गोरखपुर जिले में सिकरीगंज थाना क्षेत्र में स्कूल के पास हादसा होने के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सड़क पर कुछ दूरी पर टहल रहे संतोष, चंदन सिंह, अखंड सहित कई लोग दौड़ पड़े। गांव के अन्य लोग भी आ गए। मौके पर घायल बच्चों की हालत उनकी चीख सुनकर मौके पर मौजूद सभी की आंखों में आंसू आ गए। साक्षी के शरीर से बहते खून को देखकर लोगों के हाथ कांप गए।
गोरखपुर स्कूल बस हादसा: बच्चों की हालत देख हर कोई रोया, बह रहे थे सिर्फ आंसू
बस से बाहर आए बच्चे इतने डरे हुए थे कि सिर्फ उनके आंसू बह रहे थे। कुछ दर्द से कराह रहे थे। इतने में पुलिस और एंबुलेंस भी आ गई थी। सबको स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया, लेकिन हादसे की दहशत उनके चेहरे पर परिजनों के आने के बाद भी नजर आई। कोई मां तो कोई पिता से लिपटकर रोता नजर आया।
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प्रत्यक्षदर्शी अखंड शुक्ला, दयानिधि और राजेश ने बताया- बस की रफ्तार काफी तेज थी और पलक झपकते ही गड्ढे में दिखी। हादसे के बाद चालक भागते दिखा तो पहले लगा कि वह मदद के लिए स्कूल में सूचना देने जा रहा है, लेकिन बाद में पता चला कि वह स्कूल गया ही नहीं था। स्कूल वाले भी हादसे के बाद आ गए थे, लेकिन लोगों का गुस्सा देखकर वे बच्चों को स्कूल से बाहर करके ताला बंद कर फरार हो गए।
साक्षी के पिता सुनील बताते हैं-स्कूल से फोन आया कि बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई है और आपके बच्चों को चोट लगी है। आप स्कूल पर आइए। जब स्कूल पहुंचा तो मेरी बेटी साक्षी वहां नहीं थी। मेरे घायल बच्चे मोक्ष विश्वकर्मा (6) के साथ एंबुलेंस में बैठाकर उरुवा पीएचसी भेज दिया गया। बच्ची के बारे में पूछने पर स्कूल वालों ने बताया कि उसका इलाज उरुवा चल रहा है। जब मैं उरुवा पीएचसी पर पहुंचा तो पता चला कि साक्षी को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जब जिला अस्पताल पहुंचा तो बच्ची मृत मिली।
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मेरे बेटे को भगवान ने बचा लिया
नारायणपुर के धनविजय शर्मा बताते हैं- सातवीं में पढ़ने वाला बेटा जूनियर शुक्रवार को तैयार होकर बस में सवार हुआ था। इसके बाद उसे सीट नहीं मिली तो वह ठंड लगने की बात कहते हुए नीचे उतर गया। स्कूल न जाने की जिद करने लगा। पिता ने उसे डांटा और समझाया भी, लेकिन वह एकदम से रोने लगा। फिर पिता भी उसे लेकर घर चले गए। हादसे के बाद से पिता को इस बात से ही राहत है कि वह बेटे की बात मान गए, नहीं तो आज पता नहीं क्या हुआ होता। उसे भगवान ने बचा लिया।