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सुना है क्या: जीरो टॉलरेंस का खूब इस्तेमाल कर रहे कमिश्नर बहादुर, वहां दीदी, यहां दादा का किस्सा चर्चा में

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 27 Feb 2026 11:11 AM IST
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सार

पश्चिम में तैनात हैं एक कमिश्नर बहादुर। उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति को ही उगाही का उपकरण बना लिया है । हाल ये है कि जूनियर अधिकारी लगातार पीड़ा में रहते हैं। एक किस्सा उन मंत्री साहब का भी है जो कि जांच करने पर केंद्रीय एजेंसी को ही सुना देते हैं। वहीं, पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग में अधिकारी ऐसी नोटिंग लगाने की चेतावनी दे रहे हैं जिससे फाइल ही फंस जाए। पढ़ें, अंदर के किस्से: 

SUna Hai Kya: Commissioner Bahadur is making good use of zero tolerance.
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पश्चिम यूपी में तैनात एक कमिश्नर बहादुर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं और खूब उगाही करवा रहे हैं। वहीं, डबल इंजन सरकार में मंत्री ने जांच पर केंद्रीय एजेंसी को ही खरीखोटी सुना दी। पढ़ें, वो किस्से जो लगातार चर्चा में हैं: 
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कमिश्नर बहादुर के कारनामे
पश्चिम में तैनात कमिश्नर बहादुर के किस्से इन दिनों जूनियर नौकरशाही के बीच भी खूब तैर रहे हैं। कमिश्नर बहादुर ने एक बिहारी बाबू को अपने प्राइवेट सहायक के तौर पर रखा है। उनकी ओर से कोई भी डिमांड अब बिहारी बाबू ही करते हैं। पूरे मंडल में उनका सिक्का चलता है। कुछ जूनियर नौकरशाह अपनी पीड़ा सुनाते हुए कहते हैं कि दबाव डालकर उगाही कमिश्नर बहादुर करवाते हैं, फिर कुछ समय बाद शिकायत भी उच्च स्तर पर कर देते हैं कि वह भ्रष्ट है। इस तरह से जूनियर नौकरशाह बदनाम हो जाते हैं और जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत किनारे बैठा दिए जाते हैं।
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वहां दीदी, यहां दादा
बंगभूमि में एक केंद्रीय एजेंसी ने छापा मारा तो दीदी के रौद्र रूप का सामना करना पड़ा। कुछ ऐसा ही हाल सूबे में भी हुआ, जहां मंत्री जी दादागिरी करने लगे। रिश्तेदार की करतूतों पर पर्दा डालने के लिए एजेंसी को ही निशाने पर लेकर खरी-खोटी सुना दी। अब उनको कौन बताए कि जिस ट्रेन पर वह सवार हैं, वह डबल इंजन वाली है। ट्रेन से उतार दिए गए तो जाने कहां-कहां भटकना पड़ जाए। पहले रिश्तेदार की आम शोहरत भी तो पता कर लेते। प्रकृति को लूटकर कमाई दौलत का हिसाब आज नहीं तो कल, देना ही पड़ेगा।

फाइल बढ़ेगी नहीं, लटका और देंगे
प्रदेश में इस समय विभागों में समय से बजट खर्च करने को लेकर अभियान चल रहा है। किंतु पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग के अधिकारी खासे परेशान हैं। पता चला कि उनकी फाइलें जब बजट रिलीज करने वाले विभाग में जा रही हैं तो रुक जा रही हैं। पूंछने पर पता चला कि उस विभाग के बड़े साहब विदेश यात्रा में हैं। वहीं जिनके पास विभाग का कार्यभार है, वो फाइलें कर ही नहीं रहे हैं। चर्चा है कि फाइलें करना तो दूर उल्टे ऐसी नोटिंग लगाने की चेतावनी मिल जाती है कि वह काफी समय तक फंस सकती हैं। ऐसे में विभाग के अधिकारी परेशान रहे हैं।

आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी या समाचार हो तो 8859108085 पर व्हाट्सएप करें।
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