गोरखनाथ मंदिर में बोले स्वामी वासुदेवाचार्य: ‘ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ व महंत अवेद्यनाथ के संकल्पों को पूरा कर रहे योगी’

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 18 Sep 2021 09:46 AM IST
साप्ताहिक पुण्यतिथि समारोह में शामिल सीएम योगी व कथाव्यास स्वामी वासुदेवाचार्य।
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युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ के सभी संकल्पों को पूरा करने का कार्य योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। शासन सही ढंग से वही कर सकता है जो योगी होता है। यह बातें गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के 52वीं एवं राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ की सातवीं पुण्यतिथि पर साप्ताहिक पुण्यतिथि समारोह के अंतर्गत भगवान ‘श्रीराम एवं श्रीकृष्ण कथा का तात्विक विवेचन’ कथा ज्ञान-यज्ञ का शुभारंभ करते हुए कथाव्यास स्वामी वासुदेवाचार्य ने कहीं।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के प्रसंग में संतों ने कहा कि आप वन में रहे या नगर में रहे आप ही मेरे राजा हैं। आप ही मेरे स्वामी हैं क्योंकि आप योगी हैं। मुख्यमंत्री वास्तव में योगी हैं जिनको पद प्राप्ति से किसी प्रकार का अभिमान नहीं है। यही बात गीता में भगवान श्रीकृष्ण भी कहते हैं कि कर्म ही संसार में प्रधान है, उसको करते समय अभिमान नहीं होना चाहिए। कथाव्यास ने कहा कि गोरक्षपीठ की जिस परंपरा का शुभारंभ महंत दिग्विजयनाथ व महंत अवेद्यनाथ ने किया था उस परंपरा को योगी ने कर्म से आगे बढ़ाया है। पहले दिन की कथा में भगवान श्रीकृष्ण का दूत बनकर हस्तीनापुर में जाना, बिदुर के घर बिदुरानी द्वारा केले के छिलके का खाना तथा हनुमान जी को श्रीकृष्ण द्वारा रथ के ध्वज में स्थान देना, धूंधकारी एवं गोकर्ण के जन्म की कथा का विवेचन किया गया।
 
गोरखनाथ मंदिर में निकाली गई शोभायात्रा।
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इससे पूर्व अखंड ज्योति की शोभायात्रा गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कथाव्यास जदग्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य एवं सपरिवार यजमानगण व साधु-संत के साथ स्मृति सभागार पहुंची। अखंड ज्योति के स्थापित होने एवं दोनो ब्रह्मलीन महाराज के चित्र पर पुष्पांजलि के साथ कथा प्रारंभ हुई। स्वामी हरिनारायणाचार्य जी द्वारा कथा व्यास स्वामी वासुदेवाचार्य जी महाराज की विरदावली प्रस्तुत की गई। संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह जी ने किया।
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गोरखनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करते सीएम योगी।
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आरती में ये लोग रहे मौजूद
कथा के अंत में आरती में महंत प्रेमदास, महंत रविंद्रदास, संतोषदास सतुआ बाबा, महंत अवधेशदास, योगी कमलनाथ, यजमानगण अवधेश सिंह, सीताराम जायसवाल, महेंद्रपाल सिंह, अतुल सिंह, पुष्पदंत जैन, जितेंद्र बहादुर चंद, जीएस राय, श्रीचंद्र बंसल, महेश पोद्दार, संजय सिंह, बृजेश यादव, गोरख सिंह, प्रदीप जोशी, अरूण अग्रवाल, अजय कुमार सिंह, विकास जालान, कनकहरि अग्रवाल, अशोक जालान, शाश्वत पीयूष अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
 
गोरखनाथ मंदिर में समारोह में शामिल लोग।
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कथा सुनने वाले को पहचानते हैं भगवान
दिगंबर अखाड़ा अयोध्या से आए महंत सुरेश दास ने कहा कि कथा सुनने से भगवान की पहचान होती है, जो कथा सुनता है वह भगवान को पहचान लेता है क्योंकि वह भगवान के कृत्यों को कथा के माध्यम से सुनता है और अपने जीवन में उतारता है।
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कथा कहते जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य महराज।
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दोनों संतों ने सनातन धर्म को किया समृद्ध
अयोध्या से आए रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य ने कहा कि गोरक्षपीठ के आचार्यों ने सदा सनातन धर्म की रक्षा के लिए काम किया है। सनातन धर्म को समृद्ध करने, उसकी रक्षा करने में पूज्य दोनों महाराज का जीवन समर्पित रहा है।
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