UP: बेमौसम बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेरा, खेत में खड़ी व काटकर सुखाने के लिए रखी धान की फसल खराब
किसानों का कहना है कि खेतों में कटी पड़ी धान की फसल भीगने पर अंकुरित हो सकती है। जो फसल खड़ी है उसे भी नुकसान पहुंचा है। कुछ किसान सरसों, मटर व आलू की बोआई कर चुके हैं। इनकी फसल को भी नुकसान हुआ है।
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बृहस्पतिवार सुबह से शाम तक हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कहीं खेत में सुखाने के लिए काट कर रखी गई धान की फसल भीग कर खराब हो गई है तो कहीं खेतों में पानी भर जाने से खड़ी फसल नष्ट हो रही है। धान, सरसों, मटर, आलू जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों की महीनों की मेहनत पर बारिश ने पानी फेर दिया है। इससे उनके चेहरों पर मायूसी साफ झलक रही है।
मोहनलालगंज प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के सिसेंडी, मऊ, जबरौली, भदेसुवा, गनियार, भौंदरी गांव के किसानों की धान, सरसों, मटर व आलू की फसल चौपट हुई है। गनियार के किसान अजय पाल ने बताया कि खेतों में कटी पड़ी धान की फसल भीगने पर अंकुरित हो सकती है। जो फसल खड़ी है उसे भी नुकसान पहुंचा है। कुछ किसान सरसों, मटर व आलू की बोआई कर चुके हैं। इनकी फसल को भी नुकसान हुआ है।
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विकासखंड काकोरी के प्रतिनिधि के अनुसार, बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। चौखड़ी खेड़ा गांव निवासी प्रधान गुरु दयाल ने बताया कि खेतों में खड़ी और कटी हुई धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। बसंत खेड़ा गांव के बलवीर यादव ने बताया कि आलू की नई बोआई पर असर पड़ा है। दसदोई के अखिलेश उर्फ गब्बर गौतम ने बताया कि गोभी और मटर की फसलें भी बारिश की मार झेल रही हैं। काकोरी के आजाद चौधरी, खानपुर मऊ निवासी वीरेंद्र यादव ने बताया कि बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जिससे सभी फसलों को नुकसान हुआ है।
हाल में बोई फसलों को भी नुकसानः डॉ. दुबे
कृषि विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके दुबे ने बताया कि गोसाईंगंज, बीकेटी, मलिहाबाद व काकोरी में किसान धान की अच्छी खेती करते हैं। धान की अधिकतर फसलें कटने के कगार पर हैं, जबकि काफी किसानों के खेतों में खड़ी धान की फसल कट कर सुखाने के लिए रखी है। दोनों ही स्थिति में धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। खड़ी फसल का उत्पादन 20 तो कटी फसल का उत्पादन करीब 30 फीसदी कम हो जाएगा। जिन किसानों ने हाल ही में आलू, चना, मटर और सरसों की अगेती बोआई की है और उसका जमाव अभी ठीक से नहीं हो सका है। ऐसे सभी फसलों के जमाव पर बारिश का प्रभाव पड़ेगा। बीज के भीग कर सड़ने की संभावना अधिक रहेगी। जिन किसानों ने दलहनी, तिलहनी फसलों के साथ गोभी, पालक, धनिया बोने के लिए खेत तैयार किए थे, बारिश के कारण अब उनको खेत सूखने का इंतजार करना होगा। इससे बोआई में देरी होगी।
धान के दाने खराब होने का सता रहा डर
नगराम प्रतिनिधि के अनुसार बचनखेड़ा निवासी किसान रमेश वर्मा ने बताया कि उन्होंने उनकी सूखने के लिए खेतों में पड़ी धान की फसल बारिश से भीग चुकी है। इससे दाने खराब होने का डर है। सिरौना के भगौती का भी कुछ ऐसा ही हाल है। सरोजनीनगर क्षेत्र के किसानों की भी यही चिंता है। निगोहां के किसान पुप्पन तिवारी ने बताया कि खेत में लगभग पांच बीघे की फसल कटी पड़ी हैं। आज इनकी पिटाई शुरू होनी थी, लेकिन बारिश ने सब चौपट कर दिया। किसान आनंद मोहन तिवारी ने बताया कि बुधवार शाम को लगभग तीन बीघे तिलहन की बोआई कराई थी, जो अब बर्बाद होना तय है। जिन किसानों ने पहले तिलहन की बोआई कर दी है और तिलहन उग आई थी, उसकी फसल के लिए ये बारिश फायदेमंद है।
