'तीन मंजिल की अच्छी बिल्डिंग है। स्मार्ट क्लास के साथ लैब भी है। महिला छात्रावास में 39 बेड और जिम की सुविधा भी है। सेमिनार हाल और लाइब्रेरी भी है। यहां तक कि लोक सेवा आयोग से चयनित 10 शिक्षक (महिला समेत) भी हैं। बस नहीं हैं तो करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई इस व्यवस्था का फायदा उठाने वाले छात्र-छात्राएं।'
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ग्राउंड रिपोर्ट: यूपी में एक सरकारी स्कूल ऐसा भी, शिक्षक 10 और छात्र पढ़ रहे केवल 19; उपस्थित मिले मात्र सात
अक्षय कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Sun, 05 Apr 2026 08:41 AM IST
सार
रायबरेली के राजकीय महाविद्यालय हरीपुर निहस्था पर प्राइवेट कॉलेजों का जाल भारी पड़ रहा है। यहां शिक्षक तो 10 हैं, लेकिन छात्र केवल 19 ही पढ़ रहे हैं। लाखों खर्च के बाद भी बिल्डिंग अधूरी है। अधिकारी कभी आते ही नहीं हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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राजकीय महाविद्यालय हरीपुर, निहस्था का क्लास रूम।
- फोटो : अमर उजाला
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राजकीय महाविद्यालय हरीपुर, निहस्था।
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कोई नियमित चपरासी नहीं है
ग्राउंट फ्लोर के क्लास रूम के धूल में लिपटे बंद दरवाजे थे। एक क्लास में कुर्सी-मेज उल्टी करके रखी थीं। लैब पर भी कुंडी लगी थी। फर्स्ट फ्लोर पर सभी शिक्षक एक जगह बैठे थे। कुछ टीचर एक क्लास में थे। प्राचार्य डॉ. जयशंकर अपने कार्यालय में आवश्यक काम कर रहे थे। उनकी मेज पर भी कुछ जगह धूल थी। पूछने पर पता चला कि कोई नियमित चपरासी नहीं है। आउटसोर्सिंग से रखे दो कर्मचारी पूरे कॉलेज का काम देखते हैं।नहीं देखी व्यवहारिकता
रायबरेली का अंतिम छोर और उन्नाव की लगभग शुरुआत वाले इस क्षेत्र में राजकीय डिग्री कॉलेज बनाने से पहले विभागीय अधिकारियों ने साल 2015-16 में इसकी व्यवहारिकता नहीं देखी। क्षेत्र में लोगों के लिए पढ़ाई कम और डिग्री ज्यादा महत्वपूर्ण है। शायद यही वजह है कि प्राइवेट कॉलेजों की फीस (बीए-बीकॉम में लगभग 6-7 हजार, बीएससी में 10-11 हजार) की अपेक्षा यहां कम फीस (बीए-बीकॉम में 4500-5448, बीएससी में 5756-6368) के बाद भी छात्र-छात्राएं प्रवेश नहीं ले रहे हैं।
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राजकीय महाविद्यालय हरीपुर, निहस्था।
- फोटो : अमर उजाला
प्रवेश न लेने के तीन कारण
छात्रों और शिक्षकों की मानें तो पांच किमी के अंदर करीब आधा दर्जन निजी कॉलेज हैं, जहां छात्रों की संख्या 1000 से 1500 तक है। इसमें एक कानपुर विश्वविद्यालय तो बाकी लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। इसके बाद भी यहां छात्रों के प्रवेश न लेने का कारण निजी कॉलेज में मिलने वाली अन्य सुविधाएं हैं। दूसरा कारण, कॉलेज तक पहुंचने के लिए बेहतर संसाधन न होना है। तीसरा कारण, छात्राओं के लिए सुरक्षा भी है।प्राचार्य समेत आठ शिक्षक
कॉलेज में कागज पर कुल 11 शिक्षक हैं। इसमें एक 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गए हैं। एक वाराणसी और एक लखनऊ के राजकीय कॉलेज में संबद्ध हैं। वर्तमान में यहां प्राचार्य को मिलाकर आठ शिक्षक हैं। साथ ही एक वरिष्ठ सहायक व एक कार्यालय अधीक्षक हैं। यहां बीए, बीएससी व बीकॉम तीनों कोर्स हैं। प्रवेश लेने वाले 19 छात्रों में 12 छात्राएं और सात छात्र हैं।
राजकीय महाविद्यालय हरीपुर, निहस्था।
- फोटो : अमर उजाला
पंपलेट और व्हाट्सएप ग्रुप से प्रचार
शिक्षकों ने बताया कि हर साल सत्र की शुरुआत में पंपलेट व व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये प्रचार किया जाता है। बोर्ड परीक्षा से पहले पास के सभी इंटर कॉलेजों, खीरो, सेमरी, दुर्गा इंटर कॉलेज में बैठक करते हैं। इस बार तो इंटर कॉलेज के बच्चों के व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाकर प्रवेश के लिए प्रेरित कर रहे हैं।अधिकारियों और लविवि की उपेक्षा
यह कॉलेज न सिर्फ लोकेशन के हिसाब से बल्कि उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों की उपेक्षा का भी शिकार रहा है। पूछने पर किसी को याद नहीं कि पिछली बार विभाग का कौन अधिकारी यहां आया था। साल 2020-21 में कोई क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी आए थे। सरकारी कॉलेज होने के बाद भी परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाता है। परीक्षा केंद्र निजी कॉलेज बनते हैं। अगर परीक्षा केंद्र बने तो छात्रों में उम्मीद जगेगी।
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राजकीय महाविद्यालय हरीपुर, निहस्था।
- फोटो : अमर उजाला