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गोरखपुर में मोहन भागवत बोले-धर्म के साथ पूजा को जोड़ना गलत, यह सबको जोड़ता और एक रखता है

Mon, 27 Jan 2020 06:38 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Mon, 27 Jan 2020 06:38 PM IST
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republic day 2020 rss chief mohan bhagwat flag hoisting in Gorakhpur, three colors of national flag
सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में ध्वजारोहण के बाद छात्र- छात्राओं को संबोधित करते आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि धर्म को गलती से पूजा के साथ जोड़ दिया गया है। यह धर्म का एक छोटा हिस्सा है। धर्म सबको जोड़ता और एक रखता है। बिखरने नहीं देता है। विशिष्ट पूजा के साथ धर्म नहीं जुड़ता है। भारतीय भाषा में धर्म का अपना महत्व है।


सदियों से कहा जाता है वसुधैव कुटुंबकम। भारत में रहने वाले सब लोग हमारे अपने हैं। गरीब, वंचित की सेवा सबसे बड़ी देशभक्ति है। जाति प्रथा और छुआछूत खत्म हो, इसके लिए हम सबको मिलकर सतत प्रयास करने होंगे। सामाजिक समरसता से देश की एकता, अखंडता मजबूत रहेगी।

republic day 2020 rss chief mohan bhagwat flag hoisting in Gorakhpur, three colors of national flag
सरसंघचालक मोहन भागवत ने गोरखपुर में फहराया तिरंगा। - फोटो : अमर उजाला
सरसंघचालक ने पहली बार गोरखपुर में गणतंत्र दिवस मनाया। सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुभाष चंद्र बोस नगर में तिरंगा फहराया। नगर निगम मैदान में आयोजित समारोह में सरसंघचालक ने कहा कि भगवा को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां फैलाई गई हैं। हम सब जानते हैं तिरंगे के सबसे ऊपर का रंग केसरिया है। सुबह के समय जैसा रंग सूर्य का होता है, वैसा ही भगवा होता है। इसके सामने सब श्रद्धा से सिर झुकाते हैं। भगवा रंग भी ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक है। भगवा पहनकर कोई व्यक्ति सामने आ जाए तो श्रद्धा भाव से सिर झुक जाता है।

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सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मंचासीन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। - फोटो : अमर उजाला
सरसंघचालक ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए संघर्ष हुआ था। स्वतंत्रता मिली लेकिन तंत्र अंग्रेजों का चल रहा था। इसके बाद देश के राजनेता, तपस्वी और धार्मिक लोगों ने गणतंत्र को स्वीकार किया। तभी तय हुआ था कि भारत चलेगा तो भारत के अनुसार। भारत माता की भक्ति हम सबका कर्तव्य है। नाना जी देशमुख से किसी ने पूछा था आपने क्या किया है? नाना जी ने सोचा, फिर कहा अपने लिए तो कुछ नहीं कर पाए। देश, समाज के लिए बहुत कुछ किया है। इसका मतलब है कि गरीब, वंचित का ध्यान रखना और उनके कल्याण की सोचना देशभक्ति की श्रेणी में आता है।

उन्होंने आगे कहा कि संविधान ने देश के हर नागरिक को राजा बनाया है। राजा के पास अधिकार हैं लेकिन अधिकारों के साथ सब अपने कर्तव्य और अनुशासन का भी पालन करें। तभी देश को स्वतंत्र कराने वाले क्रांतिकारियों के सपनों के अनुरूप भारत का निर्माण होगा। 
 

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के संवाद सुनते छात्र- छात्राएं।। - फोटो : अमर उजाला
शिक्षा के उपार्जन का उद्देश्य धनार्जन नहीं
सरसंघचालक ने विद्यार्थियों ने सीधा संवाद भी किया और कहा कि ज्ञान उपार्जन का उद्देश्य धनार्जन नहीं होना चाहिए। विद्या उपार्जन का मतलब त्याग है। भारत ज्ञान विज्ञान युक्त सकारात्मक चिंतन करने वाला देश है। यदि आपके पास विद्या, धन और ताकत है तो उसका इस्तेमाल देश, समाज के विकास में करें।

भारत भक्ति, ज्ञान की उपासना का देश है। भारत ने अपने वैभव का इस्तेमाल दुनिया की भलाई के लिए किया है। अच्छा देश श्रम से बनता है। किसान कर्मशील होते हैं, तभी खेतों में हरियाली दिखती है। आप सतत कर्मशील बने रहें, ऐसा प्रयास करें। गरीब, वंचित की सेवा सबसे बड़ा कर्तव्य है।

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सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित करते आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। - फोटो : अमर उजाला
मन शुद्ध, तभी सब कुछ सही
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि ज्ञान तो रावण के पास भी था लेकिन मन ठीक नहीं था। मन शुद्ध रहेगा तो ज्ञान का प्रयोग विद्यादान, धन का प्रयोग सेवा दान और ताकत का प्रयोग दुर्बलों की रक्षा के लिए होगा। मन में अहंकार का भाव कभी न आए, ऐसी कोशिश हमेशा करनी चाहिए।

इस मौके पर सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघ चालक वीरेंद्र पराक्रमादित्य, प्रदीप कुमार, अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख अनिलोक, अखिल भारतीय सह प्रमुख (गोसेवा) अजीत महापात्रा, क्षेत्र कार्यवाह पूर्वी उत्तर प्रदेश राम कुमार, सह क्षेत्र कार्यवाह वीरेंद्र जायसवाल, क्षेत्र प्रचारक अनिल, प्रांत प्रचारक सुभाष, प्रधानाचार्य राज बिहारी विश्वकर्मा, व्यास कुमार श्रीवास्तव और सुरेंद्र नाथ तिवारी मौजूद रहे।
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