गोरखपुर में बाढ़ के सभी रिकॉर्ड तोड़, अपनी सीमाओं को लांघ कर दूसरे क्षेत्र में तबाही मचाने वाली सरयू नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। इसके नाते बाढ़ के पानी से घिरे गावों की संख्या घटने लगी है। जो नावें लगाई गई थीं, उनको हटाया जा रहा है। लेकिन, राप्ती नदी अब भी उफान पर है।
Gorakhpur Flood: राप्ती का उफान जारी, अब भी खतरे के निशान से 1.13 मीटर ऊपर
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जनपद के गोला और खजनी तहसील के डेढ़ सौ गावों को अपनी जद में लेने के बाद सरयू नदी का जलस्तर नीचे आने लगा तो उस क्षेत्र के लोगों के साथ ही प्रशासन के लोगों ने राहत की सांस ली है। अब सरयू नदी अयोध्या में खतरे के निशान से 29 सेमी नीचे आ गई। लेकिन, बरहज में सरयू नदी खतरे के निशान से अब भी 80 सेमी ऊपर बह रही है। दूसरी तरफ राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। वह खतरे के निशान से बुधवार की शाम तक 1.13 मीटर ऊपर गोरखपुर में बह रही थी। इसी तरह से गोर्रा नदी पिडरा घाट में अब भी खतरे के निशान से 60 सेमी ऊपर बह रही है। रोहिन बहुत पहले ही खतरे के निशान से नीचे बह रही है। वह इस समय लाल निशान से 2.71 मीटर नीचे पहुंच गई है।
बाढ़ खंड-2 अधिशासी अभियंता रूपेश खरे ने कहा कि सिद्धार्थनगर में तीन बांध टूट गए थे। इससे उसका पानी काफी दूर तक फैल गया था। कई जगह भारी जल जमाव के कारण वहां गांवों की स्थिति खराब हो गई थी। वहां से पानी निकालने के लिए कई जगहों पर बांधों को काटा गया। वह पानी राप्ती में आ रहा है। इस नाते उसका जलस्तर बढ़ रहा है। यह क्रम अभी दो से तीन दिन तक जारी रहेगा। उसके बाद राप्ती भी घटने लगेगी।
अब भी 302 गांव बाढ़ से प्रभावित, 57 गांव पूरी तरह से पानी से घिरे
गोरखपुर। जिस नदी ने सबसे अधिक गांवों को बाढ़ से प्रभावित किया उसका जलस्तर लगातार नीचे आ रहा है। बावजूद इसके अब भी 302 गांव बाढ़ से प्रभावित प्रशासन की नजर में हैं। पूरी तरह से पानी से घिरे गांवों की संख्या अब घटकर 57 रह गई है। 234 नावों को बाढ़ प्रभावित गांवों में लगाया गया है। बाढ़ के पानी से 190033 की आबादी प्रभावित हुई है। जबकि 15385 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलों को नुकसान पहुंचा है। बुधवार को कम्युनिटी किचन के माध्यम से 8400 लंच पैकेट तथा पानी की 2000 बोतलों का वितरण किया गया। अब तक 28190 पैकेट राशन वितरित किया जा चुका है। इसके अलावा 28190 तिरपाल भी वितरित किए गए हैं।
राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग ने राप्ती के तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। जो संवेदनशील स्थान है वहां सतत निगरानी की जा रही है। विभाग का दावा है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। कहीं कोई दिक्कत नहीं है।