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Gorakhpur News: बरगदवा में पहले फल बेचता था मनीष, फिर करने लगा असलहा सप्लाई
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प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड: फल बेचने के बाद शुरू किया था ट्रांसपोर्ट का काम
गोरखपुर। चिलुआताल थाना क्षेत्र में प्रॉपर्टी डीलर राजकुमार चौहान की हत्या के मामले में असलहा सप्लाई के आरोप में पकड़ा गया मनीष यादव कभी बरगदवा चौराहे पर फल बेचकर गुजर-बसर करता था। धीरे-धीरे वह अपराध की दुनिया में चला गया और असलहा सप्लायर बन गया।
ग्रामीणों के अनुसार, मनीष यादव और उसके पिता सदानंद यादव दो साल पहले तक बरगदवा चौराहे पर फल की दुकान लगाते थे। सड़क चौड़ीकरण के दौरान दुकान हट गई और यहीं से परिवार की आर्थिक रीढ़ टूट गई। इसके बाद परिवार ने ट्रांसपोर्ट का रास्ता चुना। पहले एक टीपर खरीदा, जिसे मनीष खुद चलाने लगा। फिर फाइनेंस पर दूसरा वाहन लिया, जिसे उसके पिता चलाने लगे। इसी दौरान मनीष के संपर्क तेजी से बढ़े और यही उसे अपराध की दुनिया के करीब ले गए।
जांच में सामने आया है कि मनीष की नजदीकी कैंट क्षेत्र के सिंघड़िया निवासी शशांक पांडेय से हुई। शशांक पहले अंबाला जेल में बंद था, जहां उसकी मुलाकात विक्की लाला से हुई, जो कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सक्रिय गुर्गा बताया जाता है। जेल से बाहर आने के बाद शशांक इस गैंग में शामिल हो गया और उसके जरिये मनीष भी इस नेटवर्क से जुड़ गया।
बताया जा रहा है कि मनीष इंदौर (मध्य प्रदेश) में रहकर गैंग के लिए असलहा सप्लाई करने लगा था। 10 मई 2024 को अंबाला और गोरखपुर एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार किया था। उस समय भी उस पर गैंग को हथियार मुहैया कराने का आरोप लगा था। हालांकि बाद में उसे जमानत मिल गई।
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, मनीष के तार चर्चित सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से जुड़े होने की बात भी जांच में सामने आई है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। राजकुमार हत्याकांड के बाद मनीष भाग गया था और एक रिश्तेदार के घर छिपा हुआ था। पुलिस ने लगातार दबिश के बाद उसे पकड़ लिया। परिजनों का कहना है कि पुलिस उसे बृहस्पतिवार को रिश्तेदार के घर से उठाकर ले गई। मनीष यादव जेल भेजे गए हत्यारोपी राज चौहान और विपिन यादव के संपर्क में था। इसका पर्दाफाश कॉल डिटेल के जरिये हुआ था।
वहीं, कॉलोनी के लोगों का कहना है कि मनीष और उसके पिता का व्यवहार सामान्य और शांत रहा है। किसी को अंदाजा नहीं था कि वह इतने बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं।
अब तक मामले में एक नाबालिग समेत 10 आरोपियों को जेल भिजवाया जा चुका है। अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।
- ज्ञानेंद्र कुमार, एसपी नार्थ
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पिता ने बेटे को बताया निर्दोष
मनीष यादव के पिता सदानंद यादव ने बेटे पर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनका परिवार मेहनत-मजदूरी कर ईमानदारी से जीवन-यापन करता आया है। हम लोग पहले फल बेचते थे। दुकान हटने के बाद मजबूरी में गाड़ी लेकर काम शुरू किया। बेटा किसी गलत काम में शामिल नहीं है। सदानंद यादव के मुताबिक, जिस दिन की घटना बताई जा रही है, उस दिन मनीष एक ब्रह्मभोज में गया हुआ था। वहीं से पुलिस उसे उठा ले गई। उसे फंसाया जा रहा है। यह भी बताया कि पुलिस कुछ दिन पहले घर आई थी और जांच-पड़ताल कर लौट गई। अगर वह आरोपी होता तो उसी समय कार्रवाई हो जाती। हमारे घर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, सच्चाई सामने आ जाएगी।
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हत्याकांड के बाद रिश्तेदार के घर छिपा था आरोपी
परिजनों के मुताबिक, मनीष अपने एक रिश्तेदार के घर गया था। पुलिस की टीम बीते बृहस्पतिवार को उसे रिश्तेदार के घर से उठाकर ले गई थी। इसके बाद पुलिस की ओर से जेल भेजे जाने की जानकारी मिली। वहीं, कॉलोनी के लोगों का कहना है कि मनीष और उसके पिता का व्यवहार हमेशा से सामान्य और विनम्र रहा है। उन्हें कभी किसी बड़े विवाद में शामिल नहीं देखा गया।
गोरखपुर। चिलुआताल थाना क्षेत्र में प्रॉपर्टी डीलर राजकुमार चौहान की हत्या के मामले में असलहा सप्लाई के आरोप में पकड़ा गया मनीष यादव कभी बरगदवा चौराहे पर फल बेचकर गुजर-बसर करता था। धीरे-धीरे वह अपराध की दुनिया में चला गया और असलहा सप्लायर बन गया।
ग्रामीणों के अनुसार, मनीष यादव और उसके पिता सदानंद यादव दो साल पहले तक बरगदवा चौराहे पर फल की दुकान लगाते थे। सड़क चौड़ीकरण के दौरान दुकान हट गई और यहीं से परिवार की आर्थिक रीढ़ टूट गई। इसके बाद परिवार ने ट्रांसपोर्ट का रास्ता चुना। पहले एक टीपर खरीदा, जिसे मनीष खुद चलाने लगा। फिर फाइनेंस पर दूसरा वाहन लिया, जिसे उसके पिता चलाने लगे। इसी दौरान मनीष के संपर्क तेजी से बढ़े और यही उसे अपराध की दुनिया के करीब ले गए।
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जांच में सामने आया है कि मनीष की नजदीकी कैंट क्षेत्र के सिंघड़िया निवासी शशांक पांडेय से हुई। शशांक पहले अंबाला जेल में बंद था, जहां उसकी मुलाकात विक्की लाला से हुई, जो कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सक्रिय गुर्गा बताया जाता है। जेल से बाहर आने के बाद शशांक इस गैंग में शामिल हो गया और उसके जरिये मनीष भी इस नेटवर्क से जुड़ गया।
बताया जा रहा है कि मनीष इंदौर (मध्य प्रदेश) में रहकर गैंग के लिए असलहा सप्लाई करने लगा था। 10 मई 2024 को अंबाला और गोरखपुर एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार किया था। उस समय भी उस पर गैंग को हथियार मुहैया कराने का आरोप लगा था। हालांकि बाद में उसे जमानत मिल गई।
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, मनीष के तार चर्चित सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से जुड़े होने की बात भी जांच में सामने आई है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। राजकुमार हत्याकांड के बाद मनीष भाग गया था और एक रिश्तेदार के घर छिपा हुआ था। पुलिस ने लगातार दबिश के बाद उसे पकड़ लिया। परिजनों का कहना है कि पुलिस उसे बृहस्पतिवार को रिश्तेदार के घर से उठाकर ले गई। मनीष यादव जेल भेजे गए हत्यारोपी राज चौहान और विपिन यादव के संपर्क में था। इसका पर्दाफाश कॉल डिटेल के जरिये हुआ था।
वहीं, कॉलोनी के लोगों का कहना है कि मनीष और उसके पिता का व्यवहार सामान्य और शांत रहा है। किसी को अंदाजा नहीं था कि वह इतने बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं।
अब तक मामले में एक नाबालिग समेत 10 आरोपियों को जेल भिजवाया जा चुका है। अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।
- ज्ञानेंद्र कुमार, एसपी नार्थ
पिता ने बेटे को बताया निर्दोष
मनीष यादव के पिता सदानंद यादव ने बेटे पर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनका परिवार मेहनत-मजदूरी कर ईमानदारी से जीवन-यापन करता आया है। हम लोग पहले फल बेचते थे। दुकान हटने के बाद मजबूरी में गाड़ी लेकर काम शुरू किया। बेटा किसी गलत काम में शामिल नहीं है। सदानंद यादव के मुताबिक, जिस दिन की घटना बताई जा रही है, उस दिन मनीष एक ब्रह्मभोज में गया हुआ था। वहीं से पुलिस उसे उठा ले गई। उसे फंसाया जा रहा है। यह भी बताया कि पुलिस कुछ दिन पहले घर आई थी और जांच-पड़ताल कर लौट गई। अगर वह आरोपी होता तो उसी समय कार्रवाई हो जाती। हमारे घर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, सच्चाई सामने आ जाएगी।
हत्याकांड के बाद रिश्तेदार के घर छिपा था आरोपी
परिजनों के मुताबिक, मनीष अपने एक रिश्तेदार के घर गया था। पुलिस की टीम बीते बृहस्पतिवार को उसे रिश्तेदार के घर से उठाकर ले गई थी। इसके बाद पुलिस की ओर से जेल भेजे जाने की जानकारी मिली। वहीं, कॉलोनी के लोगों का कहना है कि मनीष और उसके पिता का व्यवहार हमेशा से सामान्य और विनम्र रहा है। उन्हें कभी किसी बड़े विवाद में शामिल नहीं देखा गया।