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यश चोपड़ा ने इन 10 हीरोइनों के जरिए समाज का दिखाया आइना, बिन ब्याही मां से शुरू सफर यहां तक पहुंचा

Sun, 27 Sep 2020 08:42 PM IST
shrilata biswas अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: shrilata biswas Updated Sun, 27 Sep 2020 08:42 PM IST
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Yash chopra birthday 10 films that changed presentation of heroines in Hindi cinema
यश चोपड़ा की फिल्में - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

जाने-माने फिल्म निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी बनाई फिल्मों के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है। उनकी फिल्मों में उठाए गए समाज के छोटे-छोटे मुद्दों को भी बड़ी तरजीह दी गई। यश चोपड़ा ने सिर्फ फिल्में ही नहीं बनाईं, उन्होंने पर्दे पर असरदार कहानियां गढ़ीं और उनसे ही पैदा हुए फिल्मों के कई सुपरस्टार। आज हम यश चोपड़ा की फिल्मों की उन अभिनेत्रियों की बात करेंगे जिन्होंने समाज, परिवार और प्रेमी सभी में सामंजस्य बिठाकर अपने किरदार को अंजाम दिया।

Yash chopra birthday 10 films that changed presentation of heroines in Hindi cinema
धूल का फूल में माला सिन्हा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

माला सिन्हा
यश चोपड़ा ने 1959 में आई फिल्म 'धूल का फूल' में पहली बार फिल्म निर्देशन की बागडोर संभाली। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री माला सिन्हा का मीना खोसला के रूप में किरदार बहुत चुनौतीपूर्ण रहा। मीना महेश से प्रेम करती है। ये दोनों एक दिन अचानक आगे बढ़ते हैं और मीना गर्भवती हो जाती है। दूसरी तरफ महेश अपने घरवालों के दबाव में आकर मालती राय से शादी कर लेता है। इधर, मीना अपने बच्चे को जन्म देती है, इस वजह से उसके परिवारजन उसे अपने घर से निकाल देते हैं। अब यह बिन ब्याही मां किस तरह अपने बच्चे के साथ उस समय में गुजारा करती है जब इस तरह के काम समाज में पाप समझे जाते थे? लेकिन, माला सिन्हा ने इस किरदार को बहुत ही शानदार तरीके से निभाया है। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित भी किया गया। इस फिल्म के बाद माला सिन्हा ने यश चोपड़ा के साथ उनकी अगली फिल्म 'धर्मपुत्र' में भी मुख्य भूमिका निभाई।

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वक्त में साधना - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

साधना
वर्ष 1965 में आई यश चोपड़ा की फिल्म 'वक्त' में अभिनेत्री साधना को उनके बेहतरीन अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया। साधना का किरदार मीना इस फिल्म में कई दोराहों से गुजरा। एक चोर राजा मीना से प्यार करने लगता है जबकि मीना तो पहले से ही रवि से शादी करने की चाह रखती है, जो कि उसका पारिवारिक मित्र भी है। इन दोनों की सगाई हो रही होती है उसी समय अचानक से समारोह में भंग पड़ता है। मीना के माता पिता को पता चलता है कि रवि उनके दोस्त का असली बेटा नहीं है। अब यहां से शुरू हो जाती है मीना की अग्नि परीक्षा। मीना परिवार को भी संभालती है और अपने प्रेम को भी कायम रखती है। इस फिल्म में साधना का काम उनके सबसे बेहतरीन कामों में से एक है।

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Yash chopra birthday 10 films that changed presentation of heroines in Hindi cinema
नंदा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

नंदा
अभिनेत्री नंदा वैसे तो यश चोपड़ा के निर्देशन में 'धूल का फूल' फिल्म में भी काम कर चुकी थीं लेकिन उन्हें अपने आप को दिखाने का मौका वर्ष 1969 में आई फिल्म 'इत्तेफाक' में मिला। यहां वह राजेश खन्ना, बिंदु और इफ्तेखार के साथ मुख्य भूमिका में नजर आईं। नंदा का किरदार रेखा कहानी के दौरान बहुत कुछ झेलता है। दरअसल, फिल्म में दिलीप रॉय नाम का एक चित्रकार है जो अपनी पत्नी की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया जाता है। अचानक वह पुलिस के चंगुल से भाग निकलता है और सीधे रेखा के घर पहुंचता है। रेखा पहले से ही शादीशुदा है लेकिन उसका पति उस वक्त घर पर नहीं है। अब यहां रेखा दुविधा में है कि दिलीप को छुपाने के लिए कहीं पुलिस उसे न पकड़ ले। अगर वह पुलिस को बताती है तो दिलीप उसे मार देगा। और, अगर ऐसे में रेखा का पति आता है तो भी वह दिक्कत में आएगी। तो यहां वह जो स्थिति का सामना कर रही है, उसके लिए वह बहुत चुनौतीपूर्ण है। इस किरदार को नंदा ने बहुत शानदार तरीके से निभाया और इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार का नामांकन भी मिला।

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शर्मिला टैगोर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

शर्मिला टैगोर
यश चोपड़ा की वर्ष 1973 में आई फिल्म 'दाग' में राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर और राखी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। इस फिल्म की दो मुख्य अभिनेत्रियां हैं और दोनों की ही एक दुख भरी दास्तान है। शर्मिला टैगोर का किरदार फिल्म में सोनिया कोहली का है। वह राजेश खन्ना के किरदार सुनील कोहली की पत्नी है। ये दोनों शादी करके जब हनीमून के लिए जाते हैं तो अचानक से मौसम खराब होने की वजह से इन दोनों को अपने बॉस के घर पर रुकना पड़ता है। इसी बीच अचानक से बॉस का लड़का धीरज सोनिया से दुष्कर्म करने की कोशिश करता है और इस छीना झपटी में सुनील के हाथों धीरज की हत्या हो जाती है। इस घटना पर अदालत सुनील को उम्र कैद की सजा सुनाती है। यहां से सोनिया के लिए काफी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। वह सुनील के बच्चे की मां बनने वाली है और अब बच्चे के सिर से उसके पिता का साया भी उठ गया। सोनिया खुद एक अध्यापक की नौकरी करती और अपने बच्चे को पालती है।

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