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तेजी बच्चन को विजय बोस ने सिखाया था रंगकर्म
Fri, 28 Dec 2018 02:07 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 28 Dec 2018 02:07 AM IST
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अमिताभ
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अपना शहर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए है। शहर की अधिकतर सड़कें, गली और इमारत गौरवशाली परंपरा की पहचान हैं। सिविल लाइंस स्थित सेंट कैथिड्रल चर्च नायाब कला शैली के लिए जाना जाता है तो हाल ही में अपनी स्थापना का 150 वर्ष पूरा करने वाला इलाहाबाद हाईकोर्ट एशिया के बड़े न्यायालयों में शुमार है। प्रयाग में गंगा-यमुना एवं अदृश्य सरस्वती का संगम और उसके किनारे स्थित अक्षयवट, अकबर का किला यहां आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
‘अमर उजाला’ के ‘अपने शहर को जानो’ कार्यक्रम में यह बातें रंगकर्मी और साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त अनिल रंजन भौमिक ने छात्रों से संवाद के दौरान कही। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी के चर्चित कलाकार विजय बोस ने सिनेस्टार अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन को रंगकर्म और बोलने की कला सिखाई थी। जब आकाशवाणी से अमिताभ वाइस टेस्ट में पास नहीं हो सके, तब तेजी बच्चन ने अमिताभ को यही विधा सिखाई, जिसके बाद अमिताभ का रंगकर्म परवान चढ़ना शुरू हुआ। भौमिक ने बताया कि जब वह विजय बोस से रंगकर्म सीख रहे थे, तब यह बात उन्होंने ही उनको बताई थी।
अनिल ने बताया कि प्रयाग के उत्तरी दिशा में स्थित शृंग्वेरपुर और भरद्वाज आश्रम का आकर्षण लोगों में प्राचीनकाल से ही रहा है। यह दोनों स्थल भगवान राम के वनगमन के मार्ग में होने के चलते महत्वपूर्ण हैं। शहर के बीचोंबीच स्थित चंद्रशेखर आजाद पार्क, इलाहाबाद संग्रहालय, हिंदुस्तानी एकेडमी, ऐतिहासिक नीम का पेड़, फांसी इमली, खुसरोबाग आजादी के आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों का केंद्र थे। आनंद भवन, स्वराज भवन में आजादी आंदोलन की महत्वपूर्ण बैठक हुआ करती थी। अनिल रंजन भौमिक ने छात्रों को संगमनगरी के रंगकर्म की जानकारी भी दी।
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छात्रों से संवाद के दौरान उनसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से जुड़े सवाल पूछे गए, इसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सही जवाब देने पर हिमांश, उत्कर्ष त्रिपाठी एवं शुभी पांडेय को अमर उजाला की ओर से पुरस्कृत किया गया। इसके बाद कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं प्रधानाचार्या को ‘अमर उजाला’ ‘अपराजिता’ अभियान के तहत महिला हिंसा का विरोध और नारी सम्मान से संबंधित शपथ दिलाई गई। गंगागुरुकुलम की प्रधानाचार्या अल्पना डे ने अमर उजाला की पहल की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों ने अपराजिता अभियान के तहत चल रही शृंखला अपने शहर को जानो के तहत बहुत ही अमूल्य जानकारी हासिल की। कार्यक्रम का संयोजन स्कूल के काउंसलर नित्यानंद ने किया।
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‘अमर उजाला’ के ‘अपने शहर को जानो’ कार्यक्रम में यह बातें रंगकर्मी और साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त अनिल रंजन भौमिक ने छात्रों से संवाद के दौरान कही। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी के चर्चित कलाकार विजय बोस ने सिनेस्टार अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन को रंगकर्म और बोलने की कला सिखाई थी। जब आकाशवाणी से अमिताभ वाइस टेस्ट में पास नहीं हो सके, तब तेजी बच्चन ने अमिताभ को यही विधा सिखाई, जिसके बाद अमिताभ का रंगकर्म परवान चढ़ना शुरू हुआ। भौमिक ने बताया कि जब वह विजय बोस से रंगकर्म सीख रहे थे, तब यह बात उन्होंने ही उनको बताई थी।
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अनिल ने बताया कि प्रयाग के उत्तरी दिशा में स्थित शृंग्वेरपुर और भरद्वाज आश्रम का आकर्षण लोगों में प्राचीनकाल से ही रहा है। यह दोनों स्थल भगवान राम के वनगमन के मार्ग में होने के चलते महत्वपूर्ण हैं। शहर के बीचोंबीच स्थित चंद्रशेखर आजाद पार्क, इलाहाबाद संग्रहालय, हिंदुस्तानी एकेडमी, ऐतिहासिक नीम का पेड़, फांसी इमली, खुसरोबाग आजादी के आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों का केंद्र थे। आनंद भवन, स्वराज भवन में आजादी आंदोलन की महत्वपूर्ण बैठक हुआ करती थी। अनिल रंजन भौमिक ने छात्रों को संगमनगरी के रंगकर्म की जानकारी भी दी।
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छात्रों से संवाद के दौरान उनसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से जुड़े सवाल पूछे गए, इसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सही जवाब देने पर हिमांश, उत्कर्ष त्रिपाठी एवं शुभी पांडेय को अमर उजाला की ओर से पुरस्कृत किया गया। इसके बाद कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं प्रधानाचार्या को ‘अमर उजाला’ ‘अपराजिता’ अभियान के तहत महिला हिंसा का विरोध और नारी सम्मान से संबंधित शपथ दिलाई गई। गंगागुरुकुलम की प्रधानाचार्या अल्पना डे ने अमर उजाला की पहल की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों ने अपराजिता अभियान के तहत चल रही शृंखला अपने शहर को जानो के तहत बहुत ही अमूल्य जानकारी हासिल की। कार्यक्रम का संयोजन स्कूल के काउंसलर नित्यानंद ने किया।