अल्मोड़ा में कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल गांधी को शुक्रवार को उत्तराखंड में मोदी मंत्र का जवाब देना होगा। राहुल का यह जवाब कांग्रेस के चुनावी अभियान को भी प्रभावित करेगा। कांग्रेस का चुनाव अभियान प्रदेश में दो धाराओं में बंटा हुआ है और राहुल के सामने एक चुनौती इन दो धाराओं के बीच तालमेल कायम करने की भी होगी।
उत्तराखंड की जनता को लुभाने के लिए राहुल गांधी के सामने हैं ये चुनौतियां
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भाजपा की अभी तक प्रदेश में स्पष्ट चुनावी रणनीति है। मुख्यमंत्री हरीश रावत को निशाने पर रखो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिए मतदाताओं को बांधे रखो। कांग्रेस का मामला इससे बिलकुल जुदा है। मुख्यमंत्री हरीश रावत प्रदेश सरकार की उपलब्धियों और प्रदेश के प्रति अपने सरोकार को चुनावी अभियान का हिस्सा बनाए हुए हैं।
रावत खुद भी कई बार यह शिकायत कर चुके हैं कि कांग्रेस संगठन प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिनाने के मामले में आक्रामक नहीं है। रावत के मुताबिक जिस विश्वास से भाजपाई झूठ बोलते हैं, उतने विश्वास से कांग्रेसी सच भी नहीं बोल पा रहे। ऐसे में रावत अकेले अपने दम पर चुनाव में कांग्रेस के खेवनहार होने की कोशिश करते भी दिखते हैं।
इसके उलट, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय संगठन शक्ति और केंद्र की विफलताओं को चुनाव अभियान का हिस्सा बनाए हुए हैं। नोटबंदी से परेशानी, प्रदेश की केंद्र के स्तर से हो रही उपेक्षा उनके चुनाव अभियान का हिस्सा है। सतत विकास संकल्प यात्रा के जरिए किशोर ने मुख्यमंत्री हरीश रावत की मोडस ऑपरेंडी से तालमेल बिठाने की कोशिश भी की, लेकिन वे इसमें खास सफल हो नहीं पाए। जब-तब सरकार के खिलाफ किशोर की बयानबाजी, पूरा माहौल बिगाड़ देती है।
ऐसे में शुक्रवार को अल्मोड़ा पहुंच रहे राहुल गांधी के सामने कांग्रेस की कांग्रेस के चुनावी अभियान की इन दो धाराओं के बीच में तालमेल कायम करने की चुनौती भी होगी। बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को निशाने पर लिया था। राहुल ने बहराइच में हुई सभा में जवाब भी दिया।