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बीआरडी : फिर सक्रिय हुए मरीज माफिया, इमरजेंसी के पास घूम रहे बिचौलिए
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गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीज माफिया एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। निजी अस्पतालों के बिचौलिए इमरजेंसी के आसपास घूमकर मरीज के तीमारदारों को बहकाते हैं और तैयार होने पर एंबुलेंस को बुला लेते हैं। हाल ही में दो एंबुलेंस भी सीज की गई हैं।
दरअसल, मरीज माफिया तीमारदारों को अच्छे डॉक्टर व इलाज का हवाला देकर बहकाते हैं। सूत्रों ने बताया कि अब वे एंबुलेंस को लेकर अस्पताल के आसपास नहीं घूमते। एंबुलेंस थोड़ी दूरी पर खड़ी रहती है और जगह-जगह बिचौलिए घूमते रहते हैं। अस्पताल के अंदर भी माफिया से जुड़े लोग हैं जो मरीज के आते ही सूचना दे देते हैं। गंभीर स्थिति में आने वाले मरीज को कहते हैं कि यहां पर इसकी तत्काल इलाज की व्यवस्था नहीं है। इसे दूसरे अस्पताल में ले जाएं वरना जान चली जाएगी।
यह सुनकर तीमारदार तनाव में आ जाते हैं। इसके बाद वहीं पर बिचौलिए घूमते हैं जो किसी निजी अस्पताल के बारे में जानकारी देते हैं। तीमारदार के तैयार होते ही पांच मिनट के अंदर एंबुलेंस आ जाती है और मरीज को लेकर चले जाते हैं। इसमें अस्पताल के कर्मचारी सहित सभी लोगों का कमीशन जुड़ा रहता है। मंगलवार को परिसर में कई जगह निजी एंबुलेंस घूमती नजर आईं। इमरजेंसी के पास कोई मरीज आता तो कुछ लोग उनसे बीमारी पूछते।
अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि इस तरह के लोग अक्सर आसपास घूमते रहते हैं। सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि हाल ही में दो संदिग्ध एंबलुेंस सीज की गई हैं। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
दो एंबुलेंस हो चुकी हैं सीज
शनिवार को कॉलेज परिसर से एक मरीज को लेकर जाने की तैयारी कर रही एक एंबुलेंस को सीज किया गया था। बिहार की 14 वर्षीय किशोरी को गंभीर हालत में भर्ती करने के लिए लाया गया था। भर्ती किए बिना ही मरीज माफिया परिजनों को निजी अस्पताल ले जाने के लिए बहलाने-फुसलाने लगे। संदिग्ध गतिविधि देखकर मेडिकल कॉलेज के गार्डों ने तुरंत मेडिकल चौकी पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए श्री वेदना मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल नामक पंजीकृत एंबुलेंस को सीज कर दिया था। इसी तरह पिछले बृहस्पतिवार को भी एक और मामला सामने आया था। बिहार के गोपालगंज जिले के किशुनपुरा की निप्पू कुमारी गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती थीं। आरोप है कि चिलुआताल क्षेत्र के एक निजी अस्पताल से जुड़ी एंबुलेंस मरीज को अपने अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रही थी, जिसे गार्डों ने पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया था। मामला संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस ने एंबुलेंस को सीज कर दिया था।
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दरअसल, मरीज माफिया तीमारदारों को अच्छे डॉक्टर व इलाज का हवाला देकर बहकाते हैं। सूत्रों ने बताया कि अब वे एंबुलेंस को लेकर अस्पताल के आसपास नहीं घूमते। एंबुलेंस थोड़ी दूरी पर खड़ी रहती है और जगह-जगह बिचौलिए घूमते रहते हैं। अस्पताल के अंदर भी माफिया से जुड़े लोग हैं जो मरीज के आते ही सूचना दे देते हैं। गंभीर स्थिति में आने वाले मरीज को कहते हैं कि यहां पर इसकी तत्काल इलाज की व्यवस्था नहीं है। इसे दूसरे अस्पताल में ले जाएं वरना जान चली जाएगी।
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यह सुनकर तीमारदार तनाव में आ जाते हैं। इसके बाद वहीं पर बिचौलिए घूमते हैं जो किसी निजी अस्पताल के बारे में जानकारी देते हैं। तीमारदार के तैयार होते ही पांच मिनट के अंदर एंबुलेंस आ जाती है और मरीज को लेकर चले जाते हैं। इसमें अस्पताल के कर्मचारी सहित सभी लोगों का कमीशन जुड़ा रहता है। मंगलवार को परिसर में कई जगह निजी एंबुलेंस घूमती नजर आईं। इमरजेंसी के पास कोई मरीज आता तो कुछ लोग उनसे बीमारी पूछते।
अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि इस तरह के लोग अक्सर आसपास घूमते रहते हैं। सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि हाल ही में दो संदिग्ध एंबलुेंस सीज की गई हैं। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
दो एंबुलेंस हो चुकी हैं सीज
शनिवार को कॉलेज परिसर से एक मरीज को लेकर जाने की तैयारी कर रही एक एंबुलेंस को सीज किया गया था। बिहार की 14 वर्षीय किशोरी को गंभीर हालत में भर्ती करने के लिए लाया गया था। भर्ती किए बिना ही मरीज माफिया परिजनों को निजी अस्पताल ले जाने के लिए बहलाने-फुसलाने लगे। संदिग्ध गतिविधि देखकर मेडिकल कॉलेज के गार्डों ने तुरंत मेडिकल चौकी पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए श्री वेदना मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल नामक पंजीकृत एंबुलेंस को सीज कर दिया था। इसी तरह पिछले बृहस्पतिवार को भी एक और मामला सामने आया था। बिहार के गोपालगंज जिले के किशुनपुरा की निप्पू कुमारी गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती थीं। आरोप है कि चिलुआताल क्षेत्र के एक निजी अस्पताल से जुड़ी एंबुलेंस मरीज को अपने अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रही थी, जिसे गार्डों ने पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया था। मामला संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस ने एंबुलेंस को सीज कर दिया था।