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Gorakhpur News: अटेंडेंस रजिस्टर गुम हो गया... यह कैसे संभव
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 31 Mar 2026 02:59 AM IST
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गोरखपुर। ऋषिकेश एम्स की टीम के सामने गोरखपुर एम्स के 12 डॉक्टरों के बयान दर्ज कराए गए। टीम ने सीधे सवाल करते हुए गोरखपुर से गए दो डॉक्टरों से पूछा कि अटेंडेंस रजिस्टर की जिम्मेदारी आप दोनों संभालते थे, ऐसे में यह कैसे गायब हो गया। इसकी जानकारी आपको नहीं है, यह कैसे संभव है?
डॉक्टरों ने तत्कालीन ईडी डॉ. सुरेखा किशोर के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें उन्होंने सभी रजिस्टर प्रशासनिक कार्यालय में एक साथ रखने का निर्देश दिया था। इसके बाद मामला फिर अटेंडेंस रजिस्टर पर टिक गया। दो दिनों में टीम ने डॉक्टरों से अलग-अलग बयान लिए। इसी बयान के आधार पर ऋषिकेश आगे की कार्रवाई या कार्रवाई की संस्तुति स्वास्थ्य मंत्रालय को कर सकती है।
दरअसल, एम्स गोरखपुर के 12 डॉक्टर पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर के खिलाफ चल रही जांच में बयान दर्ज कराने के लिए ऋषिकेश गए थे। तत्कालीन ईडी पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटों को एम्स में नौकरी दिलाई और घर बैठे वेतन दिया। वर्ष 2021 में उनके बेटे डॉ. शिखर किशोर वर्मा और डॉ. शिवल किशोर वर्मा को नॉन-एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट पद पर नियुक्त किया गया। एक मार्च 2021 को जारी सूची में डॉ. शिखर किशोर वर्मा का नाम पहले स्थान पर था। 12 जुलाई 2021 को जारी अंतिम सूची में डॉ. शिवल किशोर वर्मा का नाम पहले स्थान पर था। दोनों को लगभग 70-70 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था। आरोप है कि दोनों नियमित रूप से एम्स नहीं आए और कार्यकारी निदेशक के आवास पर ही रहते थे।
एम्स के प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि उनकी उपस्थिति फर्जी रजिस्टर में दर्ज की जाती थी। मामले की गोपनीय शिकायत रजिस्टर की फोटोकॉपी के आधार पर विजिलेंस में दर्ज की गई थी। जांच के बाद डॉ. सुरेखा किशोर पर कार्रवाई की गई और उन्हें पद से हटा दिया गया।
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डॉक्टरों ने तत्कालीन ईडी डॉ. सुरेखा किशोर के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें उन्होंने सभी रजिस्टर प्रशासनिक कार्यालय में एक साथ रखने का निर्देश दिया था। इसके बाद मामला फिर अटेंडेंस रजिस्टर पर टिक गया। दो दिनों में टीम ने डॉक्टरों से अलग-अलग बयान लिए। इसी बयान के आधार पर ऋषिकेश आगे की कार्रवाई या कार्रवाई की संस्तुति स्वास्थ्य मंत्रालय को कर सकती है।
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दरअसल, एम्स गोरखपुर के 12 डॉक्टर पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर के खिलाफ चल रही जांच में बयान दर्ज कराने के लिए ऋषिकेश गए थे। तत्कालीन ईडी पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटों को एम्स में नौकरी दिलाई और घर बैठे वेतन दिया। वर्ष 2021 में उनके बेटे डॉ. शिखर किशोर वर्मा और डॉ. शिवल किशोर वर्मा को नॉन-एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट पद पर नियुक्त किया गया। एक मार्च 2021 को जारी सूची में डॉ. शिखर किशोर वर्मा का नाम पहले स्थान पर था। 12 जुलाई 2021 को जारी अंतिम सूची में डॉ. शिवल किशोर वर्मा का नाम पहले स्थान पर था। दोनों को लगभग 70-70 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था। आरोप है कि दोनों नियमित रूप से एम्स नहीं आए और कार्यकारी निदेशक के आवास पर ही रहते थे।
एम्स के प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि उनकी उपस्थिति फर्जी रजिस्टर में दर्ज की जाती थी। मामले की गोपनीय शिकायत रजिस्टर की फोटोकॉपी के आधार पर विजिलेंस में दर्ज की गई थी। जांच के बाद डॉ. सुरेखा किशोर पर कार्रवाई की गई और उन्हें पद से हटा दिया गया।