के बाद बुकिंग में समस्या आ रही है। पिछले तीन दिन से 15 किलोमीटर की दूरी तय कर आना पड़ रहा है। अभी तक केवाईसी नहीं हो पाई है। दो दिन बाद बुलाया गया है।
कोनी की नसीमा खातून ने बताया कि परिवार चलाना मुश्किल हो गया है क्योंकि गैस सिलिंडर समय पर नहीं मिल रहा। कनेक्शन ट्रांसफर के बाद केवाईसी की अलग से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
लालडिग्गी मोहल्ले की रहने वाली पूजा भी गैस सिलेंडर लेने पहुंचीं, लेकिन केवाईसी पूरा न होने से वापस लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि घर में खाना बनाने के लिए मजबूरी में ब्लैक में करीब दो हजार रुपये देकर सिलिंडर लेना पड़ रहा है।