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रियल लाइफ में भी भाभियों से होता है नैन मटक्का, अंगूरी भाभी संग पहुंचे 'तिवारी जी' ने खोले कई राज

Sun, 11 Mar 2018 10:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 11 Mar 2018 10:00 PM IST
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 bhabhi ji ghar par hain artists in lucknow.

अपनी चुहलबाजी से लोगों के दिलों पर राज करने वाले सीरियल ‘भाभी जी घर पर हैं’ के सितारे रविवार को लखनऊ में थे। नवाबों के शहर पहुंचे इन कलाकारों ने अपने कनपुरिया अंदाज से सभी का दिल जीता। कलाकारों ने लखनवी तहजीब और जायके को सराहा तो यहां की जरदोजी की कारीगरी को भी करीब से देखा और खरीदारी भी की। विभूति जहां नल्ले कहकर लोगों को हंसा रहे थे तो अंगूरी भाभी भी बात-बात पर ‘सही पकड़े हैं’ कहना नहीं भूल रहीं थीं। गोमतीनगर स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत में सीरियल के कलाकारों ने अपने दिलों के राज बड़ी बेबाकी से साझा किए।

 bhabhi ji ghar par hain artists in lucknow.

अब तो लोग मुझे विभूति के नाम से ही पुकारते हैं : आसिफ
सीरियल में हंसाने वाले विभूति नारायण मिश्र कहते हैं कि अब लोग उनका असली नाम आसिफ शेख तो भूल ही गए हैं। जो भी मिलता है वह विभूति ही पुकारता है। सीरियल ने उन्हें नई पहचान दी है। मूलरूप से बनारस के नदेसर के रहने वाले आसिफ कहते हैं कि 1991 की बात है जब काम ही नहीं मिल रहा था। दो साल तक किसी तरह जिंदगी चलती रही। फिर किसी तरह छोटे रोल मिले, लेकिन असल पहचान ‘भाभी जी घर पर हैं’ सीरियल से ही मिली। अब आलम यह है कि पूरी लाइफ शो तक सिमट गई है।

 bhabhi ji ghar par hain artists in lucknow.

सीरियल में अपनी पत्नी अनीता के इशारों पर चलने वाले विभूति असल जिंदगी में भी ऐसे ही हैं। कहते हैं कि घर में जब भी जरूरत पड़ती है, पत्नी का हाथ बंटा देता हूं।  शेख नेशनल एथलीट भी रह चुके हैं। दो बच्चों के पिता होने के बाद भी सीरियल में अंगूरी भाभी से छेड़छाड़ करने के सवाल पर कहते हैं कि पड़ोसियों के साथ रिश्ते हमेशा बेहतर रखने में ही भलाई है। उन्होंने बताया कि ‘लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड’ में उनका नाम सीरियल में 250 से अधिक अलग-अलग करेक्टर प्ले करने के लिए दर्ज होने वाला है।

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राबड़ी देवी से मिली प्रेरणा : शुभांगी
‘कसौटी जिंदगी की’ धारावाहिक से घर-घर में जगह बनाने वाली शुभांगी अत्रे (अंगूरी भाभी) को नवाबों के शहर से बेहद प्यार है। इंदौर में जन्मीं शुभांगी बताती हैं कि वे 2003 में कथक में नेशनल विनर भी रह चुकी हैं। वह कहती हैं कि अंगूरी के किरदार में ढलने के लिए वे बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी की शुक्रगुजार हैं। अंगूरी भाभी का किरदार निभाने के लिए उन्होंने राबड़ी की बातचीत के कई वीडियो देखे। राबड़ी का साड़ी पहनने का स्टाइल, बात करने के तौर-तरीकों को कॉपी किया। इससे उन्हें किरदार में फिट होने में काफी मदद मिली। अंगूरी कहीं झूठी न लगे, इसके लिए भोजपुरी फिल्में भी देखीं।

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भोली-भाली भाभी से रोजाना हो रही छेड़छाड़ को वह सही मानती हैं। कहती हैं कि विभूति की छेड़छाड़ तो उन्हें समझ में ही नहीं आती। दुनिया की उलझनों से वह दूर ही रहती हैं। उन्हें जीएसटी व महंगाई से कोई वास्ता नहीं। एक सवाल के जवाब में शुभांगी ने कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे आर्ट फिल्में करेंगी। लखनऊ से उन्होंने अपनी मां के लिए साड़ी व बहन के लिए चिकन का कुर्ता भी खरीदा। उन्होंने लखनवी व्यंजनों की काफी तारीफ की।

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