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पिता ने की जिस 'बेटी' की अंत्येष्टि, वो जिंदा दिखी तो छूकर बोले-मेरी है पर मेरे लिए मर चुकी है
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Thu, 06 Feb 2020 12:03 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर में एक युवती का शव मिला। उसकी कद काठी और उम्र कुछ वैसी थी, जैसी इंजीनियरिंग कॉलेज के कमलेशपुरम कॉलोनी इलाके से गायब युवती शिखा दुबे की। पिता को बुलाया गया, घरवाले, रिश्तेदार भी जुटे सबने माना लाश शिखा की है। पिता राम प्रकाश दुबे ने खुद अपने हाथ बेटी की अंत्येष्टि की। पिता ने पड़ोसी दीपू पर आशंका जताई और हत्या का केस दर्ज करा दिया। एक दिन अचानक शिखा दुबे जिंदा सामने आई तो पिता के होश उड़ गए।
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- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने अपने पुराने मुखबिर तंत्र पर भरोसा किया। खबर मिली कि दीपू सोनभद्र में है। सोनभद्र पहुंचकर पुलिस टीम के सामने जो वाकया आया वह हैरान कर देने वाला था। न केवल दीपू, वहां तो शिखा भी मौजूद थी। वो भी जिंदा। पुलिस की सख्ती पर दोनों ने मुंह खोला तो जो कहानी ऊभर कर सामने आई उसका केंद्र मोहल्ला कमलेशपुरम था।
डीआईजी भी हो गए थे हैरान
तब गोरखपुर के डीआईजी रहे मुकेश बाबू शुक्ला भी हैरान हो गए थे। सोनभद्र गई टीम ने जब उन्हें बताया था कि शिखा दुबे जिंदा है तो उन्हें भी यकीन नहीं हुआ था। वह इस बात को मानने को तैयार ही नहीं थे कि शिखा जिंदा हो सकती है। उन्हें अपनी टीम के नशे में होने की आशंका हो गई थी। फिर जब अगले दिन शिखा को लेकर टीम लौटी तब ही डीआईजी को यकीन हो पाया कि सच में शिखा जिंदा है।
डीआईजी भी हो गए थे हैरान
तब गोरखपुर के डीआईजी रहे मुकेश बाबू शुक्ला भी हैरान हो गए थे। सोनभद्र गई टीम ने जब उन्हें बताया था कि शिखा दुबे जिंदा है तो उन्हें भी यकीन नहीं हुआ था। वह इस बात को मानने को तैयार ही नहीं थे कि शिखा जिंदा हो सकती है। उन्हें अपनी टीम के नशे में होने की आशंका हो गई थी। फिर जब अगले दिन शिखा को लेकर टीम लौटी तब ही डीआईजी को यकीन हो पाया कि सच में शिखा जिंदा है।
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इस सनसनीखेज कहानी में पांच किरदार थे। शिखा (23) दुबली-पतली। किसी की भी नजर टिक जाए। पड़ोसी दीपू (26)। उसकी नजरें, शिखा से कुछ यूं मिली कि आग दोनों के दिलों में भड़क उठी। कहने को तो यह मोहब्बत थी, मगर विधि अपना विधान पूरा करने की भूमिका रच रही थी। पांच परिवारों की बर्बादी, बदनामी, एक महिला की मौत, एक बच्ची के सिर से मां का साया छीनने की भूमिका।
विधि का जाल बिछ चुका था, दीपू और शिख, घर से भागने और पीछे घर में होने वाले बवाल से बचने के लिए खतरनाक साजिश रच चुके थे। तय हुआ कि शिखा की कद काठी की किसी महिला की हत्या कर उसे शिखा की पहचान दे दी जाए। इस साजिश के साथ इसमें कहानी के तीसरे किरदार सुग्रीव (35)की एंट्री हुई। दीपू का दोस्त। दीपू का ट्रांसपोर्ट का कारोबार था। उसका अक्सर सोनभद्र जिले जाना होता था, वहां एक ऐसी लड़की थी, जिसकी कद-काठी शिखा से बहुत मिलती थी। यहीं से कहानी की चौथी किरदार पूजा (25) सामने आई। पूजा तीन साल की बच्ची की मां थी और जरूरतमंद भी। दीपू-सुग्रीव उसे गोरखपुर में तीन हजार रुपये की नौकरी के बहाने ले आए।
विधि का जाल बिछ चुका था, दीपू और शिख, घर से भागने और पीछे घर में होने वाले बवाल से बचने के लिए खतरनाक साजिश रच चुके थे। तय हुआ कि शिखा की कद काठी की किसी महिला की हत्या कर उसे शिखा की पहचान दे दी जाए। इस साजिश के साथ इसमें कहानी के तीसरे किरदार सुग्रीव (35)की एंट्री हुई। दीपू का दोस्त। दीपू का ट्रांसपोर्ट का कारोबार था। उसका अक्सर सोनभद्र जिले जाना होता था, वहां एक ऐसी लड़की थी, जिसकी कद-काठी शिखा से बहुत मिलती थी। यहीं से कहानी की चौथी किरदार पूजा (25) सामने आई। पूजा तीन साल की बच्ची की मां थी और जरूरतमंद भी। दीपू-सुग्रीव उसे गोरखपुर में तीन हजार रुपये की नौकरी के बहाने ले आए।
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वह दस जून की स्याह रात थी। पूजा सुग्रीव के साथ ट्रक से कूड़ाघाट आई। नौकरी और सुनहरे भविष्य की आस में। उधर, शिखा- दीपू के साथ घर से भागकर कुसम्ही जंगल पहुंच गई। जंगल में ट्रक में सवार पूजा को शिखा ने वह कपड़ा पहना दिए जिसे पहनकर वह घर से निकली थी। इतना ही नहीं उसके गले में एक धागा डाला गया जो शिखा हमेशा पहनती थी। इसके बाद ट्रक में ही पूजा की हत्या कर दी गई।
इस कत्ल में कहानी का पांचवा किरदार ट्रक का खलासी बलराम भी चंद रुपये के लालच में शामिल हो गया। हत्या के बाद सबने पूजा की लाश का चेहरा धारदार हथियार से इस कदर बिगाड़ दिया कि चेहरे से असल की पहचान ना हो सके। फिर सिंघड़िया के पास लाकर शव को फेंक दिया गया था। इस हत्या का आरोपी बनाते हुए पुलिस ने शिखा और दीपू को जेल भेज दिया, बाद में दोनों जमानत पर रिहा हो गए। केस अदालत में चल रहा है।
इस कत्ल में कहानी का पांचवा किरदार ट्रक का खलासी बलराम भी चंद रुपये के लालच में शामिल हो गया। हत्या के बाद सबने पूजा की लाश का चेहरा धारदार हथियार से इस कदर बिगाड़ दिया कि चेहरे से असल की पहचान ना हो सके। फिर सिंघड़िया के पास लाकर शव को फेंक दिया गया था। इस हत्या का आरोपी बनाते हुए पुलिस ने शिखा और दीपू को जेल भेज दिया, बाद में दोनों जमानत पर रिहा हो गए। केस अदालत में चल रहा है।
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भाई से रिश्ता टूटा, जैसे तैसे हुई शादी
शिखा दुबे हो या फिर दीपू यादव दोनों ही इस घटना के बाद अकेले पड़ गए। दीपू का भाई से रिश्ता टूट गया और एक गरीब परिवार में किसी तरह से शादी हुई। कुछ इसी तरह शिखा की शादी भी दिल्ली से कराई गई। वह भी पहचान छिपाकर। आज भी वह अपने घर नहीं आती है।
(कहानी आरोप पत्र और विभिन्न किरदारों के परिवारों से मिली जानकारी के आधार पर)
शिखा दुबे हो या फिर दीपू यादव दोनों ही इस घटना के बाद अकेले पड़ गए। दीपू का भाई से रिश्ता टूट गया और एक गरीब परिवार में किसी तरह से शादी हुई। कुछ इसी तरह शिखा की शादी भी दिल्ली से कराई गई। वह भी पहचान छिपाकर। आज भी वह अपने घर नहीं आती है।
(कहानी आरोप पत्र और विभिन्न किरदारों के परिवारों से मिली जानकारी के आधार पर)