भारत में मौजूद इस गुफा के अंदर अद्भुत पाताल नगरी दिखाई देती है। इस गुफा में उतरते ही एक अलग दुनिया में आने का आभास होता है।
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इस गुफा से दिखता है 'पाताल', तस्वीरें में देखिए 'पाताल नगरी'
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 06 Jun 2017 08:55 AM IST
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patal bhuvaneshwar cave
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पाताल भ्ाुवनेश्वर गुफा
इस गुफा में चार खंभे है जो सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग को दर्शाते हैं। इनमें पहले तीन आकारों में कोई परिवर्तन नहीं होता। जबकि कलियुग का खंभे के बारे में यहां के पुजारी कहते हैं कि 7 करोड़ वर्षों में यह पिंड 1 इंच बढ़ता है। मान्यता है कि जिस दिन यह पिंड कलियुग के खंभे से मिल जाएगा उस दिन दुनिया खत्म हो जाएगी।
patal bhubaneswar cave
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट कस्बे में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा के बारे में स्कंद पुराण में कहा गया है कि इसमें भगवान शिव का निवास है और यहां सभी देवी-देवता शिव की पूजा करते हैं।
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पाताल भ्ाुवनेश्वर
इसके बाद आगे वो जगह है जहां भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट कर रख दिया था। आदि गणेश की सिर विहीन मूर्ति लोगों को स्तब्ध कर देती है। इस मूर्ति के ठीक ऊपर 108 पंखुड़ियों वाला ब्रह्मकमल सुशोभित है। जहां से दिव्य जल की बूंदें टपकती हैं।
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पाताल भ्ाुवनेश्वर
वहीं गुफा में नाग की आकृति भी चट्टान में नजर आती है। कहा जाता है कि राजा परीक्षित को मिले श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए उनके पुत्र जन्मेजय ने इसी कुंड में सभी नागों को जला डाला लेकिन तक्षक नाग बच निकला जिसने बदला लेते हुए परीक्षित को मौत के घाट उतार दिया। हवन कुण्ड के ऊपर इसी तक्षक नाग की आकृति बनी है। इसी तरह आगे चट्टानों में एरावत हाथी के तराशे हुए पैर नजर आते हैं, स्कन्द पुराण के मानस खण्ड में इसका वर्णन किया गया है।