सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। आज हम आपको उत्तर प्रदेश के सीएम व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के बारे में एक रोचक कहानी बताने जा रहे हैं। इस कहानी के माध्यम से आप यह जान सकेंगे कि योगी आदित्यनाथ छोटी उम्र में ही अपने कार्यों से लोगों के बीच नायक बन गए थे। बता दें कि योगी ने सन्यासी बनने के बाद पहली बार गोरखनाथ मंदिर के बाहर निकलकर छात्रों का नेतृत्व किया और एसएसपी को फोन कर चेतावनी दे डाली। दूसरी ओर लोगों ने कहना शुरू कर दिया- 'महंत दिग्विजयनाथ ने दोबारा जन्म लिया है।'
Yogi Special: सीएम योगी को इस वजह से पड़ी थी डांट, नहीं भूले यह सीख, जानें क्यों लोग देखने लगे उनमें महंत दिग्विजयनाथ की छवि
जब वाहन चलाना सीखते समय सीएम योगी को लगी चोट
योगी आदित्यनाथ की सीखने की शक्ति और सन्यासी जीवन में ढलने की क्षमता उल्लेखनीय थी, लेकिन वाहन सीखने की उनकी कोशिशों को जल्द ही झटका लगा। एक बार वह जोंगा वाहन चला रहे थे जो एक पेड़ से टकरा गई और योगी बुरी तरह से घायल हो गए। योगी को काफी दिन तक अस्पताल में रहना पड़ा था।
मंदिर में जनता दरबार की कमान योगी के संभालते ही दूर-दूर से पहुंचने लगे लोग
इसी बीच गोरखनाथ मंदिर में रोजाना लगने वाले जनता दरबार को भी योगी ने अपने हाथ में ले लिया था। यह गोरखपुर के लोगों के साथ शुरू हुआ था, लेकिन जैसे ही चर्चाएं फैलने लगीं कि कैसे महंत ने जमीनी विवाद हल कर दिया या चुटकियों में वैवाहिक मामलों का निपटारा हो गया। लोग दूर-दूर से अपनी समस्याओं के अंबार लेकर वहां पहुंचने लगे। गोरखनाथ मंदिर में कोई भी अपने प्रार्थनापत्र के साथ पहुंच सकता था।
इस बात पर महंत अवेद्यनाथ ने योगी को दी सीख
एक बार मंदिर में कई श्रद्धालुओं ने जूता-चप्पल चोरी होने की शिकायतें कीं। मठ के कर्मचारियों ने बताया कि इस चोरी के पीछे आसपास के मुस्लिम इलाकों के बच्चों का हाथ है। एक शाम योगी भंडारे का निरीक्षण कर रहे थे तो मुस्लिम लड़कों का एक समूह पंक्ति में बैठा था। उन्हें बताया गया कि ये भोजन करेंगे और दूसरे का चप्पल पहनकर चल देंगे। योगी ने देखा और बोले- 'यहां कैसे, चलो भागो यहां से', जैसे ही लड़के निकलने लगे, इतने में महंत अवेद्यनाथ ने योगी को अपने पास बुला लिया। महंत के पूछने पर योगी बोले-शरारती बच्चे यहां जूते-चप्पल चुराते हैं तो महंत बोले- फिर क्या हुआ? वे आपके मेहमान थे। भंडारे से किसी को भूखे नहीं लौटाना चाहिए। जाइए और उन्हें वापस लेकर आइए। योगी उन बच्चों को वापस भंडारे में बुलाकर प्यार से खाना खिलाया।
