सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   KGMU: Patients' bread cut in KGMU.

KGMU: केजीएमयू में मरीजों की रोटियों में कटौती, व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति बाधित होने से हालात खराब

अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Thu, 12 Mar 2026 09:54 AM IST
विज्ञापन
सार

व्यावसायिक गैस सिलिंडर की किल्लत को देखते हुए मरीजों को अब चार की जगह दो ही रोटियां दी जा रही हैं। वहीं, विद्यार्थियों की मेस में खाना नहीं बन सका।

KGMU: Patients' bread cut in KGMU.
- फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार

व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति बाधित होने का असर केजीएमयू में मरीजों के भोजन पर दिखाई देने लगा है। बुधवार को मरीजों की थाली में चार के बजाय दो रोटी ही दी गईं। वहीं विद्यार्थियों की मेस में खाना नहीं बन सका।
Trending Videos


केजीएमयू में मरीजों के भोजन के लिए सौर ऊर्जा प्लांट लगा है, लेकिन रोटियां गैस पर ही सेंकी जाती हैं। सिलिंडर की आपूर्ति बाधित होने पर वेंडर ने चावल की मात्रा बढ़ा दी। सामान्य तौर पर यहां दाल और सब्जी के साथ चार रोटी और चावल दिया जाता है। बुधवार को सिर्फ दो-दो रोटी ही दी गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - कांशीराम जयंती पर मायावती का नया प्लान, 15 मार्च को दो लाख से अधिक समर्थकों के आने की संभावना

ये भी पढ़ें - जंग का असर : पेट्रोल की लड़ाई में पानी भी महंगा, कच्चे माल की कीमत बढ़ने से कंपनियों को झटका


इतना ही नहीं, संस्थान में विद्यार्थियों की कई मेस में भी गैस का संकट पैदा हो गया। जैसे-तैसे शाम का भोजन बनाया गया। कई विद्यार्थियों ने बाहर ही भोजन किया। वहीं, कई मेस संचालकों ने लकड़ी जलाने की अनुमति मांगी है।

काफी मरीजों को होती है चावल से समस्याः केजीएमयू में भले ही मरीजों की रोटियों की संख्या में कटौती कर काम चलाया गया हो, लेकिन यह व्यवस्था कई मरीजों के लिए काफी भारी पड़ गई। असल में काफी मरीजों को चावल खाने की मनाही होती है। ऐसे में नई व्यवस्था उनके लिए भारी पड़ गई। हालांकि केजीएमयू प्रशासन ने बृहस्पतिवार को रोटी मेकर लाने की बात कही है। यह बिजली से चलता है और गैस की जरूरत नहीं होगी।

सौर ऊर्जा भी कर रही मदद: केजीएमयू की रसोई पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित है। संस्थान के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि केजीएमयू में रोजाना करीब साढ़े चार हजार मरीजों का खाना बनाया जाता है। यह काफी पहले से ही सौर ऊर्जा पर आधारित है। इससे रसोई गैस सिलिंडरों पर निर्भरता काफी कम हो गई है।

लोहिया संस्थान में तीन दिन का स्टॉक, हो रही व्यवस्था: डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रवक्ता प्रो. भुवन चंद्र तिवारी के अनुसार, संस्थान में रोजाना करीब एक हजार मरीजों का भोजन पकाया जाता है। इसमें गैस का इस्तेमाल होता है। फिलहाल यहां तीन दिन की गैस ही बची है। हालांकि, वेंडर ने इसका बंदोबस्त करने की बात कही है।

सरकारी अस्पतालों में स्थिति सामान्य: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बलरामपुर और लोकबंधु जैसे अस्पतालों में खाना पकाने के लिए गैस का ही इस्तेमाल होता है। हालांकि, कहीं भी गैस की कोई किल्लत नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed