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एमएमएमयूटी : बदलते दौर में नए कलेवर में दिखेगा सिविल इंजीनियरिंग विभाग
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गोरखपुर। बदलते दौर में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का सिविल इंजीनियरिंग विभाग नए विजन और मिशन पर काम करेगा। इसके लिए विद्या परिषद से मंजूरी मिल गई है। इसका लाभ प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से छात्राें के साथ ही समाज को भी मिलेगा।
सिविल विभाग इंजीनियरिंग के कोर विषय के रूप में प्रतिष्ठित है। समय बदलने के साथ इसे लेकर रुचि में कमी आई है। इस बीच दुनियाभर में सिविल इंजीनियरिंग को बदले कलेवर के साथ प्रस्तुत किए जाने को लेकर कवायद की जा रही है। एमएमएमयूटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने अपना विजन और मिशन बनाया था। समय के अनुरूप परिवर्तन को लेकर नया फ्रेमवर्क तैयार किया गया था।
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष विद्या परिषद के एजेंडे में भी इसे शामिल किया गया था लेकिन कुछ बिंदुओं के संशोधन के दिशा-निर्देशों के साथ वापस कर दिया गया था। इस बार 21 फरवरी को आयोजित विद्या परिषद की बैठक में नए प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। इसक तहत भविष्य में पठन-पाठन की व्यवस्था में बदलाव तो दिखेगा ही समाज को सिविल इंजीनियरिंग का लाभ देने के लिए भी उपाय किए जाएंगे।
इस संबंध में कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि सिविल इंजीनियरिंग के विजन और मिशन के नए प्रारूप को विद्या परिषद ने मंजूरी दे दी है। समाज को प्रत्यक्ष रूप से लाभ कैसे मिले, इस पर काम किया जाएगा। छात्रों को भी इसका लाभ मिलेगा।
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सिविल विभाग इंजीनियरिंग के कोर विषय के रूप में प्रतिष्ठित है। समय बदलने के साथ इसे लेकर रुचि में कमी आई है। इस बीच दुनियाभर में सिविल इंजीनियरिंग को बदले कलेवर के साथ प्रस्तुत किए जाने को लेकर कवायद की जा रही है। एमएमएमयूटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने अपना विजन और मिशन बनाया था। समय के अनुरूप परिवर्तन को लेकर नया फ्रेमवर्क तैयार किया गया था।
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बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष विद्या परिषद के एजेंडे में भी इसे शामिल किया गया था लेकिन कुछ बिंदुओं के संशोधन के दिशा-निर्देशों के साथ वापस कर दिया गया था। इस बार 21 फरवरी को आयोजित विद्या परिषद की बैठक में नए प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। इसक तहत भविष्य में पठन-पाठन की व्यवस्था में बदलाव तो दिखेगा ही समाज को सिविल इंजीनियरिंग का लाभ देने के लिए भी उपाय किए जाएंगे।
इस संबंध में कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि सिविल इंजीनियरिंग के विजन और मिशन के नए प्रारूप को विद्या परिषद ने मंजूरी दे दी है। समाज को प्रत्यक्ष रूप से लाभ कैसे मिले, इस पर काम किया जाएगा। छात्रों को भी इसका लाभ मिलेगा।
