{"_id":"69d817561b601a41c80122fa","slug":"the-health-of-workers-in-jaunpurs-bidi-industry-is-at-risk-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1284248-2026-04-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"शोध : बिना तंबाकू सेवन के बीमार पड़ रहे बीड़ी मजदूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शोध : बिना तंबाकू सेवन के बीमार पड़ रहे बीड़ी मजदूर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 10 Apr 2026 02:47 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर। जौनपुर में बिना तंबाकू सेवन के बीड़ी मजदूरों के बीमार होने का मामला सामने आया है। एम्स गोरखपुर के शोध में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि बीड़ी निर्माण से जुड़े मजदूर भले ही तंबाकू का सेवन न करते हों, फिर भी उसके संपर्क में रहने की वजह से कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मजदूरों में निकोटीन का लेवल बढ़ने से दिल और फेफड़े कमजोर हो रहे हैं।
एम्स को जौनपुर में रिसर्च की जिम्मेदारी मिली थी। बताया जा रहा है रिसर्च पिछले ढाई साल से चल रहा है। अब यह पूरा होने को है। रिसर्च में अब तक मिले आंकड़े बेहद खतरनाक स्थिति का इशारा कर रहे हैं। दरअसल, एम्स की टीम ने जौनपुर में ऐसे मजदूरों के सेहत को लेकर रिसर्च किया जो बीड़ी बनाने का काम करते हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं।
इनमें ज्यादातर महिलाएं बीड़ी या तंबाकू का सेवन नहीं करतीं। पुरुषों में भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे रहे जो बीड़ी का सेवन नहीं करते। वह अपने दैनिक गुजारा भत्ता के लिए बीड़ी बनाने के रोजगार से जुड़े हुए हैं फिर भी वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
खून में मानक से अधिक मिला निकोटिन का लेवल
शोध करने वाली डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व कर रहे एम्स के डॉ. यू वेंकटेश ने बताया कि तंबाकू का संपर्क हड्डियों को कमजोर कर रहा है। जौनपुर में 10000 से अधिक परिवार इस धंधे से जुड़े हैं। 300 लोगों पर रिसर्च किया गया। इनमें 150 लोग ऐसे थे जो तंबाकू उद्योग से नहीं जुड़े थे। इन दोनों वर्गों की सेहत का मूल्यांकन किया गया। बीड़ी निर्माण से जुड़े ज्यादातर मजदूरों की हड्डियां कमजोर मिलीं। उनके खून में निकोटिन का लेवल मानक से चार गुना तक अधिक मिला है। यह बेहद खतरनाक है। निकोटीन का लेवल बढ़ने से मजदूरों के दिल और फेफड़े प्रभावित हो रहे हैं। मजदूरों में मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर मिला। इसमें शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। जोड़ों में दर्द रहता है। गठिया तक हो जाता है। मजदूरों में सांस की बीमारियां भी मिलीं। त्वचा पर दाने, लालिमा, खुजली के साथ एलर्जी की अन्य गंभीर बीमारियां भी मिली हैं।
Trending Videos
एम्स को जौनपुर में रिसर्च की जिम्मेदारी मिली थी। बताया जा रहा है रिसर्च पिछले ढाई साल से चल रहा है। अब यह पूरा होने को है। रिसर्च में अब तक मिले आंकड़े बेहद खतरनाक स्थिति का इशारा कर रहे हैं। दरअसल, एम्स की टीम ने जौनपुर में ऐसे मजदूरों के सेहत को लेकर रिसर्च किया जो बीड़ी बनाने का काम करते हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इनमें ज्यादातर महिलाएं बीड़ी या तंबाकू का सेवन नहीं करतीं। पुरुषों में भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे रहे जो बीड़ी का सेवन नहीं करते। वह अपने दैनिक गुजारा भत्ता के लिए बीड़ी बनाने के रोजगार से जुड़े हुए हैं फिर भी वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
खून में मानक से अधिक मिला निकोटिन का लेवल
शोध करने वाली डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व कर रहे एम्स के डॉ. यू वेंकटेश ने बताया कि तंबाकू का संपर्क हड्डियों को कमजोर कर रहा है। जौनपुर में 10000 से अधिक परिवार इस धंधे से जुड़े हैं। 300 लोगों पर रिसर्च किया गया। इनमें 150 लोग ऐसे थे जो तंबाकू उद्योग से नहीं जुड़े थे। इन दोनों वर्गों की सेहत का मूल्यांकन किया गया। बीड़ी निर्माण से जुड़े ज्यादातर मजदूरों की हड्डियां कमजोर मिलीं। उनके खून में निकोटिन का लेवल मानक से चार गुना तक अधिक मिला है। यह बेहद खतरनाक है। निकोटीन का लेवल बढ़ने से मजदूरों के दिल और फेफड़े प्रभावित हो रहे हैं। मजदूरों में मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर मिला। इसमें शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। जोड़ों में दर्द रहता है। गठिया तक हो जाता है। मजदूरों में सांस की बीमारियां भी मिलीं। त्वचा पर दाने, लालिमा, खुजली के साथ एलर्जी की अन्य गंभीर बीमारियां भी मिली हैं।