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Yamuna Nagar News: बाढ़ राहत कार्य में देरी पर 12 एजेंसियों पर लगेगा जुर्माना
Fri, 10 Jul 2026 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 10 Jul 2026 01:55 AM IST
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टापू कमालपुर में चल रहे बाढ़ राहत बचाव कार्य। आर्काइव
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राजेश कुमार
यमुनानगर। बाढ़ से बचाव के कार्य समय पर पूरे न होने पर सिंचाई विभाग भी सख्त रुख अपनाने की बात कह रहा है। विभाग ने निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं करने वाली 12 निर्माण एजेंसियों पर जुर्माना लगाने की तैयारी कर दी है। हालांकि जुर्माना कब लगाया जाएगा और उसकी राशि कितनी होगी, इस पर निर्णय नहीं हुआ है।
सिंचाई विभाग और निर्माण एजेंसियों के बीच हुए अनुबंध के अनुसार सभी बाढ़ राहत एवं बचाव कार्य 30 जून तक पूरे होने थे, लेकिन कई स्थानों पर अब भी कार्य अधूरे हैं। विभाग का दावा है कि जिले में स्वीकृत 28 बाढ़ बचाव कार्यों में से 16 पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष 12 को तेजी से पूरा कराया जा रहा है।
सबसे संवेदनशील स्थलों में शामिल टापू कमालपुर सहित कई क्षेत्रों में कार्य अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाए हैं। इस वर्ष जिले में बाढ़ से बचाव के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से स्टड निर्माण, सुरक्षा तटबंधों को मजबूत करने, वायर क्रेट लगाने तथा नदी के कटाव को रोकने के कार्य कराए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य यमुना, सोम और पथराला नदियों के किनारे बसे गांवों और किसानों की भूमि को बाढ़ एवं कटाव से सुरक्षित करना है।
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दूसरी ओर ग्रामीणों ने कार्यों में देरी पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जिन स्थानों पर कटाव का खतरा सबसे अधिक है, वहीं पर निर्माण कार्य अधूरे छोड़ दिए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान तेज बहाव में अधूरे निर्माण बह जाने के बाद एजेंसियां यह तर्क देती हैं कि अधिक पानी आने के कारण कार्य क्षतिग्रस्त हो गया। संवाद
जिल में 70 किमी है यमुना नदी का इलाका
जिले में यमुना, सोम और पथराला नदियों के लगभग 152 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में 18 प्रमुख स्थानों पर बाढ़ बचाव कार्य चल रहे हैं। इनमें हथनीकुंड बैराज से गुमथला तक यमुना नदी का लगभग 70 किलोमीटर, सोम नदी का 42 किलोमीटर और पथराला नदी का करीब 40 किलोमीटर क्षेत्र शामिल है। हर वर्ष मालीमाजरा, नवाजपुर, लाक्कड़, लेदी, बेलगढ़, टापू कमालपुर, औधरी, लापरा, बीबीपुर, मांडेवाला, खानूवाला, आंबवाली, टिब्बड़ियां, काटरवाली, रामपुर गेंडा, रणजीतपुर, भंगेड़ा, मलिकपुर, मुजाफत, नगली, प्रलादपुर, पौबारी, संधाला, संधाली, लालछप्पर, मॉडल टाउन करेहड़ा, उन्हेड़ी और गुमथला सहित दर्जनों गांव बाढ़ और भूमि कटाव से प्रभावित होते हैं।
28 बाढ़ राहत बचाव कार्यों में से 16 कार्य पूरे कर लिए गए हैं। जो काम पूरे नहीं हुए उनकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सिंचाई विभाग के अनुबंध के आधार पर एजेंसियों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
-राहिल सैनी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
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यमुनानगर। बाढ़ से बचाव के कार्य समय पर पूरे न होने पर सिंचाई विभाग भी सख्त रुख अपनाने की बात कह रहा है। विभाग ने निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं करने वाली 12 निर्माण एजेंसियों पर जुर्माना लगाने की तैयारी कर दी है। हालांकि जुर्माना कब लगाया जाएगा और उसकी राशि कितनी होगी, इस पर निर्णय नहीं हुआ है।
सिंचाई विभाग और निर्माण एजेंसियों के बीच हुए अनुबंध के अनुसार सभी बाढ़ राहत एवं बचाव कार्य 30 जून तक पूरे होने थे, लेकिन कई स्थानों पर अब भी कार्य अधूरे हैं। विभाग का दावा है कि जिले में स्वीकृत 28 बाढ़ बचाव कार्यों में से 16 पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष 12 को तेजी से पूरा कराया जा रहा है।
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सबसे संवेदनशील स्थलों में शामिल टापू कमालपुर सहित कई क्षेत्रों में कार्य अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाए हैं। इस वर्ष जिले में बाढ़ से बचाव के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से स्टड निर्माण, सुरक्षा तटबंधों को मजबूत करने, वायर क्रेट लगाने तथा नदी के कटाव को रोकने के कार्य कराए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य यमुना, सोम और पथराला नदियों के किनारे बसे गांवों और किसानों की भूमि को बाढ़ एवं कटाव से सुरक्षित करना है।
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दूसरी ओर ग्रामीणों ने कार्यों में देरी पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जिन स्थानों पर कटाव का खतरा सबसे अधिक है, वहीं पर निर्माण कार्य अधूरे छोड़ दिए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान तेज बहाव में अधूरे निर्माण बह जाने के बाद एजेंसियां यह तर्क देती हैं कि अधिक पानी आने के कारण कार्य क्षतिग्रस्त हो गया। संवाद
जिल में 70 किमी है यमुना नदी का इलाका
जिले में यमुना, सोम और पथराला नदियों के लगभग 152 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में 18 प्रमुख स्थानों पर बाढ़ बचाव कार्य चल रहे हैं। इनमें हथनीकुंड बैराज से गुमथला तक यमुना नदी का लगभग 70 किलोमीटर, सोम नदी का 42 किलोमीटर और पथराला नदी का करीब 40 किलोमीटर क्षेत्र शामिल है। हर वर्ष मालीमाजरा, नवाजपुर, लाक्कड़, लेदी, बेलगढ़, टापू कमालपुर, औधरी, लापरा, बीबीपुर, मांडेवाला, खानूवाला, आंबवाली, टिब्बड़ियां, काटरवाली, रामपुर गेंडा, रणजीतपुर, भंगेड़ा, मलिकपुर, मुजाफत, नगली, प्रलादपुर, पौबारी, संधाला, संधाली, लालछप्पर, मॉडल टाउन करेहड़ा, उन्हेड़ी और गुमथला सहित दर्जनों गांव बाढ़ और भूमि कटाव से प्रभावित होते हैं।
28 बाढ़ राहत बचाव कार्यों में से 16 कार्य पूरे कर लिए गए हैं। जो काम पूरे नहीं हुए उनकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सिंचाई विभाग के अनुबंध के आधार पर एजेंसियों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
-राहिल सैनी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।