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Gorakhpur News: मरम्मत के अभाव में बदहाल हुई रेलवे की कृष्णानगर कॉलोनी
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गोरखपुर। रेलवे की कृष्णानगर कॉलोनी में रहने वाले रेलकर्मियों ने आवासों की खराब स्थिति और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वे मूल वेतन का लगभग 18 प्रतिशत किराया देते हैं। कई कर्मचारी हर महीने 10 से 12 हजार रुपये तक किराया जमा कर रहे हैं लेकिन आवासों की रंगाई-पुताई व मरम्मत तक नहीं हो रही है।
कॉलोनी में करीब 200 रेलवे आवास हैं, जिनमें टाइप-1 और टाइप स्पेशल शामिल हैं। मरम्मत नहीं होने के कारण आधे से अधिक आवास खाली पड़े हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जर्जर भवनों, टूटते प्लास्टर और खराब सुविधाओं के कारण कई रेलकर्मियों ने मकान छोड़ दिए हैं। तीन वर्ष पहले आवासों में टाइल्स लगाने की स्वीकृति मिलने के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका।
कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार लगातार टेंडर ले रहा है लेकिन जमीन पर काम दिखाई नहीं देता। बारिश के दौरान नालियां भर जाती हैं और सेफ्टी टैंक चोक होने से गंदगी फैलती है। कॉलोनी के पार्क की भी हालत खराब है। यहां नियमित सफाई नहीं होती, बैठने के लिए लगी बेंच टूट चुकी हैं और शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है। कार्यक्रमों के दौरान महिलाओं सहित लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। रेलवे ने हाउस टैक्स बढ़ा दिया है लेकिन सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ।
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उनका कहना है कि कर्मचारियों को सुरक्षित और बेहतर आवास उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है। वर्ष 1980 में बनी इस कॉलोनी का अपना गौरवशाली इतिहास भी रहा है। अंतरराष्ट्रीय पहलवान एवं रेलवे से जुड़े जनार्दन सिंह इसी कॉलोनी में रहते थे। उनका अखाड़ा भी यहीं था, जहां पहलवान दांव-पेच सीखते थे। रेलकर्मी रामाश्रय पहलवान भी इसी कॉलोनी से जुड़े रहे।
इस संबंध में रेलवे के सीपीआरओ सुमित कुमार ने कहा कि कृष्णानगर कॉलोनी से जुड़ी समस्याओं का परीक्षण कर उनका निस्तारण कराया जाएगा।
रेलकर्मी बोले--
कोट-
वर्षों से मकानों की मरम्मत नहीं हुई है। दीवारों का प्लास्टर टूट रहा है और बारिश में नालियां भर जाने से गंदगी फैल जाती है। हर महीने किराया कटने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। पार्क की हालत भी खराब है, जिससे बच्चों और महिलाओं को परेशानी होती है।
- लक्ष्मी रावत (रेलकर्मी परिवार)
कोट-
कॉलोनी के पार्क में बैठने की व्यवस्था नहीं है। बेंच टूट चुकी हैं। शौचालय न होने से कार्यक्रमों के दौरान सबसे अधिक दिक्कत महिलाओं को होती है। बारिश में सेफ्टी टैंक चोक हो जाते हैं व दुर्गंध फैलती है। किराया तो लिया जा रहा है लेकिन सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
- सुनीता त्रिपाठी (रेलकर्मी परिवार)
कोट-
मूल वेतन का 18 प्रतिशत तक किराया देते हैं, फिर भी आवासों की रंगाई-पुताई और मरम्मत वर्षों से नहीं हुई। तीन साल पहले टाइल्स लगाने की स्वीकृति मिली थी लेकिन आज तक काम पूरा नहीं हुआ। जर्जर मकानों के कारण कई कर्मचारी कॉलोनी छोड़ चुके हैं।
- चंदन सिंह, रेलकर्मी
कोट-
कृष्णानगर कॉलोनी कभी रेलवे की अच्छी कॉलोनियों में गिनी जाती थी लेकिन अब अधिकांश भवन मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुके हैं। कई मकान खाली पड़े हैं, क्योंकि उनमें रहना सुरक्षित नहीं लगता। कॉलोनी की नालियां, सड़कें और पार्क सभी उपेक्षा का शिकार हैं।
- बृजपाल सिंह, रेलकर्मी
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कॉलोनी में करीब 200 रेलवे आवास हैं, जिनमें टाइप-1 और टाइप स्पेशल शामिल हैं। मरम्मत नहीं होने के कारण आधे से अधिक आवास खाली पड़े हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जर्जर भवनों, टूटते प्लास्टर और खराब सुविधाओं के कारण कई रेलकर्मियों ने मकान छोड़ दिए हैं। तीन वर्ष पहले आवासों में टाइल्स लगाने की स्वीकृति मिलने के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका।
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कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार लगातार टेंडर ले रहा है लेकिन जमीन पर काम दिखाई नहीं देता। बारिश के दौरान नालियां भर जाती हैं और सेफ्टी टैंक चोक होने से गंदगी फैलती है। कॉलोनी के पार्क की भी हालत खराब है। यहां नियमित सफाई नहीं होती, बैठने के लिए लगी बेंच टूट चुकी हैं और शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है। कार्यक्रमों के दौरान महिलाओं सहित लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। रेलवे ने हाउस टैक्स बढ़ा दिया है लेकिन सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ।
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उनका कहना है कि कर्मचारियों को सुरक्षित और बेहतर आवास उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है। वर्ष 1980 में बनी इस कॉलोनी का अपना गौरवशाली इतिहास भी रहा है। अंतरराष्ट्रीय पहलवान एवं रेलवे से जुड़े जनार्दन सिंह इसी कॉलोनी में रहते थे। उनका अखाड़ा भी यहीं था, जहां पहलवान दांव-पेच सीखते थे। रेलकर्मी रामाश्रय पहलवान भी इसी कॉलोनी से जुड़े रहे।
इस संबंध में रेलवे के सीपीआरओ सुमित कुमार ने कहा कि कृष्णानगर कॉलोनी से जुड़ी समस्याओं का परीक्षण कर उनका निस्तारण कराया जाएगा।
रेलकर्मी बोले
कोट-
वर्षों से मकानों की मरम्मत नहीं हुई है। दीवारों का प्लास्टर टूट रहा है और बारिश में नालियां भर जाने से गंदगी फैल जाती है। हर महीने किराया कटने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। पार्क की हालत भी खराब है, जिससे बच्चों और महिलाओं को परेशानी होती है।
- लक्ष्मी रावत (रेलकर्मी परिवार)
कोट-
कॉलोनी के पार्क में बैठने की व्यवस्था नहीं है। बेंच टूट चुकी हैं। शौचालय न होने से कार्यक्रमों के दौरान सबसे अधिक दिक्कत महिलाओं को होती है। बारिश में सेफ्टी टैंक चोक हो जाते हैं व दुर्गंध फैलती है। किराया तो लिया जा रहा है लेकिन सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
- सुनीता त्रिपाठी (रेलकर्मी परिवार)
कोट-
मूल वेतन का 18 प्रतिशत तक किराया देते हैं, फिर भी आवासों की रंगाई-पुताई और मरम्मत वर्षों से नहीं हुई। तीन साल पहले टाइल्स लगाने की स्वीकृति मिली थी लेकिन आज तक काम पूरा नहीं हुआ। जर्जर मकानों के कारण कई कर्मचारी कॉलोनी छोड़ चुके हैं।
- चंदन सिंह, रेलकर्मी
कोट-
कृष्णानगर कॉलोनी कभी रेलवे की अच्छी कॉलोनियों में गिनी जाती थी लेकिन अब अधिकांश भवन मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुके हैं। कई मकान खाली पड़े हैं, क्योंकि उनमें रहना सुरक्षित नहीं लगता। कॉलोनी की नालियां, सड़कें और पार्क सभी उपेक्षा का शिकार हैं।
- बृजपाल सिंह, रेलकर्मी