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गांव से गैलेक्सी तक: यूपी में देश की पहली स्पेस एजुकेशन लैब हब; सरकारी स्कूलों में AI, रोबोटिक्स की होगी पढ़ाई

विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 16 Feb 2026 09:18 AM IST
सार

यूपी की उड़ान गांव से गैलेक्सी तक होगी। महोबा के 40 सरकारी स्कूलों में इसरो ने स्पेस लैब सजाई है। सरकारी स्कूलों में AI, रोबोटिक्स की पढ़ाई होगी। वहीं मेरठ में 406 करोड़ रुपये से ड्रोन रनवे बनेगा। इससे हवाई सुरक्षा मजबूत होगी। 

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ISRO has set up space labs in 40 government schools in Mahoba AI and robotics will be taught
यूपी के सरकारी स्कूलों में AI, रोबोटिक्स की होगी पढ़ाई। - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक का ज्ञान मिलेगा। देश में पहली बार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जिला प्रशासन के सहयोग से महोबा में एक साथ 40 सरकारी विद्यालयों में स्पेस लैब का शुभारंभ करेगा।


लखनऊ की संस्था व्योमिका फाउंडेशन और इसरो के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर अहमदाबाद व जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से इसरो विलेज वैज्ञानिक कार्यक्रम के तहत महोबा में स्पेस लैब स्थापित की गई हैं। सोमवार को रतौली ग्राम पंचायत के राजकीय विद्यालय से इसरो अहमदाबाद के निदेशक डॉ. नीलेश एम देसाई इसका उद्घाटन करेंगे।
 
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ISRO has set up space labs in 40 government schools in Mahoba AI and robotics will be taught
स्पेस स्टेशन - फोटो : AI
शुरुआत में बुंदेलखंड के दस हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभमिलेगा। व्योमिका फाउंडेशन के दिलीप त्रिपाठी के अनुसार, महोबा से शुरू हुई यह पहल ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच की दूरी कम करेगी।

बच्चों को इसरो जाने का मौका

एक वर्ष के स्पेस शिक्षा पाठ्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर रहेगा। वार्षिक मूल्यांकन के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रगति की नियमित समीक्षा होगी। बच्चों को समय-समय पर इसरो के शोध केंद्र जाकर सीखने का मौका भी मिलेगा।
 
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रोबोटिक्स/Robotics - फोटो : ANI

आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगी लैब 

स्कूली स्पेस लैब में ग्रामीण विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह तकनीक, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम, एआई, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक जैसी आधुनिक विधाओं की जानकारी दी जाएगी। इन संसाधनों के जरिये पारंपरिक पढ़ाई को प्रयोगात्मक बनाया जाएगा। लैब में दूरबीन, थ्री-डी प्रिंटर, इसरो मिशन मॉडल, रोबोट, ड्रोन और स्टेम आधारित प्रयोगात्मक किट उपलब्ध कराई जाएंगी।

सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से मेरठ में देश के पहले मानव रहित विमान ड्रोन रनवे का निर्माण किया जाएगा। बीआरओ ने इसके लिए 406 करोड़ रुपये की परियोजना का टेंडर जारी कर दिया है। 900 एकड़ में बनने वाला यह रनवे रक्षा, निगरानी, ड्रोन परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण होगा।
 
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ऑपरेशन सिंदूर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद केंद्र सरकार ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को नया रूप देना शुरू कर दिया है। सरकार ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण मेरठ छावनी में देश का पहला समर्पित मानव रहित विमान (यूएवी) और ड्रोन रनवे विकसित करने की तैयारी की है। दिल्ली के निकट होने के कारण मेरठ में इस परियोजना के निर्माण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे देश की हवाई निगरानी को मजबूती मिलेगी। परियोजना के पूरा होने में लगभग सात वर्ष लगने का अनुमान है।

युद्धों के लिए रनवे की जरूरत

विशेषज्ञ बताते हैं कि आधुनिक विश्व में बुद्ध के तौर-तरीके बदल गए हैं। इसलिए भविष्य के युद्धों के लिए इस प्रकार के रनवे की जरूरत पड़ेगी। विशेष तौर पर ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट के लिए रनवे का डिजाइन तैयार किया गया है। यहां ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण भी मिलेगा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock

आपदा के समय भी मिलेगा फायदा 

ड्रोन रनवे का प्रयोग सैन्य जरूरतों, आपदा प्रबंधन, सैन्य निगरानी, प्राकृतिक आपदा के समय राहत ब बचाव कार्यों और दूरदराज के इलाकों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने में हो सकेगा। रनवे की लंबाई 2110 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी। इस रनवे पर सी-295 और सी-130 जैसे परिवहन विमानों के साथ रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट का संचालन हो सकेगा।
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