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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Sir, the complaint is not false…” The complainant arrived at the public hearing with a ₹200 stamp and a notary

सीधी जनसुनवाई में अनोखा विरोध: 'साहब, शिकायत झूठी नहीं है'... 200 के स्टांप के साथ जनसुनवाई पहुंचे फरियादी

Tue, 02 Jun 2026 06:33 PM IST
सीधी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीधी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीधी Published by: सीधी ब्यूरो Updated Tue, 02 Jun 2026 06:33 PM IST
सार

सीधी की जनसुनवाई में कई फरियादी ₹200 के स्टांप पेपर और नोटरीकृत शिकायतें लेकर पहुंचे। उनका कहना था कि कलेक्टर के कथित बयान के बाद उन्होंने ऐसा किया। आवेदकों ने पटवारी पर आरोप लगाते हुए कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की।

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Sir, the complaint is not false…” The complainant arrived at the public hearing with a ₹200 stamp and a notary
पीड़ित - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक अनोखा मामला सामने आया। कई आवेदक अपनी शिकायतों के साथ ₹200 के स्टांप पेपर और नोटरीकृत दस्तावेज लेकर पहुंचे। उनका कहना था कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि पूर्व में कलेक्टर द्वारा कथित रूप से दिए गए एक बयान के आधार पर उन्हें लगा कि इस तरह प्रस्तुत की गई शिकायतों को अधिक गंभीरता से लिया जाएगा।

जनसुनवाई में पहुंचे अयोध्या प्रसाद मिश्रा, प्रत्यूष मिश्रा और हितेश मिश्रा ने प्रशासन को अपनी शिकायतें स्टांप पेपर के साथ सौंपीं और कार्रवाई की मांग की। अयोध्या प्रसाद मिश्रा ने बताया कि वे ग्राम बभनी के निवासी हैं और क्षेत्र में पदस्थ पटवारी प्रवीण पांडे के खिलाफ लंबे समय से शिकायत कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पटवारी द्वारा गलत प्रतिवेदन तैयार किए जाने से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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मिश्रा का कहना है कि उन्होंने पूर्व में जन चौपाल के माध्यम से भी अपनी शिकायत कलेक्टर विकास मिश्रा तक पहुंचाई थी। उनके अनुसार, उस दौरान कलेक्टर ने कहा था कि अधिकांश शिकायतें झूठी साबित होती हैं और यदि कोई व्यक्ति ₹200 के स्टांप पेपर पर शिकायत प्रस्तुत करेगा तो उसे अधिक विश्वसनीय माना जाएगा। इसी कथित टिप्पणी के आधार पर उन्होंने अपनी शिकायत स्टांप पेपर पर तैयार कराई और नोटरी कराने पर अतिरिक्त खर्च भी किया।

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जनसुनवाई में यह मामला चर्चा का विषय बना रहा। उपस्थित लोगों का कहना था कि यदि शिकायतों की विश्वसनीयता साबित करने के लिए लोगों को स्टांप पेपर और नोटरी का सहारा लेना पड़ रहा है, तो यह प्रशासन और आम जनता के बीच भरोसे की स्थिति पर भी सवाल खड़े करता है।

इस संबंध में कलेक्टर विकास मिश्रा का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने जनसुनवाई में व्यस्तता का हवाला देते हुए कोई टिप्पणी नहीं की। बाद में फोन पर संपर्क करने की कोशिश भी की गई, हालांकि उनका जवाब प्राप्त नहीं हो सका। अब देखना होगा कि स्टांप पेपर पर प्रस्तुत शिकायतों के आधार पर प्रशासन संबंधित आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।

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