अनुष्का शर्मा ने आखिर क्यों कहा- मेरे अंदर 'ममता' नहीं, यहां पढ़ें पूरा मामला
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अनुष्का कहती हैं कि मेहनत तो हमारा काम है। मुश्किल हालातों में काम करने के बाद दर्शकों से जब प्यार मिलता है तो शूटिंग के दौरान आई सारी दिक्कतें छोटी लगती हैं। वहीं, वरुण ने कहा कि चंदेरी जैसे इलाके में काम करना थोड़ा टफ था लेकिन काम का जो सकारात्मक माहौल और प्यार वहां मिला वो जिंदगी भर याद रहेगा।
- शूटिंग के दौरान धूप में साइकिल चलाना और फिर साइकिल से गिरना, ये सब कितना तकलीफदेह था?
वरुण ने कहा कि धूप में मैं 10-12 किमी. साईकिल चलाता था, जबकि अनुष्का उस पर बैठती थी। चिलचिलाती धूप में ये सीन शूट होने में पसीने छूट जाते थे। अनुष्का कहती है कि हम गिरे भी थे। हालांकि, चोट सिर्फ वरुण को ही लगी। वरुण ने बताया कि एक बार 2000 मीटर तक दौड़ते-दौड़ते मुझे तो उलिटयां होने लगी थीं, फिर भी मैं बहुत कूल था।
इस सवाल का जवाब देते हुए वरुण धवन ने कहा कि जब मैंने फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी तो मैं खूब हंसा था। लेकिन, जब मैंने दोबारा इसे पढ़ा तो मुझे लगा कि इसे जरूर करना चाहिए क्योंकि ये फिल्म सबके लिए है। इसे कोई भी देख सकता है। ये फिल्म पारिवारिक है तो इसमें लव स्टोरी भी है। कॉमेडी है तो इमोशन भी है और सबसे खास बात कि ये फिल्म मेड इन इंडिया को प्रमोट करती है। वहीं, अनुष्का ने कहा कि ये फिल्म जमीन से जुड़ी है। ये मेहनत और जज्बे की भी कहानी है। ये दिखाती है कि किस तरह इंसान मेहनत के बलबूते अपने पुश्तैनी काम को मार्केट में अच्छी पहचान दिलाता है।
वरुण ने कहा कि गांव में बहुत स्कोप है। हमारे देश के सारे पुश्तैनी काम तो गांव से ही शुरू हुए हैं। हर गांव और हर शहर की अपनी विशेषता है। पुराने कारीगरों के हाथ में जो जादू है, वो आजकल की कपड़े की फैक्ट्री में कहां देखने को मिलता है। चाहे आप चंदेरी का काम देख लीजिए या फिर लखनऊ की चिकनकारी का, पुश्तैनी कारीगरों का ही काम बोलता है।