गोरखपुर जिले के करीब 35.91 लाख मतदाताओं ने बृहस्पतिवार को ईवीएम का बटन दबाकर 109 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला कर दिया है। हालांकि, परिणाम दस मार्च को सामने आएगा। इसके बाद ही पता चलेगा कि मतदाताओं की कृपा किस प्रत्याशी पर बरसी है। जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों पर कहीं दो प्रत्याशियों के बीच सीधा तो कहीं त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला है। राजनीतिक दलों के कोर वोटरों को छोड़ दें तो अधिकतर मतदाता खामोश ही रहे। वोटरों की चुप्पी की वजह से प्रत्याशी भी उनका मूड भांपने में कामयाब नहीं रहे। इस वजह से चुनाव में उन्हें अधिक मेहनत मशक्कत करनी पड़ी। गोरखपुर शहर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद चुनावी बैटिंग करने उतरे हैं। उन्हें घेरने के लिए विपक्ष ने भी स्पिन और तेज गेंदबाजों से बॉलिंग कराई है। इसी तरह कई वर्तमान और पूर्व विधायकों ने भी चुनावी पिच पर बैटिंग की है। कई नए खिलाड़ी भी मैदान पर उतरे हैं। अब दस मार्च को पता चलेगा कि किसने चौका व छक्का मारा और कौन शून्य पर आउट हो गया।
UP Election 2022: गोरखपुर में किसने मारा छक्का, कौन शून्य पर हुआ आउट, दस मार्च को चलेगा पता
गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र मतदान प्रतिशत-55.12
योगी की जीत पर नहीं, जीत के अंतर पर चर्चा
गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मुकाबला, किसी राजनीतिक दल या प्रत्याशी से नहीं दिखा। बूथों पर जो मतदाता मिले, वह बस यही कहते मिले कि योगी के जीतने का अनुमान लगाना ठीक नहीं है। जीत का अंतर कितना होगा, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। चुनाव जरूर जीतेंगे, इसमें किसी तरह का कोई शक नहीं है। वह इसी क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद रहे हैं। इस बार विकास के मुद्दे पर वोट डाले गए हैं।
मोहद्दीपुर स्थित रफी अहमद किदवई इंटर कॉलेज में सुबह सात बजे से ही मतदान शुरू हो गया। मतदाता तेजी से आए और मतदान करके चले गए। मोहद्दीपुर की सुनीत कोहली और धर्मेंश कुमार शर्मा ने कहा कि इस चुनाव मेें मुद्दा विकास व सुरक्षा है। पिछले पांच वर्षों में गोरखपुर बदल गया है। मोहद्दीपुर क्षेत्र ही देख लीजिए। विकास के मामले में जमीन-आसमान का अंतर है। राजकीय जुबली इंटर कॉलेज पर मतदान करने आईं सीमा शाही ने कहा कि इस बार अच्छे प्रत्याशी की कमी नहीं है। योगी आदित्यनाथ योग्य उम्मीदवार हैं। सेंट एंड्रयूज इंटर कॉलेज में मतदान करने आईं शिक्षाविद लता द्विवेदी, रक्षा द्विवेदी, सविता शुक्ला ने कहा कि अब जाति-धर्म के नाम पर मतदान नहीं होगा। जो विकास करेगा, वही जीतकर जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुरक्षा का माहौल बनाया है। विकास देखा जा सकता है।
सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में मतदान करके निकले शिक्षाविद अजय शाही और आराधना शाही ने कहा कि मुख्यमंत्री चुनाव जीतेंगे, इसमें किसी तरह का कोई संशय नहीं है। देखना यह होगा कि जीत का अंतर कितना रहेगा। मतदान फीसदी बढ़ा है। इसका मतलब है कि जीत का अंतर भी बढ़ जाएगा। तुलसीदास इंटर कॉलेज में मतदान करने वाले डॉ. भोलेंद्र नारायण दुबे और डॉ. उपमा दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री को बड़े अंतर से जीत मिलेगी।
मतदान फीसदी बढ़ा
2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान के आंकड़े बताते हैं कि इस बार इस क्षेत्र में अब तक का रिकॉर्ड बना है। शाम छह बजे तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र में 55.12 फीसदी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर पूर्व के चुनावों के मतदान प्रतिशत को पीछे छोड़ चुके थे। मतदान का यह बढ़ा प्रतिशत पूर्व के चुनावों की प्रवृति पर कायम रहा तो भाजपा प्रत्याशी के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीत का अंतर नए रिकॉर्ड के रूप में सामने आ सकता है।
वर्ष मतदान प्रतिशत भाजपा की जीत का मार्जिन
2007 28.62 23392 वोट
2012 46.19 47454 वोट
2017 50.98 60730 वोट
2022 55.12 मतगणना के बाद ही तय होगा।
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र मतदान प्रतिशत -60.11
कहीं विकास तो कहीं जाति के मुद्दे पर पड़े वोट
गोरखपुर शहर से जुड़े गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में कहीं विकास तो कहीं जाति के मुद्दे पर वोट पड़े। वोटरों को अपने पाले में करने के लिए सभी दलों ने पूरा दमखम लगाया। हालांकि, मतदान खत्म होने तक कोई भी दल अपनी जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नजर नहीं आया।
आदर्श जनता इंटर कॉलेज नौसड़ बूथ पर वोट देकर लौटे दुर्गेश पासवान और संगम लाल जायसवाल का कहना था कि विकास के मुद्दे पर ही मतदान हुआ है। ज्ञानेंद्र त्रिपाठी व विकास निषाद का कहना था कि चुनाव में जनसुविधा ही सबसे बड़ा मुद्दा था। हमने अच्छी सरकार के लिए वोट दिया है। चंदा जायसवाल ने भी विकास के मुद्दे पर वोट देने की बात कही। वहीं, रुस्तमपुर क्षेत्र की रहने वाली शशि निषाद, प्रगति, ऊषा यादव आदि का कहना था कि उन्होंने बदलाव के लिए वोट दिया है।
खोराबार क्षेत्र के बूथ पर वोट देकर लौटे सुरेंद्र मिश्र का कहना था कि हमने तो वोट विकास के मुद्दे पर दिया है। भगत चौराहे के रहने वाले रामललित प्रसाद का कहना था कि स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ अपने समाज की भावनाओं का भी ख्याल करना पड़ता है। आजाद नगर की रहने वाली सीमा मद्घेशिया का कहना था कि मेरे पूरे परिवार ने अच्छी सरकार को ध्यान में रखकर वोट दिया है। हमारे लिए सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है।
सहजनवां विधानसभा क्षेत्र मतदान प्रतिशत 61.04
मतों के बिखराव पर टिकी उम्मीदवारों की उम्मीद
सहजनवां विधानसभा क्षेत्र का परिणाम मतों के बिखराव पर टिका है। चर्चा है कि दो प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के बीच मुख्य मुकाबला है, लेकिन तीसरे प्रमुख दल के प्रत्याशी को मिला वोट ही निर्णायक साबित होगा।
प्राथमिक विद्यालय सतुआभार में मतदान करने पहुंचीं 70 वर्षीय रतना मिश्रा ने कहा कि इस बार वोट, विकास और अपराध पर नियंत्रण के मुद्दे पर डाला। प्राथमिक विद्यालय भड़सार के दीपक उपाध्याय ने कहा कि इस बूथ पर भाजपा मजबूत है। काफी वोटिंग हुई है। इस वजह से क्षेत्र के एक व्यक्ति ने धमकी भी दे डाली। मुख्य मुकाबला दो प्रमुख पार्टियों के बीच है, लेकिन तीसरी प्रमुख पार्टी के प्रत्याशी को मिला वोट ही विजेता तय करेगा।
प्राथमिक विद्यालय भीमापार मतदान केंद्र पर पहुंचे श्रीप्रकाश शुक्ला ने कहा कि सुबह ही मतदान कर दिया। सुबह काफी भीड़ थी। दिन चढ़ने के साथ वोटिंग का ग्राफ घटता-बढ़ता रहा। उन्होंने कहा कि जीत-हार पर कोई खुलकर नहीं बोल रहा। साइलेंट वोटर ही निर्णायक साबित होंगे।
रेशमा रावत इंटर कॉलेज भीटी रावत मतदान केंद्र पर वोट देने पहुंचे सुग्रीव बेलदार ने कहा कि इस बार बदलाव की बयार है। प्राथमिक विद्यालय मुंडा कोहरा मतदान केंद्र पर रामपलट यादव ने कहा कि सपा काफी मजबूती से लड़ रही है। लेकिन, बसपा प्रत्याशी भी काफी दमदारी से मैदान में हैं। जोगिया कोल, जगदीशपुर, कोड़री क्षेत्र के अधिकतर मतदाताओं का कहना था कि सहजनवां में वैसे तो मुकाबला भाजपा और सपा में है, लेकिन बसपा भी कमाल कर सकती है।
कैंपियरगंज विधानसभा सीट मतदान प्रतिशत 58.93
जातीय समीकरणों में उलझा चुनाव परिणाम
कैंपियरगंज विधानसभा सीट पर चुनाव परिणाम जातीय समीकरणों में उलझा नजर आया। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग दलों के प्रत्याशियों के बीच मुकाबला दिखाई दिया। मतदाताओं की खामोशी ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। नतीजे के लिए 10 मार्च का इंतजार करना होगा।
शहर से सटे जंगल कौड़िया और इसके आसपास के गांवों में भाजपा के समर्थक अधिक दिखे, तो मुस्लिम और यादव बहुल इलाके पचमा, बरईपार, डुमरिया और जंगल अगही जैसे इलाकों में सपा समर्थक मुखर रहे। शिवपुर, करमहा जैसे गांवों में हर वर्ग के लोग अपनी-अपनी पसंद के प्रत्याशी की लामबंदी करते नजर आए।
खजुरगांवा, मूसापार जैसे निषाद बहुल इलाकों में वोटरों की चुप्पी प्रत्याशियों को बेचैन किए हुए है। कुछ गांवों में दलित मतदाताओं का दबदबा है। यह वर्ग बसपा का कैडर वोटर माना जाता है। वहीं, कई इलाकों में ब्राह्मण और कायस्थ मतदाता भी निर्णायक भूमिका में हैं। इन मतदाताओं को सभी दल अपने पक्ष में लुभाते दिखे। इस तरह जातीय आंकड़ों के खेल में चुनावी महारथी फंसे नजर आ रहे हैं।
कैंपिरयगंज सीट से भाजपा ने छह बार से लगातार जीत दर्ज करने वाले पूर्व मंत्री व विधायक फतेह बहादुर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। वह अपनी जीत के प्रति एकदम आश्वस्त हैं। सपा ने अभिनेत्री काजल निषाद को टिकट दिया है। बसपा से चंद्रप्रकाश निषाद मैदान में हैं। कांग्रेस ने सुरेंद्र निषाद को प्रत्याशी बनाया है।
तीन दलों के प्रत्याशियों के एक की जाति के होने की वजह से इनका सजातीय वोट बंटता दिख रहा है। यही बिखराव, भाजपा प्रत्याशी को राहत दे रहा है। यदि निषाद वोटरों ने किसी एक के पक्ष में एकजुटता दिखाई तो परिणाम अप्रत्याशित हो सकता है। इस विधानसभा सीट पर अनुसूचित जाति और निषाद वोटर सबसे अधिक हैं। ऐसे में सभी दलों के प्रत्याशी इन दोनों को अपने-अपने पक्ष में लामबंद करने में जुटे रहे।