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13 दिन में चौथी मुठभेड़: शातिर बदमाश बिहार से आकर करते थे रेकी, फिर वारदात को देते थे अंजाम

Sat, 30 Apr 2022 02:51 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 30 Apr 2022 02:51 PM IST
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police encounter Four incidents of Gorakhpur exposed also looted in Khalilabad
गोरखपुर में मुठभेड़। - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर में कैंट इलाके के छावनी स्टेशन मार्ग पर मुठभेड़ में पकड़े गए शातिर बदमाश बिहार से आकर रेकी कर गोरखपुर और आसपास के जिलों में लूट, टप्पेबाजी की घटनाओं को अंजाम देते थे। बदमाश पूर्व में देवरिया से जेल जा चुके हैं। घटना को अंजाम देने के बाद वे तुरंत बिहार लौट जाते हैं। इन लोगों ने गोरखपुर में चार घटनाओं को अंजाम दिया था। इनका बहुत बड़ा गैंग है। हाल ही में इसी गैंग ने गोरखपुर के कौड़ीराम और कैंपियरगंज में डिक्की तोड़कर रुपये उड़ाए थे। वहीं, शाहपुर, बड़हलगंज और खलीलाबाद में हुई लूट को भी इन्हीं बदमाशों ने अंजाम दिया था।



जानकारी के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने से पहले हैरान और करन बैंक की लाइनों में लग जाते थे। वहां पर जेब में चार-पांच हजार रुपये रखकर जमा करने की बात कहते थे। फिर कैश काउंटर पर देखते थे कि कौन कितना रुपये निकाल रहा है। एक बैंक में महज 15 मिनट ही रुकते थे। इस दौरान कोई मिला तो ठीक नहीं तो दूसरे बैंक में जाकर रेकी करते थे। इसी रेकी के बाद बाहर आकर साथियों के साथ वारदात को अंजाम देते थे। एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने बताया कि ये जिन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते थे, उसे एक वारदात के बाद फेंक दिया करते थे। यही वजह है कि ये जल्दी पकड़े नहीं जाते थे।

 

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। - फोटो : अमर उजाला।

सबसे कम उम्र का हैरान है गिरोह का सरगना
पकड़े गए सभी बदमाशों में हैरान ही सबसे कम उम्र का है, लेकिन गिरोह का सरगना यही है। ये अपने कम उम्र का फायदा उठाकर शातिर तरीके से वारदात कर देता था और आपराधिक मामले भी नहीं दर्ज होते थे। पूछताछ में इसने बताया कि बंगाल में भी उसने वारदात की है। हैरान पर गोरखपुर में पहली बार दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं। हत्या की कोशिश, जालसाजी, कूटरचित दस्तोवज तैयार करने, 7 सीएलए और दूसरा आर्म्स एक्ट का है। इसके पहले बिहार के बोधगया व अन्य थानों से भी जेल जा चुका है। हैरान के नाम को लेकर भी पुलिस कर्मी परेशान दिखे। पुलिस कर्मियों को लगा कि बदमाश अपना गलत नाम बता रहा है। इसे लेकर कई बार पूछताछ की गई, फिर दस्तावेजों से पता चला कि उसका नाम हैरान है।

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करन - फोटो : अमर उजाला।

करन करता था लूट और रेकी
करन अपने साथी हैरान के साथ बैंक की लाइन में खड़े होकर रेकी करने का काम करता था। इसके बाद सड़कों पर निशाना बनाकर लूट की वारदात को अंजाम देता था। चंद मिनटों में शातिर तरीके से डिक्की तोड़कर रुपये उड़ाने का काम भी गिरोह में इसी के पास ही था। करन के खिलाफ गोरखपुर के कैंट थाने में हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट, कोतवाली देवरिया में यूपी गैंगस्टर एक्ट, लूट, एनडीपीएस एक्ट, गौरीबाजार में लूट के तीन मुकदमे दर्ज हुए हैं। अभी आठ मुकदमे सामने आए हैं। इसके अलावा गैर प्रांतों में भी इसके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं।

 

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बदमाश वीरेंद्र। - फोटो : अमर उजाला।

बाइक चलाने का काम करता था वीरेंद्र
करन और हैरान आकर जब रेकी कर लेते थे तो वीरेंद्र अपने साथी शिवा के साथ बाइक से चलता था। ये दोनों ही बाइक चलाने के माहिर हैं। रुपयों की लूट हो या फिर टप्पेबाजी भागने के दौरान बाइक की हैंडल इनके हाथों में ही रहती थी। वीरेंद्र के खिलाफ कैंट थाने में दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं। हत्या की कोशिश, कूटरचित दस्तावेज, आर्म्स एक्ट केस दर्ज है। इसके खिलाफ  बिहार व दूसरे जिलों में केस सामने आए हैं, जिसका सत्यापन अभी कैंट पुलिस कर रही है।

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बदमाश शिवा। - फोटो : अमर उजाला।

शातिर है शिवा
पकड़ा गया शिवा बाइक चलाने के अलावा एक और शातिर आइडिया लाया। ओएलएक्स और दूसरे जगहों से बाइक का नंबर चोरी कर लेता था। फिर लूट में जिस बाइक का इस्तेमाल करना होता था, उस पर उसी नंबर का इस्तेमाल करता था। यह इतना शातिर था कि अगर इसे कालेरंग की पल्सर बाइक का इस्तेमाल करना होता था तो फिर उसी बाइक का नंबर चुराता था। मसलन, काले पल्सर का ही नंबर लगाता था, ताकि चेकिंग के दौरान अगर कोई नंबर देखे तो पकड़ न पाए। ऐसे में चोरी की बाइक को चेसिस के नंबर से ही पकड़ा जा सकता था।
 

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