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UP: अब Facebook-Instagram की शिकायत भी थाने तक, AI बेस्ड मैट्रिक्स ऐप लॉन्च, पूरे UP में लागू
वाचस्पति पांडेय, गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Tue, 16 Jun 2026 02:15 PM IST
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सार
गोरखपुर में भी इस ऐप का ट्रायल सफल रहा। शिकायतों के निस्तारण का समय कम हुआ और कई जानें बचाने में पुलिस सफल रही। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स समेत अन्य सोशल मीडिया माध्यम का इस्तेमाल लोग व्यवस्था, अपराध, यातायात और स्थानीय समस्याओं से जुड़ी शिकायतों को पोस्ट करने के लिए करते हैं।
सांकेतिक
- फोटो : सांकेतिक
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विस्तार
सोशल मीडिया पर की जाने वाली शिकायतों के शीघ्र निस्तारण और अफवाहों की निगरानी के लिए पुलिस विभाग ने एआई-आधारित इन-हाउस मैट्रिक्स ऐप तैयार किया है। यह ऐप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कानून-व्यवस्था, अपराध, यातायात और अन्य स्थानीय समस्याओं से संबंधित पोस्ट एवं शिकायतों को स्वतः एकत्र कर उन्हें कार्रवाई के लिए संबंधित थानों तक पहुंचाने का काम कर रहा है। ये व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू कर दी गई है।
गोरखपुर में भी इस ऐप का ट्रायल सफल रहा। शिकायतों के निस्तारण का समय कम हुआ और कई जानें बचाने में पुलिस सफल रही। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स समेत अन्य सोशल मीडिया माध्यम का इस्तेमाल लोग व्यवस्था, अपराध, यातायात और स्थानीय समस्याओं से जुड़ी शिकायतों को पोस्ट करने के लिए करते हैं।
ऐप से पहले की व्यवस्था में पुलिस अलग-अलग साइट से इन शिकायतों को तलाशती थी, तब उस पर कार्रवाई होती थी। नया मैट्रिक्स ऐप अब स्वत: शिकायतों को तलाश कर उन्हें एकत्र कर रहा है। इसी के माध्यम से शिकायतें जिला मुख्यालय को भेजी जा रही हैं। वहां शिकायतों का परीक्षण कर उन्हें संबंधित थाना क्षेत्रों को कार्रवाई के लिए भेजा जाता है।
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एसएसपी डॉ. कौस्तुभ का कहना है कि इस व्यवस्था से सोशल मीडिया पर उठाए जाने वाले जनसरोकार के मुद्दों पर त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी। साथ ही ऐसी शिकायतें भी पुलिस की निगरानी में आ जाएंगी जो अब तक औपचारिक रूप से थानों तक नहीं पहुंच पाती थीं।
सूचना देने वाले की भी होगी निगरानी
मैट्रिक्स ऐप केवल शिकायतों के संकलन और निस्तारण तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस विभाग शिकायत पोस्ट करने वाले व्यक्तियों और सूचना देने वालों की गतिविधियों पर भी नजर रखेगा। इससे शिकायतों की सत्यता का आकलन करने, अफवाह फैलाने वाले तत्वों की पहचान करने और संवेदनशील मामलों में समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
पहले मुख्यालय स्तर पर होती थी निगरानी
मीडिया सेल प्रभारी विवेक मिश्रा का कहना है कि पहले सोशल मीडिया पर दी गई शिकायतों के निस्तारण के लिए पुलिस की आठ सदस्यीय टीम की तैनाती की गई थी। अब शिकायतें सीधे जिला मुख्यालय पर भेजी जा रही हैं। इससे कम समय में मामले का निस्तारण होता है।
इन मामलों में ऐप से मिली सूचना पर त्वरित कार्रवाई हुई संभव
केस:1 बेलघाट क्षेत्र की रहने वाली कक्षा 12 की छात्रा का प्रेमी से विवाद हो गया। आहत होकर छात्रा ने गुड बाय इन माय लाइफ लिखते हुए फंदे की तस्वीर इंस्टाग्राम पर पोस्ट की। मैट्रिक्स ऐप द्वारा भेजे गए अलर्ट के आधार पर स्थानीय पुलिस छात्रा के घर पहुंच कर उसे बचाने में सफल रही।
केस 2
गोरखनाथ क्षेत्र में एक युवती ने आत्महत्या का लाइव वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड किया था। मेटा (इंस्टाग्राम) ने डीजीपी मुख्यालय को ईमेल के जरिए अलर्ट भेजा। मुख्यालय से मैट्रिक्स ऐप के जरिए प्राप्त अलर्ट के बाद गोरखनाथ पुलिस समय पर युवती के घर पहुंच गई और उसे बचा लिया।
गोरखपुर में भी इस ऐप का ट्रायल सफल रहा। शिकायतों के निस्तारण का समय कम हुआ और कई जानें बचाने में पुलिस सफल रही। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स समेत अन्य सोशल मीडिया माध्यम का इस्तेमाल लोग व्यवस्था, अपराध, यातायात और स्थानीय समस्याओं से जुड़ी शिकायतों को पोस्ट करने के लिए करते हैं।
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ऐप से पहले की व्यवस्था में पुलिस अलग-अलग साइट से इन शिकायतों को तलाशती थी, तब उस पर कार्रवाई होती थी। नया मैट्रिक्स ऐप अब स्वत: शिकायतों को तलाश कर उन्हें एकत्र कर रहा है। इसी के माध्यम से शिकायतें जिला मुख्यालय को भेजी जा रही हैं। वहां शिकायतों का परीक्षण कर उन्हें संबंधित थाना क्षेत्रों को कार्रवाई के लिए भेजा जाता है।
एसएसपी डॉ. कौस्तुभ का कहना है कि इस व्यवस्था से सोशल मीडिया पर उठाए जाने वाले जनसरोकार के मुद्दों पर त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी। साथ ही ऐसी शिकायतें भी पुलिस की निगरानी में आ जाएंगी जो अब तक औपचारिक रूप से थानों तक नहीं पहुंच पाती थीं।
सूचना देने वाले की भी होगी निगरानी
मैट्रिक्स ऐप केवल शिकायतों के संकलन और निस्तारण तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस विभाग शिकायत पोस्ट करने वाले व्यक्तियों और सूचना देने वालों की गतिविधियों पर भी नजर रखेगा। इससे शिकायतों की सत्यता का आकलन करने, अफवाह फैलाने वाले तत्वों की पहचान करने और संवेदनशील मामलों में समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
पहले मुख्यालय स्तर पर होती थी निगरानी
मीडिया सेल प्रभारी विवेक मिश्रा का कहना है कि पहले सोशल मीडिया पर दी गई शिकायतों के निस्तारण के लिए पुलिस की आठ सदस्यीय टीम की तैनाती की गई थी। अब शिकायतें सीधे जिला मुख्यालय पर भेजी जा रही हैं। इससे कम समय में मामले का निस्तारण होता है।
इन मामलों में ऐप से मिली सूचना पर त्वरित कार्रवाई हुई संभव
केस:1 बेलघाट क्षेत्र की रहने वाली कक्षा 12 की छात्रा का प्रेमी से विवाद हो गया। आहत होकर छात्रा ने गुड बाय इन माय लाइफ लिखते हुए फंदे की तस्वीर इंस्टाग्राम पर पोस्ट की। मैट्रिक्स ऐप द्वारा भेजे गए अलर्ट के आधार पर स्थानीय पुलिस छात्रा के घर पहुंच कर उसे बचाने में सफल रही।
केस 2
गोरखनाथ क्षेत्र में एक युवती ने आत्महत्या का लाइव वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड किया था। मेटा (इंस्टाग्राम) ने डीजीपी मुख्यालय को ईमेल के जरिए अलर्ट भेजा। मुख्यालय से मैट्रिक्स ऐप के जरिए प्राप्त अलर्ट के बाद गोरखनाथ पुलिस समय पर युवती के घर पहुंच गई और उसे बचा लिया।