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UP News: टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क पर ED की बड़ी कार्रवाई, 13 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
Thu, 16 Jul 2026 09:56 AM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Thu, 16 Jul 2026 09:56 AM IST
सार
बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को घुसपैठ कराकर विभिन्न राज्यों में बसाने और विदेश में ह्यूमन ट्रैफिकिंग करने वाले गिरोह के सदस्यों के ठिकानों पर ईडी ने छापा मारा। आगे की कार्रवाई की जा रही है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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ED
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत, कथित तौर पर टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के 13 ठिकानों पर छापा मारा।
यूपी एटीएस द्वारा दर्ज FIR के अनुसार, एक गिरोह कथित तौर पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराने, उनके लिए नकली भारतीय पहचान पत्र बनवाने और देश के अलग-अलग हिस्सों में उन्हें बसाने में मदद कर रहा है।
ईडी की जांच में एक वित्तीय नेटवर्क का पता चला। इसमें कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं भी शामिल हैं। इन पर आरोप है कि उन्हें भारी मात्रा में विदेशी चंदा मिलता था। वे अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई बैंक खातों, 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरे के नाम पर खोले गए खाते) और कई चरणों वाले लेन-देन के ज़रिये इस पैसे का गलत इस्तेमाल करते थे।
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ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि संदिग्ध लाभार्थियों को पैसे भेजने के लिए कैश निकालने और छोटी रकम ट्रांसफर करने जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
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यूपी एटीएस द्वारा दर्ज FIR के अनुसार, एक गिरोह कथित तौर पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराने, उनके लिए नकली भारतीय पहचान पत्र बनवाने और देश के अलग-अलग हिस्सों में उन्हें बसाने में मदद कर रहा है।
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ईडी की जांच में एक वित्तीय नेटवर्क का पता चला। इसमें कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं भी शामिल हैं। इन पर आरोप है कि उन्हें भारी मात्रा में विदेशी चंदा मिलता था। वे अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई बैंक खातों, 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरे के नाम पर खोले गए खाते) और कई चरणों वाले लेन-देन के ज़रिये इस पैसे का गलत इस्तेमाल करते थे।
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ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि संदिग्ध लाभार्थियों को पैसे भेजने के लिए कैश निकालने और छोटी रकम ट्रांसफर करने जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।