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Cabinet:सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम को मंजूरी,4,865 युवाओं का चयन होगा, हर माह मिलेंगे 10 हजार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 10 Mar 2026 08:31 PM IST
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सार
प्रदेश सरकार ने युवाओं को शासन व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना पर तीन वर्षों में लगभग 190 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बैठक में विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के लिए करीब 33 हजार 240 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई, साथ ही यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी मिली।
सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश सरकार ने युवाओं को शासन व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम शुरू करने का निर्णय लिया है।यह प्रोग्राम में तीन वर्षों में लगभग 190 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बैठक में विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के लिए करीब 33 हजार 240 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई, साथ ही कई प्रस्तावों को मंजूरी मिली।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट बैठक आयोजित हुई। इसमें मुख्यमंत्री यंग इंटनर्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्रोम समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। प्रदेश में सुशासन को मजबूत बनाने और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत पूरे मध्यप्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक में 15 स्थानीय युवाओं का चयन किया जाएगा, जो सरकारी योजनाओं की निगरानी और फीडबैक देने का काम करेंगे। इस प्रोग्राम का संचालन भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से किया जाएगा। योजना के तहत चयनित युवाओं को एक वर्ष के लिए इंटर्न के रूप में रखा जाएगा और योजना की निरंतरता तीन वर्षों तक रहेगी।
प्रदेश के सभी ब्लॉकों से कुल मिलाकर करीब 4865 युवा इस योजना से जुड़ेंगे। इन युवाओं को हर महीने 10 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। चयनित युवा डिजिटल माध्यम से सरकारी योजनाओं से जुड़े आंकड़े एकत्र करेंगे और यह अध्ययन करेंगे कि योजनाओं का सामाजिक प्रभाव क्या पड़ रहा है तथा जनता को उनका लाभ किस हद तक मिल रहा है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में कहां-कहां समस्याएं आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार इन युवाओं के माध्यम से प्राप्त जानकारी को राज्य स्तर पर एक डैशबोर्ड और पोर्टल पर संकलित किया जाएगा, जिससे मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों को योजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा मिल सकेगी। योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जमीनी स्तर से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर सुधार भी किए जा सकें। साथ ही इससे युवाओं को शासन-प्रशासन और नई तकनीक से जुड़कर काम करने का अवसर भी मिलेगा। इस योजना पर तीन वर्षों में लगभग 190 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार का मानना है कि यह पहल प्रदेश में सुशासन को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जोड़ने का एक नया मॉडल साबित होगी।
ये भी पढ़ें- MP News: प्रदेश में एलपीजी संकट, कमर्शियल सिलेंडर का दो दिन का स्टॉक ही शेष, 15 लाख उपभोक्ताओं पर असर
7 जिलों में एक जिला-एक उत्पाद योजना को मंजूरी
कैबिनेट ने प्रदेश के 7 जिलों में एक जिला-एक उत्पाद योजना लागू करने के लिए अगले 5 वर्षों में 37.50 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत सीधी में दरी-कारपेट, दतिया में गुड़, अशोकनगर में चंदेरी हाथकरघा वस्त्र, भोपाल में जरी-जरदोजी व जूट उत्पाद, धार में बाग प्रिंट, सीहोर में लकड़ी के खिलौने और उज्जैन में बटिक प्रिंट को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म और बाजार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
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सिंगरौली कोर्ट के 7 नए पद मंजूर
कैबिनेट ने सिंगरौली जिले के चितरंगी में व्यवहार न्यायालय स्थापित करने के लिए कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश का एक पद और कार्यालय के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 6 अन्य पद बनाने की मंजूरी दी है।
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तीन नए ईएसआई अस्पताल खुलेंगे
कैबिनेट ने मैहर, कैमोर (कटनी) और निमरानी (खरगोन) में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के 3 नए अस्पताल खोलने और 51 पदों के सृजन को मंजूरी दी है। इससे करीब 15,686 श्रमिकों और उनके 62,744 परिवारजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
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इन प्रस्तावों को भी मंजूरी
कैबिनेट ने रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र से मिलने वाली राशि पर देय एसजीएसटी को अनुदान की जगह अंशपूंजी के रूप में वितरण कंपनियों को देने का निर्णय लिया है। इसके तहत 887 करोड़ 91 लाख रुपये अंशपूंजी के रूप में दिए जाएंगे, जिससे बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाएगा। सरकार ने विभिन्न लोक वित्त पोषित योजनाओं और कार्यक्रमों को जारी रखने के लिए 63 करोड़ 76 लाख रुपये मंजूर किए हैं।
खनिज अधिभार से बनने वाली निधि में अंतरण योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर रखे जाने के लिए 6090 करोड़ 12 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इस राशि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों, पिछड़े क्षेत्रों, खनिज क्षेत्रों में ग्रामीण अवसंरचना, पेयजल आपूर्ति योजना तथा सड़क विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 7,127 करोड़ 38 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसमें मिड-डे मील (प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना) के तहत कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने के लिए 7098 करोड़ रुपये की राशि शामिल है।
योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय अंतर्गत संचालित 10 योजनाओं की 31 मार्च, 2031 तक निरंतरता के लिए 2,064 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें योजनाओं की मॉनिटरिंग, सांसद-विधायक निधि सहायता, बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य विकास प्राधिकरण जैसी 10 योजनाओं के संचालन से संबंधित खर्च की स्वीकृति प्रदान की गई है। अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के विकास और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सहित अन्य कार्यों से संबंधित योजनाओं की वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता के लिए कुल राशि 1,645 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को जारी रखने के लिए 3,773 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें राज्य महिला आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग और महिला वित्त विकास निगम से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। प्रदेश में स्टार्ट-अप और उद्योग निवेश को बढ़ावा देने के लिए 11,361 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे उद्योगों को अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात सहायता, ऊर्जा ऑडिट और स्टार्ट-अप को निवेश, पेटेंट व लीज रेंट सहायता दी जाएगी।
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प्रदेश के सभी ब्लॉकों से कुल मिलाकर करीब 4865 युवा इस योजना से जुड़ेंगे। इन युवाओं को हर महीने 10 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। चयनित युवा डिजिटल माध्यम से सरकारी योजनाओं से जुड़े आंकड़े एकत्र करेंगे और यह अध्ययन करेंगे कि योजनाओं का सामाजिक प्रभाव क्या पड़ रहा है तथा जनता को उनका लाभ किस हद तक मिल रहा है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में कहां-कहां समस्याएं आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार इन युवाओं के माध्यम से प्राप्त जानकारी को राज्य स्तर पर एक डैशबोर्ड और पोर्टल पर संकलित किया जाएगा, जिससे मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों को योजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा मिल सकेगी। योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जमीनी स्तर से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर सुधार भी किए जा सकें। साथ ही इससे युवाओं को शासन-प्रशासन और नई तकनीक से जुड़कर काम करने का अवसर भी मिलेगा। इस योजना पर तीन वर्षों में लगभग 190 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार का मानना है कि यह पहल प्रदेश में सुशासन को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जोड़ने का एक नया मॉडल साबित होगी।
ये भी पढ़ें- MP News: प्रदेश में एलपीजी संकट, कमर्शियल सिलेंडर का दो दिन का स्टॉक ही शेष, 15 लाख उपभोक्ताओं पर असर
7 जिलों में एक जिला-एक उत्पाद योजना को मंजूरी
कैबिनेट ने प्रदेश के 7 जिलों में एक जिला-एक उत्पाद योजना लागू करने के लिए अगले 5 वर्षों में 37.50 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत सीधी में दरी-कारपेट, दतिया में गुड़, अशोकनगर में चंदेरी हाथकरघा वस्त्र, भोपाल में जरी-जरदोजी व जूट उत्पाद, धार में बाग प्रिंट, सीहोर में लकड़ी के खिलौने और उज्जैन में बटिक प्रिंट को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म और बाजार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
ये भी पढ़ें- ईरान- इजरायल जंग: कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई रुकी, होटल-रेस्त्रां और मैरिज गार्डन के मालिक चिंतित
सिंगरौली कोर्ट के 7 नए पद मंजूर
कैबिनेट ने सिंगरौली जिले के चितरंगी में व्यवहार न्यायालय स्थापित करने के लिए कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश का एक पद और कार्यालय के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 6 अन्य पद बनाने की मंजूरी दी है।
ये भी पढ़ें- MP News: मल्होत्रा से पहले तीन भाजपा विधायकों का चुनाव भी हो चुका शून्य, एक को मिली राहत, दो की विधायकी गई
तीन नए ईएसआई अस्पताल खुलेंगे
कैबिनेट ने मैहर, कैमोर (कटनी) और निमरानी (खरगोन) में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के 3 नए अस्पताल खोलने और 51 पदों के सृजन को मंजूरी दी है। इससे करीब 15,686 श्रमिकों और उनके 62,744 परिवारजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
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इन प्रस्तावों को भी मंजूरी
कैबिनेट ने रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र से मिलने वाली राशि पर देय एसजीएसटी को अनुदान की जगह अंशपूंजी के रूप में वितरण कंपनियों को देने का निर्णय लिया है। इसके तहत 887 करोड़ 91 लाख रुपये अंशपूंजी के रूप में दिए जाएंगे, जिससे बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाएगा। सरकार ने विभिन्न लोक वित्त पोषित योजनाओं और कार्यक्रमों को जारी रखने के लिए 63 करोड़ 76 लाख रुपये मंजूर किए हैं।
खनिज अधिभार से बनने वाली निधि में अंतरण योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर रखे जाने के लिए 6090 करोड़ 12 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इस राशि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों, पिछड़े क्षेत्रों, खनिज क्षेत्रों में ग्रामीण अवसंरचना, पेयजल आपूर्ति योजना तथा सड़क विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 7,127 करोड़ 38 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसमें मिड-डे मील (प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना) के तहत कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने के लिए 7098 करोड़ रुपये की राशि शामिल है।
योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय अंतर्गत संचालित 10 योजनाओं की 31 मार्च, 2031 तक निरंतरता के लिए 2,064 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें योजनाओं की मॉनिटरिंग, सांसद-विधायक निधि सहायता, बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य विकास प्राधिकरण जैसी 10 योजनाओं के संचालन से संबंधित खर्च की स्वीकृति प्रदान की गई है। अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के विकास और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सहित अन्य कार्यों से संबंधित योजनाओं की वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता के लिए कुल राशि 1,645 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को जारी रखने के लिए 3,773 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें राज्य महिला आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग और महिला वित्त विकास निगम से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। प्रदेश में स्टार्ट-अप और उद्योग निवेश को बढ़ावा देने के लिए 11,361 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे उद्योगों को अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात सहायता, ऊर्जा ऑडिट और स्टार्ट-अप को निवेश, पेटेंट व लीज रेंट सहायता दी जाएगी।

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