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Gorakhpur News: सोमवती अमावस्या आज, स्नान-दान और पीपल पूजन का विशेष महत्व
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गोरखपुर। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या, सोमवती अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सोमवार और अमावस्या का संयोग अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस बार अधिक ज्येष्ठ अमावस्या सोमवार को प्रात: 8:45 बजे तक रहेगी, जिसके कारण श्रद्धालु सुबह स्नान, दान और पूजन कर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे। वहीं महिलाएं पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना करेंगी।
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर पीपल (अश्वत्थ) वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि पीपल में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। अमावस्या पितरों की तिथि होने के कारण इस दिन पीपल पूजन से देवताओं और पितरों दोनों की कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धालु पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा कर भगवान विष्णु का पूजन करते हैं तथा कच्चा सूत लपेटकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
आचार्य ऋषि मुनि दीक्षित ने बताया कि शास्त्रों में सोमवती अमावस्या को स्नान-दान का महापर्व बताया गया है। इस दिन स्नान और दान करने से पापों का क्षय होता है तथा संतान सुख, सौभाग्य और धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है। तीन पवित्र तत्वों का मेल अधिक मास अमावस्या तिथि अमावस्या और सोमवार है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए जब तक दान व्रत और पूजा का फल सामान्य दिनों के अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इस दिन मंदिरों में पूजा-अर्चना और घाटों पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की की मौजूदगी रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु शिव और पितृ देवों की आराधना करने से विशेष आध्यात्मिक व धार्मिक फल प्राप्त होता है।
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पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर पीपल (अश्वत्थ) वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि पीपल में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। अमावस्या पितरों की तिथि होने के कारण इस दिन पीपल पूजन से देवताओं और पितरों दोनों की कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धालु पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा कर भगवान विष्णु का पूजन करते हैं तथा कच्चा सूत लपेटकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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आचार्य ऋषि मुनि दीक्षित ने बताया कि शास्त्रों में सोमवती अमावस्या को स्नान-दान का महापर्व बताया गया है। इस दिन स्नान और दान करने से पापों का क्षय होता है तथा संतान सुख, सौभाग्य और धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है। तीन पवित्र तत्वों का मेल अधिक मास अमावस्या तिथि अमावस्या और सोमवार है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए जब तक दान व्रत और पूजा का फल सामान्य दिनों के अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इस दिन मंदिरों में पूजा-अर्चना और घाटों पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की की मौजूदगी रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु शिव और पितृ देवों की आराधना करने से विशेष आध्यात्मिक व धार्मिक फल प्राप्त होता है।