UP: जेन के लिए स्कूलों की निगरानी का डिजिटल मोड, सोशल मीडिया पर स्कूलों की शिकायतों पर अब तुरंत होगी जांच
उत्तर प्रदेश में सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों से जुड़ी सोशल मीडिया शिकायतों की अब तत्काल जांच होगी। शासन ने अधिकारियों को तथ्य सत्यापित कर आधिकारिक जानकारी साझा करने और भ्रामक दावों का खंडन करने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों में स्वच्छता, सुविधाओं और पढ़ाई की व्यवस्था की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
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प्रदेश के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में व्यवस्थाओं को लेकर सोशल मीडिया पर मिलने वाली शिकायतों को लेकर शासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देश में प्वाइंटर नंबर-14 में कहा गया है कि सोशल मीडिया, मास मीडिया अथवा अन्य किसी माध्यम से प्राप्त शिकायत की तत्काल जांच कर प्रमाणिक तथ्यों की स्थिति निर्धारित की जाए। साथ ही जांच की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रस्तुत की जाए।
शासन ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि तथ्य-आधारित सूचनाओं के साथ-साथ दुष्प्रचार करने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी नजर रखी जाए और उनका खंडन किया जाए। यानी स्कूलों से जुड़ी किसी शिकायत या वायरल दावे को बिना जांच के सही मानने के बजाय उसकी तथ्यात्मक पड़ताल कर आधिकारिक जानकारी सामने रखी जाएगी।
Gen Z के लिए स्कूलों की निगरानी का डिजिटल मोड
सोशल मीडिया पर सक्रिय Gen Z और डिजिटल जनरेशन के लिए यह व्यवस्था खास मायने रखती है। स्कूलों से जुड़ी कोई समस्या, शिकायत या दावा सोशल मीडिया पर सामने आता है तो अब उसके तथ्यों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने पर जोर दिया गया है। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों तक सही जानकारी पहुंचाने तथा भ्रामक सूचनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
मुख्य सचिव के निर्देश में स्कूलों में साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, बिजली, नियमित पठन-पाठन और अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी के साथ अभिभावकों से नियमित संवाद पर भी जोर दिया गया है। प्वाइंटर-13 में शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों, अभिभावकों और एसएमसी सदस्यों के बीच नियमित संवाद तथा Parent-Teacher Association (PTA) की बैठकों को प्रभावशाली तरीके से आयोजित करने के निर्देश हैं।
शासन ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों को स्वच्छ, सुरक्षित, सुविधायुक्त और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। ऐसे में सोशल मीडिया पर आने वाली शिकायतों की त्वरित जांच और भ्रामक सूचनाओं के खंडन को स्कूल शिक्षा व्यवस्था की डिजिटल मॉनिटरिंग का अहम हिस्सा माना जा रहा है।