पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग सैलानियों के लिए मंगलवार से खुल चुका है। यहां घूमने वाले हिरनों के झुंड, गेरुआ नदी में उछल कूद करती डाल्फिनें, धूप सेंकते घड़ियाल, बाघ व तेंदुओं और जंगल का मनोरम दृश्य हर किसी का मन मोह रहा है।
Bahraich: बाघ व हिरनों की चहलकदमी के बीच पर्यटकों के लिए खुला कतर्नियाघाट, मनोरम दृश्यों के बीच ये है खास
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सुबह-शाम बोटिंग के लिए मोटरबोट भी उपलब्ध है और बच्चों के मनोरंजन के लिए पालतू हाथी भी। वन विभाग ने सैलानियों के लिए यहां डारमेट्री, टाइगर कैंप व घड़ियाल सेंटर भी बना रखा है। चंपाकली और जयमाला सैलानियों को सैर कराएंगी।
जंगल के बीचोंबीच बर्दिया गांव में थारू होम स्टे बनाया गया है। यहां पर गांवों वालों के बीच फूस की झोपड़ी में पर्यटकों को रहने का मौका दिया जाएगा। यहां पर पर्यटकों को थारू संस्कृति देखने के साथ व्यंजन चखने का भी मौका मिलेगा। थारू होम स्टे में रूकने वाले एक पर्यटक को सात सौ रूपये किराया अदा करना होगा। इसके अलावा 500 रूपये शुल्क अदा करने पर थारू लोक गीत व लोक नृत्य देखने का भी मौका मिलेगा।
इस बार महंगी हो गई इंट्री
कतर्नियाघाट में इंट्री करने के लिए प्रति व्यक्ति शुल्क 300 रुपये कर दिया गया है, जबकि पिछले वर्ष प्रति व्यक्ति शुल्क 100 रुपये निर्धारित किया गया था। जंगल सफारी, बोटिंग, हाथी की सवारी व डाक्यूमेंट्री फिल्म का भी शुल्क बढ़ा दिया गया है। कतर्नियाघाट, निशानगाड़ा, मुर्तिहा, ककरहा, मोतीपुर रेंज में बने वन विश्राम गृह, डारमेट्री, स्विस काटेज, थारू हट में विश्राम के लिए इस बार दामों में वृद्धि हुई है।
बाघ- 30 वन विभाग के आंकड़े में (वास्तविक स्थिति करीब 55 बाघ)
चीतल- 8,000, तेंदुए- 110
सांभर- 55
नीलगाय-3000
काकड़-350
गैंडा- 14,
लंगूर-11,000
डाल्फिन-110
घड़ियाल-700
पालतू हाथी-दो
बारहसिंहा-85,
जंगली हाथी- 80
जंगली सुअर- 6,200 व जंगल के बीच पेड़ों के 60 फीट बने ट्री हट।